फॉरैमिनिफेरा की एक नई प्रजाति पोट्रैट्रोचैमिना भारतेंसिस (Potratrochammina Bharatensis)
संदर्भ:
हाल ही में पुणे के आघारकर अनुसंधान संस्थान (ARI) के वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के कोंकण तट पर स्थित जैतापुर क्रीक के तलछट में फॉरैमिनिफेरा (Foraminifera) की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसे ‘पोट्रैट्रोचैमिना भारतेंसिस’ (Portatrochammina bharatensis) नाम दिया गया है।
पोट्रैट्रोचैमिना भारतेंसिस के बारे में:
- खोज का स्थान: यह नई प्रजाति भारत के पश्चिमी तट (अरब सागर) पर स्थित महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले की जैतापुर क्रीक (Jaitapur Creek) में पाई गई है।
- वैज्ञानिकों ने जनवरी 2023 में जैतापुर क्रीक के मैंग्रोव और कीचड़दार मैदानों के पास, पानी की सतह से लगभग 6 मीटर नीचे से तलछट (sediment) के नमूने एकत्र किए थे।
- खोजकर्ता: डॉ. तुषार कौशिक के नेतृत्व में अगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे के वैज्ञानिकों की टीम ने इसे खोजा है।
- निवास: यह जीव मुख्य रूप से तटीय समुद्री तलछट (Marginal Marine Sediments) में बेंटिक (benthic) यानी समुद्र के तल पर निवास करता है।
- आकार: यह सूक्ष्मजीव मानव आंख से अदृश्य है। इसका आकार रेत के एक दाने के बराबर, लगभग 0.3 से 0.5 मिलीमीटर व्यास (diameter) का होता है।
- कक्षों की बनावट: यह एक बहु-कक्षीय (multi-chambered) जीव है। इसकी संरचना ‘लो ट्रोकोस्पाइरल’ (low trochospiral) होती है, जिसके अंतिम चक्कर में 5 से 5.5 उप-गोलाकार कक्ष होते हैं जो धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं।
- छिद्र (Aperture): इसमें एक धनुषाकार छिद्र (interiomarginal arched aperture) होता है, जिसे आंशिक रूप से ढकने वाला एक ‘अम्बिलिकल फ्लैप’ (umbilical flap) मौजूद रहता है।
- यह विशेषता इसे Paratrochammina और Trochammina जेनेरा से अलग करती है।
- कवच निर्माण तकनीक: इस सूक्ष्मजीव को प्रकृति का “मास्टर मेसन” (राजमिस्त्री) कहा गया है।
- ‘स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ (SEM-EDS) विश्लेषण से पता चला है कि यह जीव अपने बाहरी कवच (test) के निर्माण के लिए पर्यावरण से चुनिंदा रूप से क्वार्ट्ज खनिज कणों (Quartz grains – SiO2) को इकट्ठा करता है और उन्हें आपस में सीमेंट की तरह जोड़ता है।
- क्वार्ट्ज पृथ्वी के सबसे कठोर और रासायनिक रूप से स्थिर खनिजों में से एक है। यह मजबूत क्वार्ट्ज कवच मानसून के दौरान भारत के पश्चिमी तट पर होने वाले तीव्र रासायनिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों से इस जीव की रक्षा करता है।
- आनुवंशिक विश्लेषण: आनुवंशिक विश्लेषण के लिए SSU rDNA (Small Sub-unit rRNA) जीन अनुक्रम का उपयोग किया गया।
- इस विश्लेषण से इसकी नई प्रजाति होने की पुष्टि हुई और पता चला कि यह टेक्सटुलारियड (textulariids) समूह के अंतर्गत P. pacifica और P. antarctica प्रजातियों के साथ एक साझा आनुवंशिक शाखा बनाती है।
पारिस्थितिक महत्व:
- फॉरैमिनिफेरा के जीवाश्म कवच का उपयोग भूवैज्ञानिकों द्वारा प्राचीन जलवायु के पुनर्निर्माण (Paleoclimate Reconstruction), चट्टानों की आयु निर्धारण और कच्चे तेल (Petroleum) के भंडारों का पता लगाने के लिए किया जाता है।
- ये जीव अपने पर्यावरण में होने वाले छोटे बदलावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। पानी की गुणवत्ता में गिरावट, भारी धातु प्रदूषण या अलवणीय जल (Freshwater) के अत्यधिक प्रवाह के कारण इनके खोल के आकार और बनावट में विकृतियाँ आ जाती हैं।
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फोरामिनिफेरा (Foraminifera)
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FAQs:
Q1. What is Potratrochammina Bharatensis?
यह हाल ही में खोजी गई एककोशिकीय सूक्ष्म समुद्री जीव (फ़ोरामिनिफेरा) की नई प्रजाति है। यह रेत के कण जितनी छोटी होती है और क्वार्ट्ज से अपना कवच बनाती है।
Q2. नई फॉरैमिनिफेरा प्रजाति की खोज कहाँ हुई?
इसकी खोज भारत के पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित जैतापुर क्रीक (Jaitapur Creek) के समुद्री तलछट (Sediments) में हुई है।
Q3. Why is this discovery important?
यह खोज तटीय प्रदूषण की निगरानी, पर्यावरण जैव-संकेतक और अतीत की समुद्री जलवायु तथा ऐतिहासिक बदलावों को समझने (Paleoclimate Studies) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q4. What are Foraminifera organisms?
ये अमीबा जैसे एककोशिकीय सूक्ष्मजीव (प्रोटिस्ट) हैं, जो समुद्रों में पाए जाते हैं। इनके शेल (कवच) में सैकड़ों छोटे छिद्र (Foramen) होते हैं।
