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भारत सरकार सरपंच पति प्रथा के खिलाफ (Government of India against Sarpanch Pati system) | UPSC

Government of India against Sarpanch Pati system

Government of India against Sarpanch Pati system

संदर्भ:

हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने “Say No To Proxy Sarpanch” (प्रॉक्सी सरपंच को कहें ना) नामक एक राष्ट्रव्यापी सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण भारत में ‘सरपंच पति’, ‘मुखिया पति’ या ‘प्रधान पति’ की प्रथा को समाप्त करना और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) को वास्तविक प्रशासनिक शक्तियां सौंपना है।

‘सरपंच पति’ प्रथा क्या है?

यह एक ऐसी प्रथा है जहां महिला सरपंच के निर्वाचित होने के बावजूद, उनके पति, पिता या कोई अन्य पुरुष रिश्तेदार अनौपचारिक रूप से ग्राम पंचायत के सभी काम करते हैं और निर्णय लेते हैं। इसमें निर्वाचित महिला को दरकिनार कर दिया जाता है और वह केवल एक ‘हस्ताक्षरकर्ता’ बनकर रह जाती है। यह छद्म या ‘प्रॉक्सी नेतृत्व’ (Proxy Leadership) है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है।

  • संवैधानिक उल्लंघन: यह प्रथा 73वें संवैधानिक संशोधन (1992) की मूल भावना के विरुद्ध है, जिसका उद्देश्य पंचायतों में 33-50% आरक्षण के माध्यम से महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण करना था।
  • प्रचलन: यह समस्या मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक देखी जाती है, जहाँ पितृसत्तात्मक मानदंड गहरे हैं। 

प्रथा के कारण:

  •  पितृसत्तात्मक संरचना: ग्रामीण समाज में महिलाओं को सार्वजनिक निर्णय लेने से दूर रखने की पारंपरिक मानसिकता。
  • शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी: प्रशासनिक कार्यों और बजट प्रबंधन के ज्ञान के अभाव में महिला प्रतिनिधि पुरुष रिश्तेदारों पर निर्भर हो जाती हैं।
  • सामाजिक दबाव: ‘घूंघट’ या ‘पर्दा’ जैसी प्रथाएं महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और ग्राम सभाओं में बोलने की क्षमता को सीमित करती हैं। 

प्रभाव:

  • लोकतंत्र का कमजोर होना: महिला सरपंचों की भूमिका को कमजोर कर, यह एक समानांतर, गैर-निर्वाचित सत्ता केंद्र बनाता है।
  • विकास कार्यों में असमानता: यदि महिलाएं सक्रिय नहीं हैं, तो विकास प्राथमिकताएं अक्सर पुरुष-प्रधान हितों पर केंद्रित हो जाती हैं।

सरकार के अन्य महत्वपूर्ण कदम:

  • सलाहकार समिति (2023-2025): सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद MoPR ने एक समिति गठित की, जिसने “प्रॉक्सी भागीदारी को समाप्त करने” के लिए सख्त दंड की सिफारिश की है।
  • Sashakt Panchayat-Netri Abhiyan: निर्वाचित महिलाओं को शासन, बजट और कानूनी ज्ञान प्रदान करने के लिए एक वर्ष का प्रशिक्षण अभियान।
  • eGramSwaraj पोर्टल: पंचायत कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल उपस्थिति के लिए।
  • कार्यबल का गठन: 17 अप्रैल 2025 को सलाहकार समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

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