नीति आयोग की ‘विकसित भारत 2047 Care Strategy’ Report जारी
संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) ने “विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना” (Reimagining Care: Strategies for Empowering Caregivers in Viksit Bharat@2047) शीर्षक से अपनी रिपोर्ट जारी की.
नीति आयोग की ‘विकसित भारत 2047 Care Strategy’ Report के मुख्य निष्कर्ष:
- जनसांख्यिकीय बदलाव:
- बुजुर्ग आबादी में तीव्र वृद्धि (Elderly Care): भारत जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) से गुजर रहा है. ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023’ के अनुसार, जुलाई 2022 में बुजुर्गों (60 वर्ष और अधिक) की संख्या 14.9 करोड़ (10.5%) थी. यह आबादी वर्ष 2031 तक 19.4 करोड़ और 2050 तक बढ़कर 34.7 करोड़ (20.8%) होने का अनुमान है, जिससे दीर्घकालिक देखभाल प्रणालियों पर अभूतपूर्व दबाव पड़ेगा.
- विकलांगता परिदृश्य: जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में दिव्यांगजनों (Persons with Disability) की संख्या 2.68 करोड़ (2.21%) है, जिन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है.
- वैश्विक और घरेलू कमी: डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार वर्ष 2030 तक दुनिया भर में 1.1 करोड़ स्वास्थ्य और व्यक्तिगत देखभाल कार्यकर्ताओं (Care Workers) की भारी कमी होने का अनुमान है.
- देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy):
- अवैतनिक श्रम का बोझ: भारत में देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) मुख्य रूप से अनौपचारिक पारिवारिक मॉडल पर टिकी है. ‘टाइम यूज सर्वे 2019’ के अनुसार, भारतीय महिलाएं प्रतिदिन औसतन 299 मिनट अवैतनिक घरेलू और देखभाल कार्यों में लगाती हैं, जबकि पुरुष केवल 97 मिनट देते हैं.
- बाजार का आर्थिक मूल्य: भारत का औपचारिक देखभाल सेवा बाजार (India Care Services Market) 2023 में 29.62 बिलियन अमरीकी डॉलर आंका गया था. यह 13.76% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते हुए 2030 तक 72.31 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है.
- सरकारी डिजिटल पहल: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा मई 2026 में दो महत्वपूर्ण प्रणालियाँ शुरू की गईं:
- शतायु (SHATAYU) डैशबोर्ड: ‘सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी’ नामक यह डैशबोर्ड वास्तविक समय (Real-time) में जिला और राज्यवार प्रमाणित ‘जेरियाट्रिक केयरगिवर्स’ की उपलब्धता का डेटाबेस प्रदान करता है.
- जीवन (JEEVAN) एप्लीकेशन: ‘जॉइंट एल्डरली एम्पॉवरमेंट & वर्चुअल असिस्टेंस नेटवर्क’ मोबाइल ऐप वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकल-खिड़की सहायता तंत्र है, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ आपातकालीन एसओएस (SOS) फीचर भी शामिल है.
- चुनौतियाँ:
- असंगठित और अवमूल्यन क्षेत्र: भारत में यह कार्यबल बड़े पैमाने पर असंगठित है, जिसके कारण पेशेवर देखभाल करने वालों को कम वेतन (Lower Pay), कम प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा का अभाव झेलना पड़ता है.
- पारिवारिक ढाँचे का विखंडन: शहरीकरण, प्रवास और संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों (Nuclear Families) में बदलना पारंपरिक अनौपचारिक देखभाल प्रणालियों को कमजोर कर रहा है.
- नियामक शून्यता (Regulatory Gap): औपचारिक और अनौपचारिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रशिक्षण मानकों, गुणवत्ता आश्वासन और जवाबदेही की निगरानी के लिए एक एकीकृत विनियामक बुनियादी ढांचे की कमी है.
- सुझाव: सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल—SDG 3 (स्वास्थ्य), SDG 5 (लैंगिक समानता) और SDG 8 (सार्थक रोजगार) के अनुरूप नीति आयोग ने निम्नलिखित रणनीतिक रोडमैप प्रस्तावित किया है:
- संस्थागत नेतृत्व (Institutional Leadership): राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय और नीतिगत मार्गदर्शन के लिए एक केंद्रीय राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद (National Caregiver Council – NCC) की स्थापना की जाए.
- मानकीकृत प्रशिक्षण ढांचा: ‘राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क’ (NSQF) के तहत मानकीकृत, सक्षमता-आधारित शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने के लिए ‘नेशनल केयरगेवर क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क’ विकसित किया जाए.
- कार्यबल योजना और डिजिटल रजिस्ट्री: कार्यबल की उपलब्धता की मैपिंग और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए एक राष्ट्रीय देखभालकर्ता रजिस्ट्री (National Caregiver Registry) और समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाए.
- सामाजिक सुरक्षा और कल्याण (Social Security): अनौपचारिक और परिवार-आधारित देखभाल करने वालों के लिए वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य बीमा और कानूनी सुरक्षा जैसे कल्याणकारी उपायों का विस्तार किया जाए.
- वैश्विक गतिशीलता (International Mobility): भारत को अपनी युवा आबादी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए द्विपक्षीय समझौतों (जैसे प्रस्थान-पूर्व ओरिएंटेशन प्रशिक्षण – PDOT) को सुदृढ़ कर वैश्विक हब के रूप में स्थापित करना चाहिए.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: विकसित भारत 2047 केयर स्ट्रेटेजी रिपोर्ट क्या है?
उत्तर: यह अगस्त 2026 में नीति आयोग द्वारा जारी एक नीतिगत रिपोर्ट है, जो भारत में देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) को मजबूत और व्यवस्थित करने का रोडमैप देती है.
प्रश्न 2: नीति आयोग ने यह रिपोर्ट क्यों जारी की?
उत्तर: देश की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी (2050 तक 34.7 करोड़) और विकलांगता दर के कारण देखभाल सेवाओं की भारी घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने हेतु इसे जारी किया गया.
प्रश्न 3: रिपोर्ट में किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है?
उत्तर: रिपोर्ट मानकीकृत कौशल प्रशिक्षण (Skilling), राष्ट्रीय रजिस्ट्री के निर्माण, तकनीकी एकीकरण (शतायु एवं जीवन ऐप) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन तंत्र को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करती है.
प्रश्न 4: केयर इकोनॉमी क्या होती है?
उत्तर: इसमें बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों और दिव्यांगजनों के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक कल्याण के लिए प्रदान की जाने वाली वैतनिक और अवैतनिक दोनों प्रकार की सहायक सेवाएं (Caregiving Services) शामिल हैं.
प्रश्न 5: इस रिपोर्ट से महिलाओं को क्या लाभ होगा?
उत्तर: देखभाल क्षेत्र के औपचारिकरण और व्यावसायिक प्रशिक्षण से महिलाओं पर अवैतनिक घरेलू कार्यों का आर्थिक बोझ कम होगा, जिससे आर्थिक कार्यबल (LFPR) में उनकी भागीदारी बढ़ेगी.है.
