भारत का बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (Ballistic Missile Defence System)
संदर्भ:
भारत ने 10 और 11 जून को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence System के तीन सफल उड़ान परीक्षण किए।
- बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के अलावा, इन परीक्षणों में स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला उड़ान परीक्षण (Maiden flight trial) किया गया।
बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (Ballistic Missile Defence System) प्रणाली क्या हैं?
- परिचय: बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली एक एकीकृत सैन्य नेटवर्क है, जो दुश्मन द्वारा दागी गई शत्रुतापूर्ण बैलिस्टिक मिसाइलों का हवा में ही पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और इंटरसेप्टर मिसाइलों (Interceptor Missiles) के जरिए वायुमंडल के भीतर या बाहर मारकर नष्ट करने का कार्य करता है।
- पृष्ठभूमि: इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद वर्ष 2000 में हुई।
- पाकिस्तान और चीन से बढ़ते मिसाइल व परमाणु खतरों के मद्देनजर, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को एक ऐसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली विकसित करने का जिम्मा सौंपा गया जो भारत के “नो फर्स्ट यूज़” (No First Use) परमाणु सिद्धांत को मजबूती दे सके।
- विकास: भारतीय बीएमडी कार्यक्रम को दो मुख्य चरणों (Phases) में विभाजित किया गया है:
- चरण-I (Phase-1): यह 2,000 किमी तक की मारक क्षमता वाली कम और मध्यम दूरी की मिसाइलों को रोकने के लिए विकसित किया गया है. इसमें Prithvi Air Defence (PAD) और Advanced Air Defence (AAD) मिसाइलें शामिल हैं. यह चरण पूरी तरह से तैयार और तैनात है.
- चरण-II (Phase-2): इसके तहत 5,000 किमी से अधिक दूरी वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) और इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता विकसित की गई है. इसके तहत AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर मिसाइलों के परीक्षण किए जा रहे हैं.
- सहयोग: इसके तकनीकी विकास में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त किया है:
- रूस: वायु रक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए भारत ने रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ (S-400 Triumf) प्रणाली हासिल की.
- इजरायल: बीएमडी के शुरुआती रडार सिस्टम (जैसे ग्रीन पाइन रडार) के विकास में इजरायली सहयोग लिया गया, जिसके आधार पर भारत ने अपना स्वदेशी Swordfish Long Range Tracking Radar विकसित किया.
भारत की मिसाइल रक्षा प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:
- त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा: यह प्रणाली विभिन्न ऊंचाइयों पर दुश्मनों को निशाना बनाती है.
- एक्सो-एटमॉस्फेरिक (Exo-atmospheric): पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (50 से 80 किमी से अधिक की ऊंचाई पर) मिसाइल को नष्ट करना.
- एंडो-एटमॉस्फेरिक (Endo-atmospheric): वायुमंडल के भीतर (30 किमी तक की ऊंचाई पर) प्रवेश कर चुकी मिसाइल को मार गिराना.
- नेटवर्क-केंद्रित प्रणाली (Network-Centric): इसमें उपग्रह, रडार, कमांड सेंटर और मोबाइल लॉन्चर एक सुरक्षित नेटवर्क से रीयल-टाइम जुड़े रहते हैं.
Multi Layer Missile Shield की कार्यप्रणाली:
यह प्रणाली चार प्रमुख चरणों में कार्य करती है:
- डिटेक्शन (Detection): दुश्मन द्वारा मिसाइल लॉन्च करते ही अंतरिक्ष-आधारित उपग्रह और सॉर्डफिश रडार (Swordfish Radar) तुरंत खतरे को भांप लेते हैं.
- ट्रैकिंग और गणना (Tracking): खतरे की दिशा, गति और गिरने के संभावित स्थान की रीयल-टाइम गणना मिशन कंट्रोल सेंटर (MCC) द्वारा की जाती है.
- कमांड और इंटरसेप्शन (Interception): एमसीसी द्वारा सटीक गणना के बाद सबसे नजदीकी लॉन्चर से इंटरसेप्टर मिसाइल (जैसे AD-1 या AAD) दागी जाती है.
- डिस्ट्रक्शन (Kill Assessment): इंटरसेप्टर मिसाइल हवा में ही ‘हिट-टू-किल’ (Hit-to-kill) तकनीक से आक्रामक मिसाइल से टकराकर उसे पूरी तरह नष्ट कर देती है.
भारत के लिए Ballistic Missile Shield का महत्व:
- विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (Credible Deterrence): यह प्रणाली दुश्मन के मन में यह खौफ पैदा करती है कि उसका पहला हमला नाकाम हो जाएगा, जिससे युद्ध की संभावना कम होती है.
- सामरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) सहित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और प्रमुख सैन्य ठिकानों को हवाई हमलों से पूर्ण सुरक्षा मिलती है.
- विशिष्ट क्लब में शामिल: भारत यह क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है. भारत अमेरिका, रूस, इज़राइल और चीन के बाद यह तकनीक हासिल करने वाला देश बन गया है।
भारत की प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइलें (India’s Major Ballistic Missiles):
भारत के पास आक्रामक हमलों के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
पृथ्वी-I, पृथ्वी-II, पृथ्वी-III, अग्नि-I, अग्नि-II, अग्नि-III, अग्नि-IV, अग्नि-V, अग्नि-P (प्राइम), प्रहार, शौर्य, धनुष, के-15 सागरिका, के-4.
FAQs:
1. बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली क्या है?
यह एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली है जो दुश्मन की मिसाइलों को आसमान में अलग-अलग ऊंचाइयों (परतों) पर नष्ट करने की क्षमता रखती है।
2. यह प्रणाली कैसे काम करती है?
यह प्रणाली राडार द्वारा मिसाइल को ट्रैक करके, कंप्यूटर विश्लेषण के बाद उसे इंटरसेप्टर मिसाइलों से टकराकर हवा में ही मार गिराती है।
3. भारत की मिसाइल रक्षा क्षमता कितनी मजबूत है?
भारत के पास बेहद मजबूत द्विस्तरीय (PAD और AAD) क्षमता है, जो S-400 और स्वदेशी प्रणालियों के साथ देश को अभेद्य बनाती है।
4. DRDO की इसमें क्या भूमिका है?
DRDO इस प्रणाली के अनुसंधान, विकास, परीक्षण और स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइलों व राडार तकनीकों के निर्माण के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है।
5. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह परमाणु या बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से देश के बड़े शहरों, रणनीतिक ठिकानों और नागरिकों की रक्षा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
