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भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल का गठन

भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल का गठन | Formation of India Maritime Insurance Pool

Formation of India Maritime Insurance Pool

संदर्भ:

भारत सरकार ने हाल ही में समुद्री व्यापार की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMI Pool) के गठन को मंजूरी दी है। यह पहल भारत के ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) के विजन और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के उद्देश्यों के अनुरूप है। 

भारत समुद्री बीमा पूल क्या हैं?

यह भारत सरकार द्वारा समर्थित एक स्वदेशी बीमा तंत्र है, जिसे भारतीय और भारत से संबंधित जहाजों को किफायती और निरंतर बीमा सुरक्षा (विशेषकर युद्ध और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौरान) प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य:

  • वैश्विक संकटों या प्रतिबंधों के दौरान विदेशी पुनर्बीमा कंपनियों पर निर्भरता को खत्म करना।
  • भारतीय समुद्री व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना।
  • भारतीय जहाज मालिकों के लिए बीमा प्रीमियम की लागत को कम करना।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee): इस पूल को भारत सरकार द्वारा ₹12,980 करोड़ की भारी-भरकम संप्रभु गारंटी दी गई है।
  • प्रशासक (Administrator): पूल का प्रबंधन सार्वजनिक क्षेत्र की पुनर्बीमा कंपनी जीआईसी रे (GIC Re) द्वारा किया जाएगा।
  • अंडरराइटिंग क्षमता: पूल की प्रारंभिक संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता लगभग ₹930 से ₹950 करोड़ आंकी गई है।
  • अवधि: यह तंत्र शुरू में 10 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
  • कवरेज के दायरे में आने वाले जहाज: भारतीय ध्वज वाले जहाज (Indian-flagged vessels), भारतीय नियंत्रित जहाज (Indian-controlled vessels) और वे विदेशी जहाज जो भारत के बंदरगाहों पर माल ला रहे हैं या यहाँ से ले जा रहे है।

कवर किए जाने वाले जोखिम:

  • हल एंड मशीनरी (Hull and Machinery): जहाज की शारीरिक क्षति。
  • कार्गो (Cargo): परिवहन किए जा रहे माल का बीमा।
  • युद्ध जोखिम (War Risk): संघर्ष क्षेत्रों या संवेदनशील समुद्री मार्गों (जैसे लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य) में परिचालन का जोखिम।
  • संरक्षण और क्षतिपूर्ति (P&I): तृतीय-पक्ष दायित्व जैसे तेल रिसाव, मलबे को हटाना, चालक दल की चोट और कार्गो क्षति।

महत्व:

  • भू-राजनीतिक अस्थिरता: मध्य-पूर्व (ईरान-इजरायल संघर्ष) जैसे क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक पुनर्बीमा कंपनियों ने या तो कवरेज वापस ले लिया है या प्रीमियम में 1000% तक की वृद्धि कर दी है। इसमें सकारात्मक परिवर्तन होंगे। 
  • आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat): वर्तमान में भारतीय जहाज तृतीय-पक्ष बीमा के लिए अंतरराष्ट्रीय क्लबों (IGP&I) पर अत्यधिक निर्भर हैं। BMI पूल इस निर्भरता को कम करेगा।
  • लागत में कमी: अनुमान है कि इस स्वदेशी विकल्प से बीमा प्रीमियम की लागत में कम से कम 25% तक की कमी आएगी।
  • विदेशी मुद्रा की बचत: विदेशी बीमाकर्ताओं को प्रीमियम के रूप में दिए जाने वाले विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange Outgo) में भारी बचत होगी।
  • आर्थिक सुरक्षा: भारत का 95% व्यापार (मूल्य के अनुसार) समुद्री मार्ग से होता है। निर्बाध बीमा कवरेज सुनिश्चित करना आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
  • संप्रभु नियंत्रण: वैश्विक प्रतिबंधों (जैसे रूस पर प्रतिबंध) की स्थिति में विदेशी बीमाकर्ता अक्सर कवरेज वापस ले लेते हैं। संप्रभु गारंटी वाला यह पूल ऐसी स्थिति में भारत के व्यापार की निरंतरता बनाए रखेगा।
  • वैश्विक तुलना: भारत अब उन विशिष्ट देशों (जैसे ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया) की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास अपने राष्ट्रीय व्यापार की रक्षा के लिए राज्य-समर्थित बीमा ढांचा है।

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