कैलाश मानसरोवर | Kailash Mansarovar

संदर्भ:
हाल ही में विदेश मंत्रालय (MEA) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जो जून से अगस्त 2026 के बीच आयोजित की जाएगी।
- भारत सरकार द्वारा संचालित यह यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संपन्न होगी: उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) से और सिक्किम के नाथू ला दर्रे (Nathula Pass) से।
कैलाश मानसरोवर के बारे में:
- परिचय: कैलाश मानसरोवर भौगोलिक स्थल है, जो विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है।
- तिब्बत के नगारी प्रान्त में स्थित कैलाश पर्वत (6,638 मीटर), हिंदुओं के लिए यह भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान है।
- पर्वत की तलहटी में स्थित यह मीठे पानी की झील (ऊंचाई 4,590 मीटर) पवित्रता का प्रतीक है।
- प्राचीन जड़ें: ऋग्वेद, पुराण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में कैलाश को ‘ब्रह्मांड का केंद्र’ या ‘अक्ष मुंडी’ (Axis Mundi) कहा गया है।
- यह पर्वत 30 मिलियन वर्ष पूर्व टेथिस सागर के ऊपर उठने से बना माना जाता है।
- मध्यकालीन यात्राएं: 8वीं शताब्दी में तिब्बत में तांत्रिक बौद्ध धर्म की स्थापना करने वाले गुरु पद्मसंभव और 11वीं शताब्दी में प्रसिद्ध तिब्बती संत मिलारेपा का नाम इस स्थान से गहराई से जुड़ा है।
- आधुनिक इतिहास और मार्ग: 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक यह तीर्थयात्रा सामान्य भारतीयों के लिए सुलभ नहीं थी।
- 1904 में तिब्बत के ब्रिटिशों के लिए खुलने के बाद अल्मोड़ा के कलेक्टर चार्ल्स शेरिंग ने 1905 में लिपुलेख दर्रे के मार्ग को लोकप्रिय बनाया।
- प्रतिबंध और बहाली: 1950 में चीन द्वारा तिब्बत पर नियंत्रण और 1962 के युद्ध के बाद यह यात्रा बंद कर दी गई थी।
- करीब दो दशकों के अंतराल के बाद, 1981 में भारत सरकार (MEA) और चीन सरकार के बीच हुए समझौते के बाद इसे पुनः प्रारंभ किया गया।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
- हिंदू धर्म: इसे भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है। मानसरोवर झील को भगवान ब्रह्मा के मानस (मन) से उत्पन्न माना गया है।
- बौद्ध धर्म: तिब्बती बौद्ध इसे ‘कांगरी रिनपोछे’ (बहुमूल्य बर्फीली चोटी) कहते हैं। इसे चक्रसंवर (Demchok) का निवास माना जाता है, जो सर्वोच्च आनंद के प्रतीक हैं।
- जैन धर्म: जैन ग्रंथों में इसे ‘अष्टपद’ कहा गया है। मान्यता है कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने यहीं मोक्ष प्राप्त किया था।
- बोन धर्म: तिब्बत का स्वदेशी धर्म इसे आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र और ‘आकाश की देवी’ सिपैमेन का स्थान मानता है।
सामरिक और भौगोलिक महत्व:
- नदियों का उद्गम स्थल: कैलाश रेंज एशिया की चार प्रमुख जीवनदायिनी नदियों—सिंधु (Indus), सतलुज (Sutlej), ब्रह्मपुत्र और करनाली (घाघरा) का उद्गम स्रोत है, जो पूरे दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारत-चीन संबंध: यह यात्रा दोनों देशों के बीच ‘कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर’ (CBM) के रूप में कार्य करती है।
- 2020 में गलवान संघर्ष के बाद यात्रा का निलंबन और 2025-26 में इसकी बहाली द्विपक्षीय संबंधों में ‘पिघलाव’ (Thaw) का संकेत है।
- सीमा कूटनीति: लिपुलेख (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) जैसे रणनीतिक दरों के माध्यम से यात्रा का संचालन भारत के लिए अपनी सीमा अवसंरचना को मजबूत करने और सांस्कृतिक कूटनीति को सक्रिय रखने का माध्यम है।