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मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम

मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम

Methane Alert and Response System

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने अपने मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम (MARS) का विस्तार करते हुए इसमें कोयला (Coal) और अपशिष्ट (Waste) क्षेत्रों को भी शामिल किया।

मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम (MARS) क्या हैं?

MARS एक उच्च-तकनीकी, उपग्रह-आधारित वैश्विक निगरानी प्रणाली है जो वायुमंडल में मीथेन गैस के बड़े स्रोतों (Hotspots) की पहचान करती है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिमोट सेंसिंग डेटा का उपयोग करके “सुपर-एमिटर्स” (अत्यधिक उत्सर्जन करने वाले स्थान) का पता लगाती है और वास्तविक समय में संबंधित हितधारकों को सूचित करती है।

  • इसका संचालन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत इंटरनेशनल मीथेन एमिशन ऑब्जर्वेटरी (IMEO) द्वारा किया जाता है। 
  • इसकी स्थापना में यूरोपीय आयोग, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और ‘क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन’ का महत्वपूर्ण सहयोग है। 
  • इसे आधिकारिक तौर पर COP27 (शर्म अल-शेख, 2022) में लॉन्च किया गया था।

मुख्य उद्देश्य:

  • पारदर्शिता सुनिश्चित करना: मीथेन उत्सर्जन के सटीक और विश्वसनीय डेटा को सार्वजनिक करना ताकि जवाबदेही तय हो सके।
  • त्वरित कार्रवाई: बड़े रिसाव या उत्सर्जन की पहचान कर सरकारों और कंपनियों को अलर्ट भेजना ताकि वे तुरंत मरम्मत या सुधार कर सकें।
  • ग्लोबल मीथेन प्लेज का समर्थन: 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में 30% की कटौती के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करना।
  • ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करना: चूँकि मीथेन अल्पकालिक है लेकिन शक्तिशाली है, इसे रोककर अल्पकाल में तापमान वृद्धि को कम करना।

प्रमुख विशेषताएं:

  • उपग्रह तकनीक: यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सेंटिनल-5P और नासा के ‘इटिट’ (EMIT) जैसे 35 से अधिक उपग्रहों के डेटा का उपयोग करता है।
  • डेटा एकीकरण: यह उपग्रह डेटा को जमीनी सेंसर और वैज्ञानिक मॉडलों के साथ जोड़कर उत्सर्जन की मात्रा और सटीक स्थान का पता लगाता है।
  • अलर्ट प्रणाली: जब भी कोई बड़ा उत्सर्जन (लीक) पाया जाता है, MARS सीधे संबंधित देशों की सरकारों और संबंधित कंपनियों को सूचना देता है।
  • विस्तारित दायरा: प्रारंभ में यह केवल तेल और गैस क्षेत्र पर केंद्रित था, लेकिन हाल ही में इसमें कोयला खदानों और अपशिष्ट (लैंडफिल) क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
  • सार्वजनिक पोर्टल: ‘Eye on Methane’ नामक डैशबोर्ड के माध्यम से डेटा को जनता के लिए सुलभ बनाया गया है।

कार्यप्रणाली:

MARS एक चार-चरणीय प्रक्रिया पर कार्य करता है:

  • डिटेक्शन: उपग्रहों द्वारा मीथेन के “प्लम” (बादल) का पता लगाना।
  • एट्रिब्यूशन: उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विशिष्ट सुविधा या कंपनी की पहचान करना।
  • नोटिफिकेशन: संबंधित अधिकारियों को तत्काल अलर्ट भेजना।
  • ट्रैकिंग: यह देखना कि क्या कार्रवाई की गई और क्या उत्सर्जन बंद हुआ।

महत्व:

  • जलवायु प्रभाव: मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 20 वर्षों की अवधि में 80 गुना अधिक ऊष्मा सोखती है। इसकी कटौती ग्लोबल वार्मिंग को 1.5°C तक सीमित करने का सबसे तेज़ तरीका है।
  • आर्थिक लाभ: ऊर्जा क्षेत्र में मीथेन रिसाव को रोकने से प्राकृतिक गैस की बर्बादी बचती है, जो आर्थिक रूप से फायदेमंद है।
  • स्वास्थ्य लाभ: मीथेन जमीनी स्तर के ओजोन के निर्माण में सहायक है, जो श्वसन रोगों का कारण बनती है। MARS के माध्यम से इसमें कमी आने से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  • नीति निर्धारण: यह सरकारों को साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और उत्सर्जन कम करने के लिए नियम लागू करने में मदद करता है।

भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता:

भारत दुनिया के शीर्ष मीथेन उत्सर्जकों में शामिल है, विशेषकर कृषि, कोयला और कचरा प्रबंधन में। MARS ने हाल ही में मुंबई के कांजुरमार्ग जैसे लैंडफिल साइट्स से भारी उत्सर्जन की पहचान की है। यह डेटा भारत को अपने कचरा प्रबंधन और खनन प्रोटोकॉल को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधारने में सहायक है।

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