सार्थक-पीडीएस योजना

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (CCEA) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सुधार हेतु ‘सार्थक-पीडीएस’ (SARTHAK-PDS) योजना को ₹25,530 करोड़ के केंद्रीय परिव्यय के साथ मार्च 2031 तक (5 वर्ष की अवधि, 16वें वित्त आयोग चक्र) जारी रखने को मंजूरी दी।
सार्थक-पीडीएस योजना के बारे मे:
- पूरा नाम: “स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग-इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस” (Scheme for Assistance in Ration Transport and Handling-Income with Automation in PDS)।
- परिभाषा: यह एक एकीकृत ‘अम्ब्रेला’ योजना है जो देश की राशन वितरण प्रणाली में खाद्यान्नों के परिवहन, राशन दुकान (FPS) डीलरों के वित्तीय लाभांश (मार्जिन) और उन्नत डिजिटल तकनीकों को आपस में जोड़कर एक पारदर्शी, सुरक्षित और निर्बाध नेटवर्क स्थापित करती है। यह पहले से चल रही परिवहन सहायता योजना और स्मार्ट-पीडीएस (SMART-PDS) का एकीकृत रूप है।
- नोडल मंत्रालय: यह योजना उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution) के अंतर्गत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा संचालित और कार्यान्वित की जा रही है।
मुख्य उद्देश्य:
- अंतिम छोर तक वितरण (Last-Mile Delivery): भारतीय खाद्य निगम (FCI) के मुख्य गोदामों से लेकर ग्रामीण इलाकों की राशन दुकानों तक खाद्यान्न की बिना किसी रुकावट के समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- लीकेज और चोरी को शून्य करना: तकनीक के माध्यम से राशन वितरण प्रक्रिया में होने वाली कालाबाजारी और नकली राशन कार्डों की समस्या को पूरी तरह समाप्त करना।
- राज्यों का वित्तीय बोझ कम करना: राज्यों के भीतर खाद्यान्न ढुलाई (Intra-state movement) के खर्च में वित्तीय सहायता देकर राज्य सरकारों को राहत देना।
- डीलर कल्याण: उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के डीलरों को समय पर और बढ़ा हुआ मार्जिन सुनिश्चित करना, जिससे उनकी आय स्थिर हो।
प्रमुख विशेषताएं:
- ‘सक्षम’ (SAKSHAM) प्लेटफॉर्म: यह पूरी आपूर्ति श्रृंखला को एआई (AI) आधारित ट्रैक और नियंत्रित करने वाली केंद्रीय डिजिटल प्रणाली है।
- क्यूआर कोड और व्हीकल ट्रैकिंग: खाद्यान्न के बोरों पर QR-Coded Tags लगाए जाएंगे और अनाज ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग होगी, जिससे चोरी को रीयल-टाइम में रोका जा सके।
- ‘आशा’ (ASHA) एआई सहायक: नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट विकसित किया गया है, जो लाभार्थियों की क्षेत्रीय और पसंदीदा भाषाओं में रीयल-टाइम सहायता प्रदान करता है।
- कमांड कंट्रोल सेंटर: प्रत्येक राज्य स्तर पर डेटा-संचालित निगरानी के लिए अत्याधुनिक ‘स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर्स’ (Command and Control Centres) स्थापित किए जा रहे हैं।
- उन्नत डेटाबेस और आईएसओ मानक: पूरी वितरण प्रणाली को सुरक्षा प्रदान करने के लिए क्लाउड-आधारित केंद्रीय डेटाबेस और ISO-प्रमाणित प्रक्रिया रूपरेखा लागू की गई है।
- समय अवधि: यह योजना 16वें वित्त आयोग के चक्र के अनुरूप 5 वर्षों (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) की अवधि के लिए लागू की गई है।
- एक राष्ट्र एक राशन कार्ड का सुदृढ़ीकरण: 100% आधार सीडिंग और इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (e-PoS) मशीनों के माध्यम से देश के किसी भी कोने से प्रवासियों को राशन लेने की सुविधा अधिक सुगम बनती है।
महत्व:
- 81.35 करोड़ नागरिकों को सुरक्षा: यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के लाभार्थियों के लिए पोषण और खाद्य सुरक्षा की कानूनी गारंटी को जमीन पर मजबूत करती है।
- लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी: परिवहन मार्गों के तकनीकी अनुकूलन (Route Optimisation) की वजह से अनाज परिवहन की दूरी में 15% से 50% तक की कमी आएगी।
- ₹280 करोड़ की वार्षिक बचत: लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार होने के कारण देश को प्रति वर्ष लगभग 280 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय बचत होगी। बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से राशन सीधे और पारदर्शी तरीके से पात्र नागरिकों की थाली तक पहुंचता है।
- पर्यावरण अनुकूल (Green Logistics): परिवहन दूरी घटने के कारण आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 35% तक की कमी आएगी, जो भारत के पर्यावरण और नेट-जीरो लक्ष्यों में सहायक है।