New species of marine nematode discovered
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) के वैज्ञानिकों रितिका दत्ता और अंजुम रिज़वी ने तमिलनाडु के तट पर मुक्त-जीवित समुद्री नेमाटोड की दो नई प्रजातियों की खोज की है।
प्रजातियों का विवरण:
- 1. Corononema dhriti (कोरोनोनेमा धृति):
- यह इस वंश (genus) की दुनिया भर में केवल चौथी ज्ञात प्रजाति है।
- इससे पहले यह वंश केवल ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और वियतनाम में ही दर्ज किया गया था।
- नामकरण: इसका नाम ZSI की पहली महिला निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के सम्मान में रखा गया है।
- विशेषता: इसमें एक चौकोर अग्र भाग वाली मुख गुहा (buccal cavity) और एक विशिष्ट ‘नॉब’ जैसी संरचना वाला गुबर्नाकुलम (gubernaculum) होता है।
- 2. Epacanthion indica (एपाकेंथियन इंडिका):
- इसका नाम उस देश (भारत) के नाम पर रखा गया है जहाँ इसकी खोज हुई।
- विशेषता: यह एक सूक्ष्म शिकारी (microscopic predator) है। अन्य नेमाटोड के विपरीत, इसके पास विशिष्ट जबड़े और “दांत” जैसी संरचनाएं होती हैं, जो इसे बेन्थिक खाद्य श्रृंखला में एक शिकारी की भूमिका देती हैं।
नेमाटोड के बारे मे:
- परिचय: नेमाटोड (Nematodes), जिन्हें आमतौर पर ‘राउंडवॉर्म’ (Roundworms) के रूप में जाना जाता है, ‘नेमाटोडा’ संघ के अंतर्गत आने वाले सूक्ष्म जीव हैं। ये पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले बहुकोशिकीय जीवों में से एक हैं।
- शारीरिक संरचना: ये बेलनाकार, बिना खंड वाले और दोनों सिरों पर नुकीले होते हैं। इनकी शारीरिक बनावट ‘ट्यूब के भीतर ट्यूब’ जैसी होती है, जिसमें एक पूर्ण पाचन तंत्र (मुंह से गुदा तक) होता है।
- सुरक्षात्मक परत: इनका शरीर एक कठोर लेकिन लचीले ‘क्यूटिकल’ से ढका होता है, जिसे ये समय-समय पर बदलते (moulting) रहते हैं।
- द्विपार्श्व समरूपता: ये त्रिपार्श्व (triploblastic) और द्विपार्श्व सममित (bilaterally symmetrical) जीव हैं। इनमें ‘स्यूडोकोइलोम’ (pseudocoelom) नामक शरीर की गुहा पाई जाती है।
- तंत्र की अनुपस्थिति: इनमें श्वसन और परिसंचरण तंत्र का अभाव होता है; ये अपनी त्वचा के माध्यम से श्वसन करते हैं।
पारिस्थितिक महत्व:
- पोषक तत्व चक्र (Nutrient Cycling): ये कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर आवश्यक पोषक तत्वों को वापस समुद्र में पुनर्चक्रित (recycle) करते हैं।
- तलछट स्वास्थ्य (Sediment Health): ये समुद्री तल की स्थिरता और उत्पादकता बनाए रखने में मदद करते हैं।
- बायो-इंडिकेटर (Bio-indicators): ये पर्यावरणीय स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को मापने के लिए प्राकृतिक संकेतक के रूप में कार्य करते हैं।
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ZSI के बारे में मुख्य तथ्य:
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