राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2026 | National Highway Fee Rules 2026

संदर्भ:
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रहण) चौथा संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किया है। यह नया नियम 15 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गया है और इसका प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड (अतिभारित) वाहनों के लिए शुल्क प्रणाली को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाना है।
चौथा संशोधन नियम, 2026 की मुख्य विशेषताएं:
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- नए शुल्क: इस संशोधन के तहत सरकार ने ओवरलोडिंग के लिए शुल्क की एक नई स्तरीय संरचना पेश की है, जो ओवरलोडिंग के प्रतिशत पर आधारित है:
- 10% तक अतिरिक्त भार: ऐसे वाहनों पर कोई अतिरिक्त ओवरलोड शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
- 10% से 40% के बीच अतिरिक्त भार: इन वाहनों से मूल टोल दर का दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।
- 40% से अधिक अतिरिक्त भार: इन पर मूल टोल दर का चार गुना शुल्क देय होगा।
- नए शुल्क: इस संशोधन के तहत सरकार ने ओवरलोडिंग के लिए शुल्क की एक नई स्तरीय संरचना पेश की है, जो ओवरलोडिंग के प्रतिशत पर आधारित है:
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कार्यान्वयन और तकनीकी ढांचा: संशोधित नियमों में प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है:
- प्रमाणित वेटिंग सिस्टम: ओवरलोडिंग का निर्धारण केवल टोल प्लाजा पर स्थापित प्रमाणित वजन मापन उपकरणों (Weigh-in-Motion – WIM) के माध्यम से किया जाएगा। यदि किसी टोल प्लाजा पर वजन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो कोई ओवरलोड शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- डिजिटल भुगतान: यह शुल्क विशेष रूप से FASTag के माध्यम से ही वसूला जाएगा।
- डेटा एकीकरण: ओवरलोड वाहनों का विवरण सीधे राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर (VAHAN पोर्टल) में दर्ज किया जाएगा, जिससे भविष्य में अनुपालन की निगरानी आसान होगी।
महत्व:
- राजमार्ग अवसंरचना का संरक्षण: ओवरलोड वाहन सड़कों और पुलों को काफी नुकसान पहुँचाते हैं। सख्त शुल्क संरचना से वाहन मालिकों को निर्धारित भार सीमा के भीतर रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे रखरखाव की लागत कम होगी।
- सड़क सुरक्षा में वृद्धि: अतिभारित वाहन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक हैं। भार सीमा का कड़ाई से पालन सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करेगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल भुगतान और प्रमाणित मापन प्रणाली टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की मनमानी को कम करेगी और राजस्व रिसाव (Leakage) को रोकेगी।
- लॉजिस्टिक्स दक्षता: यह नियम माल की आवाजाही को अधिक कुशल और व्यवस्थित बनाकर भारत की नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करता है।
अन्य महत्वपूर्ण हालिया संशोधन:
- द्वितीय संशोधन नियम, 2026: इससे पहले मार्च 2026 में सरकार ने एक ई-नोटिस प्रणाली शुरू की थी, जिसके तहत बकाया टोल शुल्क वाले वाहनों को डिजिटल नोटिस भेजे जाते हैं। यदि ई-नोटिस के 72 घंटों के भीतर भुगतान किया जाता है, तो कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता, अन्यथा दोगुना शुल्क देय होता है।
- डिजिटल टोल अनिवार्य: 10 अप्रैल, 2026 से देशभर के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान को पूरी तरह से हतोत्साहित करते हुए केवल FASTag या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों को अनिवार्य किया गया है।