CCTV also leaking data
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में सामने आए जासूसी नेटवर्क ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जांच एजेंसियों को पता चला कि कुछ संवेदनशील इलाकों में लगे CCTV कैमरों की लाइव फुटेज सीमा पार पाकिस्तान तक भेजी जा रही थी। इस खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में CCTV सिस्टम की सुरक्षा की जांच करने का फैसला लिया है।
कैसे सामने आया जासूसी का मामला?
यह मामला तब सामने आया जब गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में एक बीट कॉन्स्टेबल को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। जांच शुरू हुई तो पता चला कि कुछ छोटे-छोटे कैमरे, जो सोलर पावर से चलते थे, संवेदनशील जगहों के आसपास लगाए गए थे।
ये कैमरे इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से जुड़े हुए थे। उनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी। इस नेटवर्क के जरिए देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी बाहर पहुंच रही थी, जो बेहद गंभीर मामला है।
अब तक इस केस में 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे। कई कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
सरकार का बड़ा फैसला
इस घटना के बाद गृह मंत्रालय ने तुरंत एक्शन लेते हुए देशभर में CCTV नेटवर्क का ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए खुफिया एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
सरकार का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं और भी ऐसे कैमरे तो नहीं लगे हैं जो डेटा लीक कर रहे हों। इसके साथ ही निगरानी सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने की योजना भी तैयार की जा रही है।
1 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम
सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए फैसला किया है कि 1 अप्रैल से केवल वही CCTV कैमरे बाजार में बिक सकेंगे, जो सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हों। इसके लिए STQC सर्टिफिकेशन जरूरी होगा।
फिलहाल देश में सिर्फ 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित माना गया है। यह भी सामने आया है कि भारत में इस्तेमाल हो रहे करीब 80% CCTV कैमरे चीन के हैं, जिनसे डेटा चोरी का खतरा ज्यादा रहता है।
दुनिया में पहले ही लग चुका है बैन
सुरक्षा कारणों से अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में चीनी CCTV कैमरों पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब भारत भी इसी दिशा में सख्ती दिखा रहा है।
प्राइवेसी भी बड़ा मुद्दा
CCTV कैमरे सिर्फ सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों की निजी जिंदगी के लिए भी खतरा बन सकते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि कैमरों की फुटेज लीक होकर सोशल मीडिया तक पहुंच जाती है।
एक उदाहरण में सोनीपत रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति ने निगरानी सिस्टम को हैक कर यात्रियों की लाइव फुटेज रिकॉर्ड कर ली और उसे ऑनलाइन शेयर कर दिया। यह सीधे तौर पर लोगों की निजता का उल्लंघन है।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कैमरों के जरिए लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
भारत में क्या कहते हैं कानून?
भारत में CCTV के इस्तेमाल को लेकर कुछ स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। IT Act 2000 के तहत CCTV फुटेज को डिजिटल डेटा माना जाता है, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी है।
IT Act की धारा 66E के अनुसार, किसी की निजी जगह की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करना अपराध है। वहीं, संविधान का आर्टिकल 21 हर नागरिक को निजता का अधिकार देता है।
इसके अलावा, 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत किसी व्यक्ति की पहचान उजागर करने वाली फुटेज का गलत इस्तेमाल करना गैरकानूनी है।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
देश में CCTV कैमरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी निगरानी के लिए कोई एकीकृत सिस्टम नहीं है। अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कैमरे लगाती हैं, जिससे नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, पूरे देश में CCTV की जांच के लिए सिर्फ 15 लैब हैं। ऐसे में सभी कैमरों की समय पर जांच करना एक बड़ी चुनौती है।
आगे क्या कर सकती है सरकार?
ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद सरकार एक नया सिस्टम लागू कर सकती है, जिसमें सभी CCTV कैमरों का एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर होगा। साथ ही, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और मजबूत साइबर सिक्योरिटी सिस्टम भी जोड़ा जा सकता है।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी कैमरा बिना अनुमति के डेटा बाहर न भेज सके।
CCTV इस्तेमाल करते समय ध्यान रखने वाली बातें
अगर आप अपने घर, दुकान या ऑफिस में CCTV कैमरा लगाते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है –
- कैमरा लगे होने की जानकारी देने के लिए नोटिस बोर्ड लगाना जरूरी है।
- फुटेज को अधिकतम 90 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- किसी की अनुमति के बिना फुटेज को सोशल मीडिया पर शेयर करना अपराध है।
- कैमरा इस तरह न लगाएं कि वह पड़ोसी के घर के अंदर रिकॉर्डिंग करे।
CCTV कैसे काम करता है?
CCTV कैमरा वीडियो रिकॉर्ड करता है और उसे डिजिटल सिग्नल में बदल देता है। यह डेटा DVR या क्लाउड में स्टोर होता है। इंटरनेट के जरिए इसे मोबाइल या कंप्यूटर पर देखा जा सकता है।
यही इंटरनेट कनेक्टिविटी इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और कमजोरी भी। अगर सुरक्षा मजबूत न हो, तो इसे आसानी से हैक किया जा सकता है।
कैमरे असुरक्षित क्यों हो जाते हैं?
कई बार लोग कैमरा लगाने के बाद उसका डिफॉल्ट पासवर्ड नहीं बदलते, जिससे हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। सस्ते या बिना सर्टिफिकेशन वाले कैमरे भी जोखिम बढ़ाते हैं।
IP कैमरे, जो इंटरनेट से जुड़े होते हैं, उनमें डेटा एन्क्रिप्शन की कमी होने पर खतरा और ज्यादा हो जाता है।
निष्कर्ष:
गाजियाबाद का यह मामला सिर्फ एक जासूसी केस नहीं, बल्कि देश की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है। जिस तकनीक का इस्तेमाल हम सुरक्षा के लिए करते हैं, वही अगर असुरक्षित हो जाए तो बड़ा खतरा बन सकती है।
सरकार की सख्ती और लोगों की जागरूकता से ही इस समस्या से निपटा जा सकता है।
