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टार बॉल्स प्रबंधन मसौदा नियम 2026

Tar Balls Management Draft Rules 2026

Tar Balls Management Draft Rules 2026

संदर्भ:

हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ‘प्रारूप टार बॉल्स प्रबंधन नियम, 2026’ (Draft Tar Balls Management Rules, 2026) जारी किए हैं। यह भारत के 11,098 किमी से अधिक लंबे तटरेखा की सुरक्षा के लिए तेल रिसाव और टार बॉल्स के खतरों से निपटने वाला पहला समर्पित राष्ट्रीय ढांचा है। 

टार बॉल्स (Tar Balls) क्या हैं?

    • परिचय: टार बॉल्स समुद्र में तेल रिसाव या जहाज के मलबे से पैदा होने वाले कच्चे तेल के छोटे, चिपचिपे और गहरे रंग के पिंड होते हैं। ये समुद्र की सतह पर तैरते हैं और लहरों के साथ बहकर तटों पर आ जाते हैं। 
    • निर्माण प्रक्रिया: जब समुद्र में तेल रिसाव होता है, तो हवा और लहरों के प्रभाव से हल्के घटक वाष्पित हो जाते हैं, जबकि भारी हाइड्रोकार्बन रेत और समुद्री कचरे के साथ मिलकर ठोस गोले बना लेते हैं।
    • प्रमुख स्रोत: तेल रिसाव, समुद्र के नीचे से प्राकृतिक रिसाव, जहाजों द्वारा अवैध निर्वहन, और पाइपलाइन फटना।
    • प्रभावित क्षेत्र: भारत का पश्चिमी तट (गुजरात से गोवा तक) अप्रैल और सितंबर के बीच मानसून के दौरान विशेष रूप से प्रभावित होता है। 

पारिस्थितिक और आर्थिक प्रभाव:

  1. जैव विविधता: समुद्री कछुए और मछलियाँ अक्सर इन्हें भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। ये मैंग्रोव और मूंगा चट्टानों के छिद्रों को भी बंद कर देते हैं।
  2. स्वास्थ्य: इनमें ‘पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन’ (PAHs) होते हैं जो मनुष्यों के लिए कैंसरकारी (carcinogenic) हो सकते हैं।
  3. अर्थव्यवस्था: मुंबई जैसे तटीय शहरों को पर्यटन में भारी नुकसान उठाना पड़ता है (अनुमानित ₹50 करोड़ वार्षिक हानि)।

मसौदा नियम 2026 की प्रमुख विशेषताएं:

  1. प्रदूषण भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): यदि किसी तेल सुविधा या जहाज की लापरवाही से तेल रिसाव होता है, तो मालिक पर्यावरणीय मुआवजे के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होगा। मुआवजे की राशि को अनुसंधान और जिला प्रशासन की सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  2. राष्ट्रीय और स्थानीय समन्वय:
    • भारतीय तटरक्षक बल (ICG): तेल रिसाव और टार बॉल्स के प्रबंधन के लिए ‘राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना’ (NOSDCP) को लागू करने के लिए जिम्मेदार होगा।
    • राज्य सरकारें: उन्हें तटों पर टार बॉल्स प्रदूषण को ‘राज्य आपदा’ (State Disaster) घोषित करना होगा।
    • जिला प्रशासन: तटों से टार बॉल्स को इकट्ठा करने और उनके परिवहन के लिए जिम्मेदार होगा।
  3. तकनीकी निगरानी और डेटाबेस: तेल रिसाव का पता लगाने के लिए ऑटोमेटेड अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और उपग्रह आधारित निगरानी जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/SPCB) घटनाओं का डेटाबेस तैयार करेंगे।
  4. औद्योगिक उपयोग और निपटान: जिन टार बॉल्स का कैलोरी मान (calorific value) 1,500 kcal से अधिक होगा, उन्हें सीमेंट उद्योग में ईंधन के रूप में उपयोग (Co-processing) किया जा सकता है।
  5. पर्यावरणीय मुआवजा और दंड: टार बॉल्स का पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित प्रबंधन न करने वाले ऑपरेटरों और परिवहनकर्ताओं पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।

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