डॉ. के. राधाकृष्णन समिति

संदर्भ:
हाल ही में NEET-UG 2026 पेपर लीक प्रकरण मामले के चलते डॉ. के. राधाकृष्णन समिति (2024), जिन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बुनियादी सुधारों और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण ‘ब्लूप्रिंट’ (सुधार ढांचा) प्रस्तुत किया, चर्चा में है।
- वर्ष 2024 में NEET-UG और UGC-NET परीक्षा विवादों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
- मुख्य अधिदेश: समिति को मुख्य रूप से तीन व्यापक बिंदुओं पर व्यापक सिफारिशें देने का कार्य सौंपा गया था: परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार (Reform in examination process), डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में संवर्धन (Improvement in Data Security), NTA की संरचना और कार्यप्रणाली का पुनर्गठन (Structure & Functioning of NTA)।
डॉ. के. राधाकृष्णन समिति का प्रस्ताव:
समिति ने कुल 101 संस्तुतियां प्रस्तुत की हैं, जिन्हें निम्नलिखित मुख्य स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है:
1. NTA की भूमिका को सीमित करना (Refocusing NTA’s Mandate)
- केवल प्रवेश परीक्षाएं: समिति के अनुसार NTA को अपनी क्षमता बढ़ाने तक केवल विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं (Entrance Exams) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- भर्ती परीक्षाओं से रोक: NTA को नौकरियों से जुड़ी किसी भी प्रकार की सरकारी भर्ती परीक्षा (Recruitment Exams) आयोजित नहीं करनी चाहिए।
2. संगठनात्मक पुनर्गठन और सुदृढ़ शासन (Structural Overhaul)
- सशक्त शासी निकाय: NTA के अंतर्गत तीन विशिष्ट उप-समितियों (Sub-Committees) का गठन हो—1. टेस्ट ऑडिट, 2. नीतिशास्त्र एवं पारदर्शिता (Ethics & Transparency), और 3. हितधारक संबंध (Stakeholder Relations)।
- नेतृत्व सुदृढ़ीकरण: महानिदेशक (DG) का पद कम से कम केंद्र सरकार के ‘अपर सचिव’ (Additional Secretary) रैंक का होना चाहिए।
- विशेषज्ञ पदों का सृजन: तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए आईटी सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए 10 नए स्थायी पदों की सिफारिश की गई।
3. परीक्षा पद्धति में तकनीकी बदलाव (Technological & Delivery Reforms)
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (Pen-and-Paper) प्रारूप को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर CBT मॉडल को अधिकतम अपनाना ताकि भौतिक प्रश्नपत्र लीक की गुंजाइश खत्म हो।
- हाइब्रिड मॉडल (Hybrid Testing): जहाँ CBT पूरी तरह संभव न हो, वहाँ प्रश्नपत्रों को एन्क्रिप्टेड डिजिटल रूप में परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाए और परीक्षा से ठीक पहले सुरक्षित प्रिंटर से निकाला जाए।
- मल्टी-स्टेज और मल्टी-सेशन परीक्षा: छात्रों पर मानसिक तनाव कम करने और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाओं को बहु-चरणों (Multi-stage) और बहु-सत्रों में आयोजित किया जाए। इसके लिए मानकीकरण (Normalization) प्रक्रिया पारदर्शी हो।
4. पहचान सत्यापन और डेटा सुरक्षा (Data Security & Anti-Impersonation)
- ‘डिजी-एग्जाम’ (Digi-Exam) प्रणाली: ‘डिजी-यात्रा’ की तर्ज पर आवेदन से लेकर परीक्षा और प्रवेश के प्रत्येक चरण पर आधार और एआई-संचालित बायोमेट्रिक सत्यापन।
- प्रश्नपत्र सुरक्षा: प्रिंटिंग प्रेसों की पूर्व-सत्यापन निगरानी और ओआरएम (OMR) शीट की विशिष्ट कोडिंग।
5. परीक्षा केंद्रों का सुदृढ़ीकरण (Infrastructure Expansion)
- सरकारी भवनों का उपयोग: निजी आउटसोर्सिंग केंद्रों पर निर्भरता कम करके केंद्रीय विद्यालयों (KVs) और जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNVs) को डिजिटल परीक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करना।
- मोबाइल टेस्ट सेंटर (MTCs): पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे दूरदराज के इलाकों के लिए वर्कस्टेशन और इंटरनेट से लैस विशेष बसों (MTCs) का उपयोग।
6. राज्य प्रशासन के साथ समन्वय (Election-like Model)
जिला स्तर पर परीक्षा केंद्रों को जिला कलेक्टर और पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में सील और अनसील किया जाए। राज्यों के साथ समन्वय के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय समन्वय समितियां बनाई जाएं।