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नेशनल शिपिंग बोर्ड (National Shipping Board) | Ankit Avasthi Sir

National Shipping Board

National Shipping Board

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार द्वारा नेशनल शिपिंग बोर्ड (NSB) के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच भारतीय शिपिंग उद्योग को मजबूत करना है।

नेशनल शिपिंग बोर्ड (NSB) के बारे में:

  • परिचय: भारत सरकार के पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत नेशनल शिपिंग बोर्ड (NSB) भारतीय समुद्री क्षेत्र की सर्वोच्च सलाहकार संस्था है। यह एक वैधानिक सलाहकार निकाय (Statutory Advisory Body) है। यह भारत सरकार को मर्चेंट शिपिंग और समुद्री विकास से जुड़े नीतिगत मामलों पर परामर्श देने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था है।
  • गठन: इसकी स्थापना मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 की धारा 4 के तहत 1 मार्च 1959 को की गई थी। इसकी नींव ‘पुनर्निर्माण नीति उप-समिति’ (1947) की सिफारिशों पर रखी गई थी ताकि भारतीय नौवहन को विदेशी निर्भरता से मुक्त किया जा सके।
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • उद्देश्य:
    • भारतीय ध्वज वाले जहाजों (Tonnage) की संख्या बढ़ाना।
    • समुद्री व्यापार में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना।
    • वैश्विक समुद्री प्रतिस्पर्धा में भारत की रैंकिंग (वर्तमान में शीर्ष 20 में) को सुधारना।

संगठनात्मक संरचना:

बोर्ड का पुनर्गठन सामान्यतः हर दो साल में किया जाता है। इसमें अधिकतम 22 सदस्य हो सकते हैं:

  • अध्यक्ष (Chairman): केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक प्रतिष्ठित व्यक्ति (वर्तमान में समीर कुमार खरे)।
  • संसदीय प्रतिनिधि: 6 सदस्य (4 लोकसभा से और 2 राज्यसभा से निर्वाचित)।
  • सरकारी प्रतिनिधि: पोत परिवहन मंत्रालय, भारतीय नौसेना, तट रक्षक (Coast Guard) और शिपिंग महानिदेशालय (DGS) के अधिकारी।
  • उद्योग प्रतिनिधि: जहाज मालिकों, नाविक संघों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि।

कार्य एवं शक्तियां:

  • परामर्शदात्री कार्य: मर्चेंट शिपिंग एक्ट के प्रशासन और विकास से संबंधित किसी भी मामले पर सरकार को सिफारिशें देना।
  • नीति समीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों की प्रभावशीलता का विश्लेषण करना।
  • कौशल विकास: समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों के मानकों में सुधार के लिए मार्गदर्शन देना।
  • विवाद समाधान: शिपिंग उद्योग के विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना।
  • नाविक कल्याण: भारतीय नाविकों के प्रशिक्षण (STCW मानकों के अनुरूप), रोजगार सुरक्षा और उनके सामाजिक कल्याण के लिए नियम बनाने में सहायक।
  • मैरीटाइम इंडिया विजन: ‘सागरमाला परियोजना’ और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के लक्ष्यों की निगरानी करना।
  • वैश्विक भू-राजनीतिक प्रबंधन: लाल सागर संकट (Red Sea Crisis) जैसी स्थितियों में, भारतीय जहाजों की सुरक्षा और माल ढुलाई लागत को नियंत्रित करने के लिए सरकार को  इनपुट प्रदान करना।

महत्व:

  • ब्लू इकोनॉमी: भारत की 7,500 किमी तटरेखा के माध्यम से आर्थिक विकास की संभावनाओं को अनलॉक करना।
  • आत्मनिर्भर भारत: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देना ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
  • रणनीतिक सुरक्षा: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए एक मजबूत मर्चेंट नेवी अनिवार्य है।
  • पर्यावरण: IMO (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन) के लक्ष्यों के अनुरूप ‘ग्रीन शिपिंग’ और डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में सरकार को दिशा दिखाना।

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