दुर्लभ अफ्रीकी कंघी बत्तख
संदर्भ:
हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित सुप्रसिद्ध ‘पोंग झील वन्यजीव अभ्यारण्य’ (Pong Dam Lake Wildlife Sanctuary) में पहली बार अत्यंत दुर्लभ गांठदार चोंच वाली बत्तख, जिसे ‘African Comb Duck’ या ‘Knob-Billed Duck’ कहा जाता है, को देखा गया है।
दुर्लभ अफ्रीकी कंघी बत्तख के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: इस विशिष्ट ‘Waterfowl’ का वैज्ञानिक नाम सार्किडिओर्निस मेलानोटोस (Sarkidiornis melanotos) है। यह एनाटिडे (Anatidae) परिवार से संबंधित है।
- शारीरिक विशेषता: यह दुनिया की सबसे बड़ी बत्तख प्रजातियों में से एक है, जिसकी लंबाई 56 से 76 सेमी और पंखों का फैलाव (Wingspan) 116 से 145 सेमी तक होता है।
- लैंगिक द्विरूपता (Sexual Dimorphism): नर बत्तख का आकार मादा की तुलना में काफी बड़ा होता है। सबसे विशिष्ट विशेषता नर की काली चोंच के ऊपर बनी एक बड़ी, मांसल, पत्ती के आकार की गांठ या ‘कंघी’ (Comb) होती है, जो प्रजनन काल के दौरान आकार में और अधिक बड़ी हो जाती है।
- रंग और बनावट: वयस्कों का सिर सफेद होता है जिस पर काले धब्बे होते हैं। इनकी गर्दन और निचला हिस्सा शुद्ध सफेद होता है, जबकि ऊपरी पंख और पीठ चमकदार नीले-काले रंग की होती है, जिसमें सूर्य की रोशनी में हरी और नीली इंद्रधनुषी चमक (Iridescence) दिखाई देती है।
- वैश्विक उपस्थिति: नाम के विपरीत, यह ‘African Water Bird’ केवल अफ्रीका तक सीमित नहीं है। यह उप-सहारन अफ्रीका, मेडागास्कर और दक्षिण एशिया (पाकिस्तान, भारत से लेकर लाओसऔर दक्षिणी चीन) के उष्णकटिबंधीय आर्द्रभूमियों में व्यापक रूप से पाई जाती है।
- भारत में यह मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी राज्यों जैसे राजस्थान और गुजरात के आर्द्रभूमियों में एक स्थानीय निवासी के रूप में पाई जाती है।
- पसंदीदा आवास: यह प्रजाति मीठे पानी के दलदलों, उथली झीलों, नदियों, बाढ़ के मैदानों और धान के खेतों में रहना पसंद करती है। अन्य बत्तखों के विपरीत, कंघी बत्तख अक्सर पेड़ों के कोटरों (Tree Holes) में बैठना और घोंसला बनाना पसंद करती है।
- प्रवास प्रतिरूप: यह पूर्ण रूप से लंबी दूरी का ‘Migratory Bird’ नहीं है, बल्कि एक आंशिक या स्थानीय प्रवासी (Resident with seasonal dispersion) है।
- यह पानी और भोजन की उपलब्धता के आधार पर मानसून और शुष्क मौसम के दौरान स्थानीय स्तर पर विस्थापन करती है।
- आहार: यह मुख्य रूप से शाकाहारी है जो जलीय वनस्पतियों, घासों, बीजों और कभी-कभार छोटे अकशेरुकी जीवों (Invertebrates) व छोटी मछलियों को खाती हैं।
- प्रजनन: ये मुख्य रूप से वर्षा ऋतु के दौरान या उसके तुरंत बाद प्रजनन करते हैं।
- IUCN रेड लिस्ट: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) द्वारा इसे ‘Least Concern’ (कम चिंताजनक) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसकी भौगोलिक सीमा बहुत बड़ी है।
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते: यह प्रजाति ‘Agreement on the Conservation of African-Eurasian Migratory Waterbirds’ (AEWA) के तहत संरक्षित है।
- स्थानीय खतरे: भारत जैसे देशों में कृषि विस्तार, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से आर्द्रभूमियों का प्रदूषण, शिकार और घोंसले बनाने वाले उपयुक्त पेड़ों की कटाई के कारण इसकी स्थानीय आबादी में गिरावट देखी जा रही है।
पोंग बांध झील का महत्व:
पोंग बांध (महाराणा प्रताप सागर) हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख रामसर स्थल (Ramsar Site) है, जो सर्दियों में मध्य एशिया और साइबेरिया से आने वाले लाखों प्रवासी पक्षियों को आश्रय देता है।
FAQs:
Q1. अफ्रीकी कंघी बत्तख क्या है?
Ans: यह एक बड़ी जलीय बत्तख प्रजाति है, जिसके नर की चोंच के ऊपर एक विशिष्ट मांसल गांठ या कंघी जैसी संरचना होती है।
Q2. यह दुर्लभ क्यों है?
Ans: वैश्विक स्तर पर यह सामान्य है, लेकिन हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे और पहाड़ी हिमालयी क्षेत्रों में इसका देखा जाना अत्यंत दुर्लभ घटना है।
Q3. यह कहाँ पाई जाती है?
Ans: यह उप-सहारन अफ्रीका, मेडागास्कर और भारत सहित दक्षिण एशिया के उष्णकटिबंधीय मीठे पानी के दलदलों और झीलों में पाई जाती है।
Q4. यह चर्चा में क्यों है?
Ans: जून 2026 में हिमाचल प्रदेश के ‘पोंग झील वन्यजीव अभ्यारण्य’ में इस बत्तख को इतिहास में पहली बार सफलतापूर्वक देखा गया है।
Q5. क्या यह प्रवासी पक्षी है?
Ans: यह लंबी दूरी का प्रवासी नहीं है, बल्कि पानी और भोजन की तलाश में मौसम के अनुसार स्थानीय स्तर पर प्रवास करता है।
