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ब्रह्मपुत्र रिवराइन लाइटहाउस परियोजना (Brahmaputra Riverine Lighthouse Project) | UPSC

Brahmaputra Riverine Lighthouse Project

Brahmaputra Riverine Lighthouse Project

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2, NW-2) पर भारत की पहली नदी तटीय लाइटहाउस परियोजना (Riverine Lighthouses Project) की आधारशिला रखी।

ब्रह्मपुत्र रिवराइन लाइटहाउस परियोजना:

  • स्थान: ब्रह्मपुत्र के 891 किलोमीटर लंबे नौगम्य क्षेत्र (धुबरी से सदिया) में चार रणनीतिक स्थानों पर ये लाइटहाउस बनाए जा रहे हैं:
  • पांडु (कामरूप मेट्रो जिला): गुवाहाटी का प्रमुख बंदरगाह क्षेत्र।
  • बोगीबील (डिब्रूगढ़ जिला): ऊपरी असम का महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी केंद्र।
  • सिलघाट (नगांव जिला): मध्य असम का व्यापारिक बिंदु।
  • बिस्वनाथ घाट (बिस्वनाथ जिला): नदी के उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र साइट।
    • उद्देश्य: ब्रह्मपुत्र नदी पर 24×7 सुरक्षित नौवहन (Night Navigation) सुनिश्चित करना और इसे एक प्रमुख व्यापारिक गलियारे के रूप में विकसित करना।
    • कुल लागत: लगभग ₹84 करोड़।
    • कार्यान्वयन एजेंसियां: भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और लाइटहाउस और लाइटशिप महानिदेशालय (DGLL)।
    • समय सीमा: अनुबंध के 24 महीनों के भीतर पूरा होने का लक्ष्य।
  • विशेषताएं:
    • ऊंचाई और ऊर्जा: प्रत्येक लाइटहाउस की ऊंचाई 20 मीटर होगी और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा।
    • रेंज: इनकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील (Nautical Miles) और प्रकाश सीमा 8-10 समुद्री मील होगी।
    • अतिरिक्त सुविधाएं: इनमें मौसम संबंधी डेटा के लिए सेंसर लगाए जाएंगे ताकि जहाजों को रीयल-टाइम अपडेट मिल सके।

महत्व:

  • लागत में कमी: जल परिवहन की लागत सड़क परिवहन की तुलना में एक-तिहाई और रेल परिवहन की तुलना में लगभग आधी है।
  • कार्गो वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2024-25 में NW-2 पर कार्गो आवाजाही में 53% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह परियोजना चाय, कोयला और उर्वरक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करेगी। 
  • पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र: इन लाइटहाउस को केवल नौवहन सहायता के रूप में ही नहीं, बल्कि पर्यटन स्थलों के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक साइट पर संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र और स्मारिका दुकानें (Souvenir Shops) होंगी।
  • पर्यावरण और रणनीतिक स्थिरता: सड़क और रेल पर दबाव कम होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उत्तर-पूर्व की भौगोलिक चुनौतियों के बीच, ब्रह्मपुत्र को 24 घंटे क्रियाशील बनाना रणनीतिक रूप से अनिवार्य है।

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