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ईचथलकेंडा इनकोग्निटा (Eechathalakenda incognita)

ईचथलकेंडा इनकोग्निटा (Eechathalakenda incognita)

Eechathalakenda incognita

Image Credit: The Hindu

संदर्भ:

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पेरियार टाइगर रिजर्व से ईचथलकेंडा इनकोग्निटा (Eechathalakenda incognita) नामक मीठे पानी की साइप्रिनिड मछली (Cyprinid fish) की एक नई दुर्लभ प्रजाति की खोज की।  

ईचथलकेंडा इनकोग्निटा (Eechathalakenda incognita) के बारे मे:

  • वैज्ञानिक नाम: Eechathalakenda incognita
  • फैमिली (Family): साइप्रिनिडे (Cyprinidae – कारप और मिनोज़ का परिवार) 
  • उपकूल (Subfamily): टोरिने (Torinae) 
  • ऐतिहासिक भ्रम: यह प्रजाति पिछले 70 वर्षों से अपनी सिस्टर प्रजाति Eechathalakenda ophicephala के साथ भ्रमित की जा रही थी।
    • नए डीएनए (DNA) विश्लेषण और शारीरिक लक्षणों के परीक्षण के बाद इसे एक स्वतंत्र प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है।
  • शोधकर्ता टीम: केरल मात्स्यिकी और महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय (KUFOS), सेंट स्टीफेंस कॉलेज, क्रिश्चियन कॉलेज और शिव नाडार इंस्टीट्यूशन ऑफ एमीनेंस के वैज्ञानिकों ने इस गुप्त (Enigmatic) प्रजाति को खोजा है। 
  • शल्क संरचना (Scale Pattern): जहां E. ophicephala के शरीर पर समचतुर्भुज (Rhomboid-shaped) शल्क होते हैं, वहीं E. incognita के ऊपरी शरीर पर गोलाकार शल्क (Circular scales) पाए जाते हैं।
  • पार्श्व धारी (Lateral Stripe): इसके शरीर पर एक विशिष्ट गहरे रंग की पार्श्व धारी (Dark lateral stripe) मौजूद होती है।
  • आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Variation): यह अपनी निकटतम संबंधित प्रजाति से लगभग 4.9% से 5.3% तक आनुवंशिक भिन्नता प्रदर्शित करती है।
  • स्थानिक प्रजाति (Point-Endemic): यह प्रजाति केवल पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve – PTR) की तीव्र बहने वाली पथरीली संकरी धाराओं (Fast-flowing, rocky streams) में पाई जाती है।
    • इसके विपरीत, इसकी सिस्टर प्रजाति E. ophicephala मुख्य रूप से केरल की पम्बा नदी (Pamba River) के उच्च पर्वतीय (1000 मीटर से ऊपर) उद्गम क्षेत्रों तक सीमित है।
  • पारिस्थितिक महत्व: मीठे पानी के जैव संकेतक (Bio-indicators) के रूप में ये मछलियां जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को दर्शाती हैं। 
  • चुनौतियाँ: केवल कुछ विशिष्ट धाराओं में पाए जाने के कारण स्थानीय खतरों से इस प्रजाति के विलुप्त होने का जोखिम बहुत अधिक है।
    • पश्चिमी घाट के तापमान में उतार-चढ़ाव और वर्षा के बदलते पैटर्न से इन धाराओं का जलप्रवाह प्रभावित हो रहा है।
    • वनों की कटाई, प्रदूषण और मानव जनित हस्तक्षेपों के कारण इनके प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं। 
  • संरक्षण के उपाय: इस नई प्रजाति के अत्यंत सीमित दायरे को देखते हुए इसे IUCN Red Listing की ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल करने की आवश्यकता है ताकि वैश्विक ध्यान आकर्षित हो सके।
    • पेरियार टाइगर रिजर्व के भीतर आने वाली इन जलीय प्रणालियों को मानवीय हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए।
पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve):अवस्थिति: यह रिजर्व केरल के इडुक्की और पथानामथिट्टा जिलों में पश्चिमी घाट (Western Ghats) की इलायची पहाड़ियों (Cardamom Hills) में स्थित है। इसके बीच से पवित्र पेरियार और पम्बा नदियाँ बहती हैं। इतिहास और दर्जा (History & Status): 1934 में त्रावणकोर के महाराजा द्वारा ‘नेलीकंपेट्टी वन्यजीव अभयारण्य’ के रूप में स्थापित।1978 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ अभयारण्य घोषित।1991 में प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत हाथी रिजर्व के रूप में शामिल।वनस्पति (Flora): यहाँ मुख्य रूप से सदाबहार (Evergreen) और नम पर्णपाती वन पाए जाते हैं। यहाँ प्रचुर मात्रा में सागौन, शीशम और चंदन के वृक्ष मिलते हैं।जीव (Fauna): यह बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, नीलगिरी तहर, शेर जैसी पूंछ वाले मैकाक (Lion-tailed Macaque) और हाल ही में खोजी गई मछली Eechathalakenda incognita का प्रमुख आवास है।

FAQs:

1. ईचथलकेंडा इनकोग्निटा क्या है?

यह केरल के पश्चिमी घाट में पाई गई मीठे पानी की साइप्रिनिड (Cyprinid) मछली की एक नई और दुर्लभ प्रजाति है।

2. यह नई मछली प्रजाति कहाँ खोजी गई?

यह प्रजाति केरल में स्थित पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve) की तीव्र बहने वाली पथरीली धाराओं में खोजी गई है।

3. इस खोज का महत्व क्या है?

इसने 70 साल पुराना विकासात्मक रहस्य सुलझाया और सिद्ध किया कि यह अपनी सिस्टर प्रजाति से आनुवंशिक रूप से पूरी तरह भिन्न है। 

4. यह प्रजाति किस परिवार से संबंधित है?

यह मछली साइप्रिनिडे (Cyprinidae) परिवार के ‘टोरिने’ (Torinae) उपकुल से संबंधित है। 

5. जैव विविधता संरक्षण में इसका क्या योगदान है?यह पेरियार टाइगर रिजर्व की 9वीं स्थानिक (Point-Endemic) प्रजाति है, जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के महत्व को बढ़ाती है।

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