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SEBI का GARUDA प्रस्ताव

SEBI का GARUDA प्रस्ताव

SEBI का GARUDA प्रस्ताव

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) बाजार को अधिक कुशल बनाने के लिए GARUDA प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 

GARUDA प्रस्ताव क्या है?

GARUDA का पूर्ण रूप Green-Channel: AIF Rollout Upon Document Acknowledgement है। यह SEBI द्वारा AIF योजनाओं को लॉन्च करने की प्रक्रिया को सरल और तीव्र बनाने के लिए लाया गया एक “ग्रीन-चैनल” तंत्र है। 

  • इसे SEBI द्वारा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों के ‘चरण 2’ के रूप में मई 2026 को जारी किया गया है। 

प्रमुख विशेषताएं:

  • समय-सीमा में भारी कटौती: वर्तमान में किसी भी AIF योजना को लॉन्च करने के लिए दस्तावेज जमा करने के बाद 30 दिनों का प्रतीक्षा समय होता है। GARUDA के तहत इसे घटाकर केवल 10 कार्य दिवस (Working Days) करने का प्रस्ताव है।
  • रेगुलर AIF योजनाएं: मर्चेंट बैंकर के माध्यम से फाइल की जाने वाली सामान्य योजनाओं को यदि SEBI से 10 दिनों में कोई आपत्ति नहीं मिलती है, तो वे सीधे बाजार में कदम रख सकती हैं।
  • एकरेडिटेड इन्वेस्टर्स और एंजेल फंड्स को छूट: केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों (Accredited Investors) और एंजेल फंड्स (Angel Funds) के लिए मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। ये कोष सीधे SEBI के पास दस्तावेज जमा कर सकते हैं और इन्हें तत्काल (Immediate) लॉन्च की अनुमति होगी।
  • जवाबदेही का स्थानांतरण: मर्चेंट बैंकर के ड्यू-डिलिजेंस सर्टिफिकेट के स्थान पर अब AIF मैनेजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और अनुपालन अधिकारी (Compliance Officer) के व्यक्तिगत अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) को स्वीकार किया जाएगा।
  • पोस्ट-फैक्टो स्क्रूटनी (Post-facto Scrutiny): पूर्व-समीक्षा के बजाय SEBI अब जोखिम-आधारित मूल्यांकन के आधार पर योजनाओं के लॉन्च होने के बाद (Post-facto) उनके दस्तावेजों की जांच करेगा। 

इसका महत्व:

  • तीव्र पूंजी परिनियोजन (Faster Capital Deployment): फंड मैनेजर बाजार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए तुरंत निवेशकों से जुटाई गई पूंजी को निवेश कर सकेंगे।
  • लागत में कमी: मर्चेंट बैंकरों की मध्यस्थता कम होने से परिचालन लागत घटेगी, जिससे स्टार्टअप और उभरते व्यवसायों को अधिक धन उपलब्ध हो सकेगा।
  • बाजार का अभूतपूर्व विकास: SEBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पंजीकृत AIF की संख्या मार्च 2021 के 732 से बढ़कर मार्च 2026 तक 1,849 हो चुकी है। दिसंबर 2025 तक इसमें कुल संचयी प्रतिबद्धता (Cumulative Commitments) ₹15.74 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह प्रस्ताव इस तीव्र वृद्धि को गति देने के लिए आवश्यक था। [2, 4, 5, 7, 8]

विश्लेषणात्मक बिंदु:

लाभ (Pros)

चुनौतियाँ / चिंताएँ (Cons)

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्रों (जैसे सिंगापुर, गिफ्ट सिटी) के समकक्ष खड़ा करेगा।

नियामकीय जोखिम (Regulatory Risks): अग्रिम जांच न होने से कमर्शियल दस्तावेजों (PPM) में विसंगतियां बढ़ सकती हैं।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को बल: एंजेल फंड्स को तुरंत वित्तीय संसाधन प्राप्त होंगे।

निवेशकों के संरक्षण पर सवाल: छोटे या कम समझदार निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

अधिकारों का विकेंद्रीकरण: फंड प्रबंधकों की व्यक्तिगत जवाबदेही बढ़ेगी।

नियामक पर अत्यधिक बोझ: बाद में की जाने वाली जांच (Post-facto check) के लिए SEBI को और अधिक मजबूत तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होगी।

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