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मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण 2031 तक बढ़ाया गया (Inflation targeting extended to 2031) | Ankit Avasthi Sir

Inflation targeting extended to 2031

Inflation targeting extended to 2031

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting – FIT) ढांचे को 31 मार्च, 2031 तक बढ़ा दिया है। आर्थिक स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वर्तमान 4% (+/- 2%) के लक्ष्य को ही बरकरार रखा है। 

मुख्य निर्णय और वैधानिक आधार:

  • अवधि: नया अधिदेश (Mandate) 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होकर 31 मार्च, 2031 तक प्रभावी रहेगा।
  • मुद्रास्फीति लक्ष्य: रिटेल मुद्रास्फीति (CPI) का लक्ष्य 4% पर स्थिर रखा गया है।
  • सहिष्णुता बैंड (Tolerance Band): ऊपरी सीमा 6% और निचली सीमा 2% निर्धारित की गई है।
  • कानूनी प्रावधान: यह अधिसूचना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत जारी की गई है, जो सरकार को RBI के परामर्श से हर पांच साल में मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने का अधिकार देती है।

FIT ढांचे का विकासक्रम:

  • 2016: उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों पर पहली बार FIT अपनाया गया (लक्ष्य: 4% ±2%)।
  • 2021: पहली बार समीक्षा के बाद इसी लक्ष्य को मार्च 2026 तक के लिए बढ़ाया गया।
  • 2026: दूसरी बार निरंतरता बनाए रखते हुए इसे 2031 तक विस्तारित किया गया। 

कार्यान्वयन: मौद्रिक नीति समिति (MPC):

  • संरचना: यह 6 सदस्यीय समिति है (3 RBI अधिकारी और 3 सरकार द्वारा नियुक्त बाहरी विशेषज्ञ)।
  • अध्यक्षता: RBI गवर्नर इसके पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होते हैं।
  • कार्य: MPC का मुख्य कार्य नीतिगत दर (Repo Rate) निर्धारित करना है ताकि मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
  • जवाबदेही: यदि मुद्रास्फीति लगातार 3 तिमाहियों तक 2-6% के बैंड से बाहर रहती है, तो इसे MPC की विफलता माना जाता है और RBI को सरकार को लिखित स्पष्टीकरण देना होता है। 

महत्व:

  • नीतिगत निरंतरता (Policy Continuity): लक्ष्य न बदलने से घरेलू और वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ता है।
  • अपेक्षाओं का स्थिरीकरण (Anchoring Expectations): 4% का स्पष्ट लक्ष्य परिवारों और व्यवसायों की भविष्य की मुद्रास्फीति संबंधी धारणाओं को स्थिर रखने में मदद करता है।
  • संतुलित दृष्टिकोण: यह ढांचा मूल्य स्थिरता (Price Stability) के साथ-साथ आर्थिक विकास (Growth) के उद्देश्य को भी संतुलित करता है।
  • लचीलापन (Flexibility): +/- 2% का बैंड RBI को अल्पकालिक झटकों (जैसे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि या खाद्य आपूर्ति में कमी) पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय मध्यम अवधि पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है। 
  • औसत मुद्रास्फीति: FIT अपनाने से पहले (2012-16) औसत मुद्रास्फीति 6.8% थी, जो FIT के बाद (वर्तमान श्रृंखला में) घटकर औसतन 4.9% रह गई है।
  • सफलता: पिछले दशक में लगभग 75% समय मुद्रास्फीति निर्धारित बैंड के भीतर रही है, सिवाय महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान आए बड़े झटकों के।

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