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भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी

भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी

India-Cyprus Strategic Partnership

संदर्भ:

हाल ही में भारत और साइप्रस ने नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान अपने ऐतिहासिक संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया। 

  • साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 

प्रमुख घटनाक्रम और समझौते:

  • रक्षा सहयोग हेतु 5-वर्षीय रोडमैप (2026-2031): दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया है।
  • साइबर सुरक्षा डायलॉग की स्थापना: उभरते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए दोनों पक्षों ने मिलकर एक विशेष ‘साइबर सुरक्षा संवाद’ शुरू करने की घोषणा की है।
  • खोज और बचाव (SAR) समझौता: भारत के रक्षा मंत्रालय और साइप्रस के लार्नाका संयुक्त बचाव समन्वय केंद्र के बीच तकनीकी समन्वय समझौता हुआ है।
  • डिजिटल और वित्तीय कनेक्टिविटी: भारत के NPCI International और यूरोबैंक साइप्रस के बीच UPI के माध्यम से सीमा पार लेनदेन (Cross-border payments) को जोड़ने पर सहमति बनी है। साथ ही GIFT सिटी के NSE अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंज को साइप्रस स्टॉक एक्सचेंज से जोड़ा जाएगा।
  • भारत-ग्रीस-साइप्रस बिजनेस काउंसिल: शिपिंग, नागरिक उड्डयन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में त्रिपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए इस परिषद की शुरुआत की गई है। 

भारत-साइप्रस संबंध:

  • भारत और साइप्रस के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1962 में स्थापित हुए थे।
  • दोनों देशों के संबंध गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के समय से ही परस्पर विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके हैं।
  • साइप्रस ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया है, जबकि भारत ने साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का लगातार समर्थन किया है। 
  • साइप्रस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल है। पिछले दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो गया है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को पुनः दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
  • दोनों देशों के बीच इनोवेशन, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जा रहा है।
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महत्व:

  • यूरोपीय संघ (EU) का प्रवेश द्वार: साइप्रस यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को अंतिम रूप देने में साइप्रस भारत के लिए एक मजबूत पैरवीकार की भूमिका निभा रहा है।
  • IMEC कॉरिडोर और समुद्री सुरक्षा: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) के संदर्भ में साइप्रस भूमध्य सागर में एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है।
  • तुर्की-पाकिस्तान धुरी का संतुलन: तुर्की द्वारा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने के जवाब में, भारत द्वारा साइप्रस (जिसका तुर्की के साथ विवाद है) के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करना भारत की “सक्रिय कूटनीति” को दर्शाता है। 
  • UNSC में स्थायी सदस्यता: साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का पुरजोर समर्थन किया है।
  • समुद्री कानून (UNCLOS): दोनों देश ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने के पक्षधर है। 

साइप्रस:

  • स्थिति: यह पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण यूरेशियन द्वीप देश है। यह भूमध्य सागर का तीसरा सबसे बड़ा और अत्यधिक आबादी वाला द्वीप है।
  • पड़ोसी क्षेत्र: यह ग्रीस के पूर्व, लेबनान, सीरिया और इजरायल के पश्चिम, मिस्र के उत्तर और तुर्की के दक्षिण में स्थित है।
  • राजनीतिक विभाजन: ऐतिहासिक विवादों के कारण यह द्वीप दो मुख्य भागों में बंटा हुआ है। इसके दक्षिण भाग में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘साइप्रस गणराज्य’ है और उत्तरी भाग में ‘उत्तरी साइप्रस का तुर्की गणराज्य’ है, जिसे केवल तुर्की मान्यता देता है।
  • राजधानी: निकोसिया (Nicosia), जो इस देश का सबसे बड़ा शहर भी है।
  • मुद्रा (Currency): यह देश वर्ष 2008 से यूरोज़ोन का हिस्सा है, इसलिए यहाँ यूरो (Euro) का उपयोग होता है।
  • यूरोपीय संघ की सदस्यता: साइप्रस 1 मई 2004 से यूरोपीय संघ (EU) का एक सक्रिय सदस्य देश है।
  • मुख्य धर्म: यहाँ की बहुसंख्यक आबादी ग्रीक साइप्रसवासियों की है जो ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म को मानती है। वहीं उत्तर में रहने वाले अधिकांश तुर्की साइप्रसवासी मुस्लिम हैं।

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