Shtil-1 missile

संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने ‘श्टिल-1’ (Shtil-1) मिसाइल प्रणाली खरीद के लिए रूस की कंपनी JSC Rosoboronexport के साथ ₹2,182 करोड़ ($236 मिलियन) का समझौता किया है।
श्टिल-1 (Shtil-1) मिसाइल प्रणाली के बारे मे:
- परिचय: श्टिल-1 (Shtil-1) एक रूसी मूल की मध्यम दूरी की बहु-चैनल, सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) मिसाइल प्रणाली है। यह विशेष रूप से युद्धपोतों को हवाई खतरों जैसे विमानों, हेलीकाप्टरों और आने वाली मिसाइलों से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह प्रसिद्ध ‘बुके’ (Buk) मिसाइल प्रणाली का समुद्री संस्करण है।
- उद्देश्य: इस प्रणाली का प्राथमिक उद्देश्य नौसैनिक बेड़े को अत्यधिक हवाई सुरक्षा (Air Supremacy) प्रदान करना है। यह दुश्मन के उन लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है जो जहाज की राडार रेंज में आते हैं, जिससे जहाज की उत्तरजीविता (Survivability) सुनिश्चित होती है।
- निर्माणकर्ता: श्टिल-1 का निर्माण रूस की प्रमुख रक्षा एजेंसी Almaz-Antey द्वारा किया गया है। जिसका निर्यात JSC Rosoboronexport द्वारा किया जाता है।
प्रमुख विशेषताएं:
- वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS): यह मिसाइल को डेक के नीचे से सीधे ऊपर की ओर लॉन्च करने की अनुमति देता है, जिससे यह 360-डिग्री कवरेज प्रदान करती है और प्रतिक्रिया समय (Reaction Time) कम हो जाता है।
- मिसाइल तकनीक: यह 9M317ME इंटरसेप्टर मिसाइल का उपयोग करती है, जो उच्च गति और पैंतरेबाज़ी (Maneuverability) में सक्षम है।
- सीमा (Range): इसकी प्रभावी मारक क्षमता 2.5 किमी से लेकर 45-50 किमी तक है और यह 15 मीटर से 15 किमी की ऊंचाई तक के लक्ष्य को भेद सकती है।
- बहु-लक्ष्य क्षमता: यह प्रणाली एक साथ 12 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और उनमें से सबसे खतरनाक लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है।
रणनीतिक महत्व:
- हिंद महासागर क्षेत्र: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों के बीच, यह प्रणाली भारतीय युद्धपोतों को लंबी दूरी की सुरक्षा प्रदान करती है।
- बहु-स्तरीय सुरक्षा (Layered Defense): यह इजरायली बराक-8 (लंबी दूरी) और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) के बीच मध्यम दूरी की सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है।
- आर्थिक दक्षता: यह इज़राइली प्रणालियों की तुलना में कम खर्चीली है, जिससे नौसेना के बजट का अनुकूलन (Optimization) होता है।
- नौसेना का आधुनिकीकरण: इसे ‘P15A’ (कोलकाता क्लास) और आगामी ‘तुशील क्लास’ फ्रिगेट्स पर तैनात किया जा रहा है, जो भारतीय नौसेना की तकनीकी श्रेष्ठता को दर्शाता है।
