Project Vault of America

संदर्भ:
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ (Project Vault) का आधिकारिक शुभारंभ किया है। यह $12 बिलियन की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य अमेरिका के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों का एक विशाल भंडार बनाना है।
प्रोजेक्ट वॉल्ट के मुख्य बिंदु:
- परिचय: प्रोजेक्ट वॉल्ट (Project Vault) ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू की गई एक सामरिक पहल है, जिसके तहत अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिजों का एक विशाल राष्ट्रीय भंडार बनाया जाना प्रस्तावित है।
- उद्देश्य: इस परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य अमेरिकी उद्योगों (विशेष रूप से रक्षा, ऑटोमोटिव और टेक सेक्टर) के लिए खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और चीन पर निर्भरता कम करना है।
- वित्तीय संरचना: प्रोजेक्ट वॉल्ट $12 बिलियन का एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल है। इसमें यूएस एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (EXIM) से $10 बिलियन का ऋण और निजी क्षेत्र से लगभग $2 बिलियन की पूंजी शामिल है।
- सामरिक महत्व: इसे अमेरिका के ‘रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) की तर्ज पर बनाया गया है, ताकि किसी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में अमेरिकी विनिर्माण ठप न हो।
खनिजों की सूची और उपयोग:
- US Geological Survey (USGS) ने 50 से अधिक खनिजों को ‘क्रिटिकल’ घोषित किया है, जिन्हें प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत संग्रहित किया जाएगा:
- दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements): मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली और उच्च तकनीक वाले हथियारों के लिए।
- लिथियम, कोबाल्ट और निकल: इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और ऊर्जा भंडारण के लिए।
- गैलियम और जर्मेनियम: सेमीकंडक्टर और आधुनिक संचार उपकरणों के लिए।
आयाम:
- भू-राजनीतिक निहितार्थ: चीन वर्तमान में दुनिया के दुर्लभ मृदा खनिजों के शोधन (Refining) और प्रसंस्करण पर लगभग 80-90% नियंत्रण रखता है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम “डि-रिस्किंग” (De-risking) की नीति का हिस्सा है।
- “अमेरिका फर्स्ट” नीति: प्रोजेक्ट वॉल्ट ट्रंप की ‘माइन, बेबी, माइन’ (Mine, Baby, Mine) नीति का विस्तार है, जो घरेलू खनन और प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करती है।
- पर्यावरण और डीप-सी माइनिंग: इस परियोजना का एक पहलू गहरे समुद्र में खनन को बढ़ावा देना भी है। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खनन के लिए आगे बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक पर्यावरण संधियों पर बहस छिड़ सकती है।