लद्दाख में 5 नए जिलों का गठन | 5 new districts formed in Ladakh

संदर्भ:
हाल ही में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पांच नए जिलों के गठन की अधिसूचना को औपचारिक मंजूरी दी। गृह मंत्रालय द्वारा अगस्त 2024 में दिए गए ‘सैद्धांतिक अनुमोदन’ के बाद अब इन जिलों के आधिकारिक कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस निर्णय के साथ लद्दाख में जिलों की कुल संख्या 2 (लेह और कारगिल) से बढ़कर अब 7 हो गई है।
5 नए जिलों का परिचय:
- ज़ांस्कर (Zanskar): इसे कारगिल जिले से पृथक किया गया है, जिसका मुख्यालय पदुम में स्थापित है। ज़ांस्कर अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और विशिष्ट तिब्बती बौद्ध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। जिला बनने से यहाँ के निवासियों को सर्दियों के दौरान प्रशासनिक कार्यों के लिए कारगिल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- द्रास (Drass): कारगिल जिले से अलग हुआ यह जिला सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इसका मुख्यालय रणबीरपुरा में है। द्रास को ‘लद्दाख का प्रवेश द्वार’ कहा जाता है और यह दुनिया के सबसे ठंडे बसे हुए क्षेत्रों में से एक है।
- नुब्रा (Nubra): लेह जिले से विभाजित इस जिले का मुख्यालय डिस्कित में है। नुब्रा घाटी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सियाचिन ग्लेशियर का आधार है। पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह एक वैश्विक केंद्र है।
- चांगथांग (Changthang): लेह से अलग हुए इस विशाल पठारी क्षेत्र का मुख्यालय न्योमा में स्थित है। यह चीन (LAC) के साथ सीमा साझा करता है और पश्मीना ऊन उत्पादन का मुख्य केंद्र है।
- शाम (Sham): लेह के पश्चिमी हिस्से को काटकर बनाया गया यह जिला सांस्कृतिक और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसका मुख्यालय खाल्त्से में है। यह क्षेत्र लद्दाख के ‘फल कटोरे’ (Apricot and Apple belt) के रूप में जाना जाता है।
संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया:
लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसकी अपनी विधानसभा नहीं है, इसलिए जिलों के गठन की प्रक्रिया राज्यों की तुलना में अधिक केंद्रीकृत होती है:
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019: लद्दाख का संपूर्ण प्रशासन इसी अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। अधिनियम की धारा 58 उपराज्यपाल को प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण और नए प्रशासनिक जिलों के सृजन की शक्ति प्रदान करती है।
- गृह मंत्रालय (MHA) का अनुमोदन: चूंकि नए जिलों के गठन से व्यापक वित्तीय प्रभाव (Financial Implication) पड़ता है, इसलिए गृह मंत्रालय की ‘सैद्धांतिक स्वीकृति’ अनिवार्य थी, जो अगस्त 2024 में प्राप्त हुई।
- राजस्व विभाग की अधिसूचना: प्रक्रिया के अंतिम चरण में, राजस्व विभाग द्वारा ‘लद्दाख राजपत्र’ (Gazette) में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें प्रत्येक जिले की सटीक सीमाओं, गांवों और राजस्व अधिकार क्षेत्र का विवरण दिया गया है।
- समिति की सिफारिशें: प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था, जिसने बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन (जैसे उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के पद) और बजटीय आवश्यकताओं का आकलन किया।
नए जिलों के गठन का महत्व:
- प्रशासनिक विकेंद्रीकरण: लद्दाख का क्षेत्रफल लगभग 86,000 वर्ग किमी है, जो भारत में सबसे बड़ा है। दो जिलों के माध्यम से इतने बड़े क्षेत्र का प्रशासन असंभव था। नए जिलों से ‘शासन की पहुंच’ सुदूर गांवों तक सुनिश्चित होगी।
- सामरिक सुरक्षा: चांगथांग और नुब्रा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों को जिला दर्जा देने से वहाँ बुनियादी ढांचे (सड़क, दूरसंचार, बिजली) का विकास तेज होगा। यह भारतीय सेना के लिए रसद आपूर्ति और सीमा प्रबंधन में सहायक सिद्ध होगा।
- आर्थिक और पर्यटन विकास: नए जिला मुख्यालयों के बनने से स्थानीय रोजगार सृजन होगा। पर्यटन का विकेंद्रीकरण होगा, जिससे केवल लेह और कारगिल पर दबाव कम होगा और नए पर्यटन सर्किट (जैसे ज़ांस्कर और न्योमा) विकसित होंगे।
- संस्कृति और पहचान का संरक्षण: प्रत्येक क्षेत्र (जैसे ज़ांस्कर या चांगथांग) की अपनी भाषा और परंपराएं हैं। जिला प्रशासन अब स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बना सकेगा।