Two new species of lichen moth discovered
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय में ‘कौलोसेरा होलोवेई’ (Caulocera hollowayi) और ‘असुरा बुक्सा’ (Asura buxa) नामक लाइकेन मोथ की दो नई प्रजातियों की खोज की।
नई प्रजातियों का विवरण:
- कौलोसेरा हॉलोवेई (Caulocera hollowayi):
- स्थान: इसके नमूने सिक्किम के गोलितार (Golitar) क्षेत्र से एकत्र किए गए थे।
- नामकरण: इसका नाम प्रसिद्ध लेपिडोप्टेरिस्ट (Lepidopterist) दिवंगत डॉ. जेरेमी डी. हॉलोवे के सम्मान में रखा गया है।
- विशेषता: इसे इसके पंखों के अनूठे रंग पैटर्न, बैंड मार्किंग और विशिष्ट प्रजनन अंगों की सूक्ष्म संरचना के माध्यम से पहचाना गया।
- असुरा बुक्सा (Asura buxa):
- स्थान: इसकी खोज पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित पनीझोरा (Panijhora) क्षेत्र से की गई है, जो बुक्सा टाइगर रिजर्व के पास स्थित है।
- नामकरण: इसका नाम ‘बुक्सा’ क्षेत्र के नाम पर रखा गया है जहाँ इसे खोजा गया था।
- विशेषता: इसके पंखों पर विशिष्ट रंगीन बैंड और ‘केटोटैक्सी’ (chaetotaxy) — यानी शरीर पर ब्रिसल्स और स्केल की व्यवस्था — इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है।
| विशेष: इस अध्ययन में इन दो नई प्रजातियों के साथ-साथ लाइकेन मोथ की 7 अन्य प्रजातियों को भी पहली बार भारत में दर्ज किया गया है। ये मोथ लेपिडोप्टेरा (Lepidoptera) ऑर्डर के अंतर्गत आते हैं। भारत में मोथ की लगभग 12,000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। |
पारिस्थितिक महत्व:
- वायु गुणवत्ता के संकेतक: इन मोथ के कैटरपिलर मुख्य रूप से लाइकेन (Lichens) खाते हैं। लाइकेन वायु प्रदूषण, विशेष रूप से सल्फर डाइऑक्साइड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। यदि किसी क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ता है, तो लाइकेन नष्ट हो जाते हैं, जिससे इन मोथ की जनसंख्या भी प्रभावित होती है।
- पारिस्थितिकी तंत्र का कार्य: मोथ परागण (pollination) और खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसी खोजें वैज्ञानिकों को बदलते जलवायु परिवेश में पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की निगरानी करने में मदद करती हैं।
भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI):
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