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नाटो का आर्कटिक सेंट्री मिशन (NATO Arctic Sentry Mission) | UPSC Preparation

NATO Arctic Sentry Mission

NATO Arctic Sentry Mission

संदर्भ:

हाल ही में, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) ने ‘आर्कटिक सेंट्री’ (Arctic Sentry) नामक एक नया सैन्य अभियान शुरू किया है। यह कदम विशेष रूप से ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव के बाद उठाया गया है।

आर्कटिक सेंट्री (Arctic Sentry) क्या है?

परिचय: ​’आर्कटिक सेंट्री’ नाटो की एक नई बहु-क्षेत्रीय सैन्य गतिविधि (Multi-domain Activity) है, जिसका उद्देश्य गठबंधन की उपस्थिति को बढ़ाना है। यह आर्कटिक क्षेत्र में पहले से चल रहे विभिन्न देशों के सैन्य अभ्यासों का एक ‘अम्ब्रेला मिशन’ है।

  • मुख्य उद्देश्य: 
    • एकीकृत कमांड (Unified Command): आर्कटिक में नाटो सहयोगियों की सभी गतिविधियों को पहली बार एक ही कमान के तहत लाना।
  • रणनीतिक स्थिरता: ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर सदस्य देशों (विशेषकर अमेरिका और डेनमार्क) के बीच पैदा हुए मतभेदों को सैन्य सहयोग के माध्यम से सुलझाना।
  • रूस और चीन का मुकाबला: रूस की बढ़ती सैन्य उपस्थिति और चीन की ‘निकट-आर्कटिक राज्य’ (Near-Arctic State) की महत्वाकांक्षाओं के बीच नाटो की सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करना।
  • सुरक्षा अंतराल (Security Gaps) की पहचान: क्षेत्र में मौजूद रक्षा खामियों का आकलन करना और उन्हें भरना।
    • नेतृत्व: इसका नेतृत्व नाटो के नवीनतम कमांड—जॉइंट फोर्स कमांड नॉरफ़ॉक (JFC Norfolk), वर्जीनिया (USA) द्वारा किया जा रहा है।
    • प्रकृति: यह एक ‘उन्नत सतर्कता गतिविधि’ है।
  • प्रमुख घटक:
    • आर्कटिक एंड्योरेंस (Arctic Endurance): डेनमार्क के नेतृत्व में ग्रीनलैंड और उसके आसपास होने वाला बहु-क्षेत्रीय अभ्यास।
  • कोल्ड रिस्पांस (Cold Response): नॉर्वे के नेतृत्व में होने वाला विशाल युद्ध अभ्यास जिसमें लगभग 25,000 सैनिक भाग लेते हैं।
  • प्रमुख देशों का योगदान:
    • जर्मनी: 4 यूरोफाइटर जेट और हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता वाले विमान तैनात करने की प्रतिबद्धता।
    • ब्रिटेन: नॉर्वे में तैनात अपने सैनिकों की संख्या को 1,000 से बढ़ाकर 2,000 करने का निर्णय।
  • डेनमार्क और फ्रांस: महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों और तकनीकी सहायता के साथ भागीदारी।

महत्व:

  • संसाधन युद्ध: बर्फ पिघलने के साथ ही आर्कटिक में छिपे तेल, गैस और खनिजों तक पहुंच आसान हो रही है। यह मिशन उन संसाधनों पर ‘पश्चिमी नियंत्रण’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।
  • नया समुद्री मार्ग: ‘उत्तरी समुद्री मार्ग’ (Northern Sea Route) भविष्य में वैश्विक व्यापार का मुख्य केंद्र बन सकता है, जिसकी निगरानी अब नाटो के ‘आर्कटिक सेंट्री’ के अधीन होगी।
  • सामूहिक सुरक्षा: यह मिशन प्रदर्शित करता है कि आंतरिक मतभेदों के बावजूद, नाटो बाहरी खतरों (रूस/चीन) के खिलाफ एकजुट रहने में सक्षम है।

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