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स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 | Startup India Fund of Funds 2.0

Startup India Fund of Funds 2.0

संदर्भ:

हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ (Startup India FoF 2.0) को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया। यह अधिसूचना भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के बारे में:

  • परिचय: ‘फंड ऑफ फंड्स 2.0’ वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया कार्य योजना के तहत शुरू की गई ‘स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स 1.0 (FFS 1.0)’ योजना पर आधारित है।
  • कुल कॉर्पस: सरकार ने इस दूसरे चरण के लिए ₹10,000 करोड़ की राशि निर्धारित की है।
  • अवधि: इस योजना के तहत फंड की प्रतिबद्धताएं 16वें और 17वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2026 से 2036 के बीच) तक फैली होंगी।
  • निवेश मॉडल: यह एक ‘फंड ऑफ फंड्स’ मॉडल है, जिसका अर्थ है कि सरकार सीधे स्टार्टअप्स में निवेश करने के बजाय SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के कॉर्पस में योगदान देगी। ये AIF आगे चलकर स्टार्टअप्स के इक्विटी या इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करेंगे।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) इस योजना के परिचालन के लिए प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी होगी। इसके अतिरिक्त, एक अन्य घरेलू कार्यान्वयन एजेंसी का भी चयन किया जाएगा। 

रणनीतिक फोकस: 

FoF 2.0 का दृष्टिकोण पहले चरण की तुलना में अधिक खंडित और केंद्रित है। इसे मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 

  1. डीप टेक स्टार्टअप्स (Deep Tech): ऐसी जटिल प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना जिनमें अनुसंधान और विकास (R&D) चक्र लंबे और लागत अधिक होती है।
  2. प्रारंभिक विकास चरण (Early Growth Stage): छोटे AIF के माध्यम से उन उद्यमों को समर्थन देना जो विकास के शुरुआती स्तर पर हैं।
  3. नवाचार-आधारित विनिर्माण (Innovative Manufacturing): प्रौद्योगिकी-संचालित निर्माण इकाइयों को बढ़ावा देना।
  4. क्षेत्र-स्वतंत्र (Sector/Stage Agnostic): ऐसे स्टार्टअप्स को समर्थन देना जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या चरण तक सीमित नहीं हैं, ताकि व्यापक नवाचार सुनिश्चित हो सके। 

प्रशासनिक और निगरानी ढांचा:

  • उद्यम पूंजी निवेश समिति (VCIC): अनुभवी विशेषज्ञों वाली यह समिति निवेश के लिए पात्र AIF का चयन और स्क्रीनिंग करेगी।
  • अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee): DPIIT सचिव की अध्यक्षता में यह समिति योजना के कार्यान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करेगी।
  • परिचालन लचीलापन: उन क्षेत्रों (जैसे डीप टेक) के लिए परिचालन दिशा-निर्देशों में लचीलापन दिया जाएगा जिनमें लंबी अवधि के फंड की आवश्यकता होती है।

महत्व:

  • पूंजी का उत्प्रेरण (Catalyzing Capital): यह सरकारी निवेश निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए ‘एंकर’ के रूप में कार्य करता है, जिससे स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कुल फंड में गुणात्मक वृद्धि होती है (Multiplier Effect)।
  • घरेलू जोखिम पूंजी (Domestic Risk Capital): भारत के स्टार्टअप्स अक्सर विदेशी फंडिंग पर निर्भर रहते हैं। FoF 2.0 घरेलू पूंजी के प्रवाह को बढ़ाकर आर्थिक संप्रभुता और स्थिरता सुनिश्चित करता है।
  • रोजगार सृजन: उच्च-तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश से न केवल नवाचार बढ़ेगा, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का भी सृजन होगा।
  • FFS 1.0 की सफलता का विस्तार: पहले चरण (2016) में 145 AIF को पूरा ₹10,000 करोड़ आवंटित किया गया था, जिसने 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया। चरण 2.0 इसी गति को आगे बढ़ाएगा।

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