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सरकार द्वारा दुर्लभ पृथ्वी गलियारा स्थापित करने का प्रस्ताव (Government proposes to set up Rare Earth Corridor) | Apni Pathshala

Government proposes to set up Rare Earth Corridor

Government proposes to set up Rare Earth Corridor

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चार राज्यों में ‘दुर्लभ पृथ्वी गलियारे’ (Rare Earth Corridors) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।  

दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REE):

रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) 17 रासायनिक तत्वों का समूह हैं, जो आधुनिक तकनीक जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रक्षा उपकरण, स्मार्टफ़ोन और नवीकरणीय ऊर्जा (पवन टरबाइन) के लिए अपरिहार्य हैं। 

दुर्लभ पृथ्वी गलियारा क्या हैं?

  • परिचय: दुर्लभ पृथ्वी गलियारे वे विशेष भौगोलिक क्षेत्र है, जहाँ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REE) के खनन, प्रसंस्करण, रिफाइनिंग और अंतिम उत्पाद निर्माण की पूरी सप्लाई चेन को एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाता है।
  • उद्देश्य: भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का लगभग 45%-80% हिस्सा चीन से आयात करता है। ये गलियारे खनन से लेकर अंतिम उत्पाद (जैसे परमानेंट मैग्नेट) तक की पूरी ‘सप्लाई चेन’ को भारत में ही विकसित करेंगे।
  • आर्थिक लक्ष्य: 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की एकीकृत विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है।
  • प्रमुख चार राज्य: चारों राज्यों को उनकी लंबी तटरेखा और मोनाजाइट सैंड (Monazite Sand) के प्रचुर भंडार के कारण चुना गया है। 
    • ओडिशा: यहाँ IREL (India) Limited का OSCOM प्लांट स्थित है, जो रेयर अर्थ एक्सट्रैक्शन का प्रमुख केंद्र है।
  • आंध्र प्रदेश: श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम और नेल्लोर जिलों के तटीय निक्षेपों में भारी मात्रा में खनिज पाए जाते हैं।
  • तमिलनाडु: कन्याकुमारी के मनवलकुरुचि (Manavalakurichi) क्षेत्र में देश के सबसे समृद्ध भारी खनिज भंडार मौजूद हैं।
  • केरल: अलुवा (Aluva) और चवारा (Chavara) जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक रूप से रेयर अर्थ रिफाइनिंग और खनन की क्षमता रही है। 

दुर्लभ पृथ्वी गलियारों की प्रमुख विशेषताएं:

  • भारी वित्तीय परिव्यय: सरकार ने इन गलियारों के भीतर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹7,280 करोड़ की परमानेंट मैग्नेट योजना शुरू की है, जिसमें 25% तक की पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है।
  • हाई-टेक टूल रूम और R&D: इन गलियारों में डिजिटल रूप से सक्षम ऑटोमेशन ब्यूरो और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो न केवल निष्कर्षण बल्कि शुद्धिकरण (Purification) की आधुनिक तकनीक पर काम करेंगे।
  • ग्रीन इकोनॉमी को समर्थन: ये गलियारे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मोटरों और पवन टरबाइन के लिए आवश्यक मैग्नेट का उत्पादन करेंगे, जो भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण सरकारी पहले:

  • भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 के माध्यम से राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) को मजबूती प्रदान की है, जिसका लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना और पुनर्चक्रण (recycling) को प्रोत्साहित करना है। 
  • MMDR अधिनियम 2023 में संशोधन करके सरकार ने लिथियम और बेरिलियम जैसे छह परमाणु खनिजों को प्रतिबंधित सूची से हटा दिया है। 
  • इसके अतिरिक्त, अन्वेषण लाइसेंस (EL) की नई नीलामी प्रणाली शुरू की गई है ताकि गहरे स्थित खनिज निक्षेपों की खोज में तेजी लाई जा सके।
  • खनिजों की बाहरी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) के माध्यम से अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक समझौते किए गए हैं। 
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप (MSP) का हिस्सा बन गया है, जो खनिज आपूर्ति श्रृंखला को चीन के प्रभुत्व से मुक्त करने का एक वैश्विक प्रयास है।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने REPM योजना शुरू की है, जो दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक के उत्पादन के लिए पूंजीगत सब्सिडी और PLI लाभ प्रदान करती है। 
  • इसके अतिरिक्त सरकार ने 25 से अधिक महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम और कोबाल्ट) पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को शून्य कर दिया गया है।

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