किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना
संदर्भ:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गए हैं।
- इस समझौते के बाद अब परियोजना को अंतिम अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Dam Project) के बारे मे:
- स्थिति: यह यमुना नदी की प्रमुख सहायक टोंस नदी (Tons River) पर बनने वाली एक अंतर-राज्यीय जल संसाधन विकास और पनडुब्बी/जलविद्युत भंडारण योजना (Hydroelectric Project India) है।
- उद्देश्य: स्वच्छ पानी के निरंतर प्रवाह को बढ़ाकर यमुना नदी को निर्मल और पुनर्जीवित करना।
- छह लाभार्थी राज्यों को कृषि के लिए Irrigation Development और घरेलू उपयोग के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना।
- टिकाऊ जलविद्युत के माध्यम से Renewable Energy Project लक्ष्यों को प्राप्त करना।
- पृष्ठभूमि: इस राष्ट्रीय परियोजना को मूल रूप से दशकों पहले परिकल्पित किया गया था, लेकिन राज्यों के बीच लागत साझाकरण और पानी के बंटवारे को लेकर असहमति के कारण यह लंबित थी।
- वर्ष 2017 में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने संयुक्त रूप से ‘किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (Kishau Corporation Limited) का गठन किया था, लेकिन छह राज्यों का एक साथ आना अब संभव हुआ है।
- लागत साझाकरण: परियोजना के जल घटक (Water Component) की 90% लागत केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता के रूप में दी जाएगी, जबकि शेष 10% राशि छह राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।
- विद्युत घटक समझौता: हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक हिस्से की लागत को दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा साझा किया जाएगा, जिसके बदले हिमाचल प्रदेश अपने हिस्से का आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को हस्तांतरित करेगा।
प्रमुख तकनीकी एवं अन्य विशेषताएं:
| अवस्थिति (Location) | उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर। |
| नदी (River) | टोंस नदी (Confluence से लगभग 50 किमी ऊपर, इचारी बांध के अपस्ट्रीम)। |
| बांध की संरचना | नदी के तल से 236 मीटर ऊंचा रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) ग्रेविटी बांध। |
| विद्युत क्षमता | 660 मेगावाट (165 मेगावाट की 4 इकाइयां) कुल स्थापित क्षमता। |
| जल भंडारण क्षमता | लगभग 1,324 मिलियन घन मीटर (MCM) का लाइव स्टोरेज। |
महत्व:
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): गृह मंत्री की पहल पर छह राज्यों के बीच बनी यह आम सहमति ‘संवाद से समाधान’ के सिद्धांत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य के अंतर-राज्यीय नदी विवादों के लिए रोल मॉडल बनेगा।
- ऊर्जा और पर्यावरण संतुलन: यह भारत के कार्बन-तटस्थ लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा, क्योंकि इससे सालाना 1,379 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा पैदा होगी।
- दिल्ली-NCR का जल संकट: दिल्ली को मिलने वाले अतिरिक्त जल प्रवाह से राजधानी में हर गर्मी में होने वाले भीषण जल संकट का स्थायी समाधान होगा।
FAQs:
Q1. किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना क्या है?
Ans. यह छह राज्यों की संयुक्त जल और बिजली योजना है, जो टोंस नदी पर कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाकर पानी और बिजली संकट दूर करेगी।
Q2. यह परियोजना कहाँ स्थित है?
Ans. यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर टोंस नदी पर बनाई जा रही है।
Q3. इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी है?
Ans. इस परियोजना की कुल स्थापित जलविद्युत क्षमता 660 मेगावाट है, जिससे प्रतिवर्ष 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।
Q4. भारत के राज्यों के लिए इसका क्या महत्व है?
Ans. यह अंतर-राज्यीय सहयोग, यमुना नदी के पुनरुद्धार और उत्तर भारतीय राज्यों में पेयजल तथा कृषि सिंचाई सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
Q5. परियोजना से क्या लाभ होंगे?
Ans. इससे छह राज्यों को अतिरिक्त पानी, 660 मेगावाट हरित बिजली, दिल्ली को निर्बाध पेयजल और बड़े पैमाने पर सिंचाई क्षमता का विकास हासिल होगा।
