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रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह की 80वीं वर्षगांठ (80th anniversary of the Royal Indian Navy mutiny) | UPSC

80th anniversary of the Royal Indian Navy mutiny

80th anniversary of the Royal Indian Navy mutiny

संदर्भ:

हाल ही में 18 फरवरी 2026 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1946 के रॉयल इंडियन नेवी (RIN) विद्रोह की 80वीं वर्षगांठ मनाई गई।

1946 का रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह:

  • शुरुआत: ​रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह की शुरुआत 18 फरवरी 1946 को बॉम्बे (अब मुंबई) के तट पर स्थित प्रशिक्षण पोत HMIS तलवार (HMIS Talwar) से हुई थी।
  • तत्कालिक कारण: विद्रोह का मुख्य कारण खराब भोजन की गुणवत्ता और ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किया जाने वाला नस्लीय भेदभाव था।
  • उत्प्रेरक घटना: कमांडर फ्रेडरिक किंग द्वारा नाविकों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग और बी.सी. दत्त (B.C. Dutt) की गिरफ्तारी, जिन्होंने जहाज की दीवारों पर ‘Quit India’ और ‘Jai Hind’ जैसे नारे लिखे थे।
  • विस्तार: देखते ही देखते यह विद्रोह बॉम्बे से कराची, कलकत्ता, मद्रास और विशाखापत्तनम तक फैल गया। इसमें लगभग 78 जहाजों, 20 तटवर्ती प्रतिष्ठानों और 20,000 से अधिक नाविकों ने भाग लिया।
  • नौसेना केंद्रीय हड़ताल समिति (NCSC): विद्रोह को व्यवस्थित करने के लिए एक समिति बनाई गई, जिसके अध्यक्ष एम. एस. खान और उपाध्यक्ष मदन सिंह थे।
  • एकता का प्रतीक: जहाजों पर कांग्रेस (तिरंगा), मुस्लिम लीग (चांद-तारा) और कम्युनिस्ट पार्टी (लाल झंडा) के झंडे एक साथ फहराए गए, जो अभूतपूर्व सांप्रदायिक एकता का प्रमाण था।
  • जनसमर्थन: बॉम्बे की जनता सड़कों पर उतर आई। कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर हुई हड़ताल में लाखों मजदूर शामिल हुए। ब्रिटिश सेना की गोलीबारी में 200 से अधिक नागरिक मारे गए।
  • समर्पण: सरदार वल्लभभाई पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना के आश्वासन के बाद 23 फरवरी, 1946 को विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

इस विद्रोह का महत्व:

  • सैन्य निष्ठा: इसने स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश अब भारतीय सेना के दम पर भारत पर शासन नहीं कर सकते। सेना की निष्ठा अब साम्राज्य के बजाय राष्ट्र के प्रति थी।
  • हिंदू-मुस्लिम एकता: जब देश विभाजन और सांप्रदायिकता की ओर बढ़ रहा था, तब इस विद्रोह ने सड़कों पर अभूतपूर्व एकता प्रदर्शित की।
  • संवैधानिक वार्ताओं में तेज़ी: इस दबाव के कारण ही ब्रिटिश सरकार ने जनवरी 1946 में कैबिनेट मिशन को भारत भेजने का निर्णय लिया।
  • नागरिक सर्वोच्चता: विद्रोह के अंत में राजनीतिक नेतृत्व (पटेल और जिन्ना) के हस्तक्षेप ने स्वतंत्र भारत में ‘सेना पर नागरिक नियंत्रण’ के सिद्धांत की नींव रखी।

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