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वैश्विक मीथेन कार्य योजना

वैश्विक मीथेन कार्य योजना

Global Methane Action Plan

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक (London Climate Action Week) के दौरान ‘वैश्विक मीथेन कार्य योजना’ ( Global Methane Action Plan )को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया।  

  • मीथेन एक अत्यंत हानिकारक महाप्रदूषक है, जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की तुलना में अल्पकाल में लगभग 80 गुना अधिक शक्तिशाली है। 

वैश्विक मीथेन कार्य योजना क्या हैं?

वैश्विक मीथेन कार्य योजना (Global Call to Action on Methane) संयुक्त राष्ट्र द्वारा तैयार किया गया एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक रोडमैप है। इसके तहत जीवाश्म ईंधन, कृषि और अपशिष्ट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से ठोस उत्सर्जन कटौती पर बल दिया गया है। 

उद्देश्य: 

  • तापमान वृद्धि को सीमित करना: इसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस (1.5°C) के दायरे में रखना है।
  • उत्सर्जन में 30% की कटौती: वर्ष 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में कम से कम 30 प्रतिशत की कमी लाना।
  • शून्य-उत्सर्जन मानक स्थापित करना: तेल और गैस क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में ‘निकट-शून्य मीथेन उत्सर्जन’ मानक लागू करना।
  • अल्पकालिक राहत: वायुमंडल में तापमान वृद्धि की गति को तुरंत धीमा करने के लिए ‘क्लाइमेट इमरजेंसी ब्रेक’ की तरह काम करना।

संस्था और वैश्विक सहयोग:

इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल संचालन और नीतिगत कार्यान्वयन के लिए वैश्विक संस्थाओं का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है:

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP): यूएनईपी (UNEP) इस वैश्विक कार्य योजना को आगे बढ़ाने और डेटा-संचालित नीतियां बनाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। 
  • अंतर्राष्ट्रीय मीथेन उत्सर्जन वेधशाला (IMEO): यह संस्था उपग्रहों के माध्यम से मीथेन रिसाव की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी और वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराती है। 
  • जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन (CCAC): देशों को राष्ट्रीय मीथेन कार्य योजनाएं (National Methane Roadmaps) तैयार करने और उन्हें लागू करने में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  • बहुपक्षीय सहयोग: वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (Global Methane Pledge) के तहत वर्तमान में 159 देश और यूरोपीय आयोग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

योजना की प्रमुख विशेषताएं: 

  • त्रिकोणीय क्षेत्रीय रणनीति: यह योजना मुख्य रूप से तीन सर्वाधिक उत्सर्जन वाले क्षेत्रों—जीवाश्म ईंधन, कृषि और अपशिष्ट (Fossil Fuels, Agriculture, and Waste) पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • लक्षित 9 प्राथमिकताएं: मीथेन शमन रणनीति (Methane Mitigation Strategy) के तहत वर्ष 2030 तक इन तीनों क्षेत्रों में 9 प्रमुख प्राथमिकताओं को लागू किया जाएगा।
  • रूटीन फ्लेयरिंग पर रोक: तेल और गैस निष्कर्षण साइटों पर होने वाले अनावश्यक गैस दहन (Routine Flaring) और तकनीकी रिसाव को पूरी तरह समाप्त करना।
  • धारणीय कृषि अभ्यास: खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और फसल अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना।
  • स्मार्ट वेस्ट सिस्टम: शहरों और स्थानीय समुदायों में कचरे के खुले डंपिंग को रोकना और लैंडफिल से निकलने वाली गैसों को कैप्चर करना।
  • मीथेन फाइनेंसिंग: विकासशील देशों में मीथेन शमन परियोजनाओं के लिए वित्तीय निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि करना।

योजना का महत्व: 

  • त्वरित जलवायु सुधार: मीथेन वायुमंडल में केवल 1-2 दशकों तक ही रहती है, इसलिए इसके उत्सर्जन में कटौती का असर तुरंत दिखाई देगा। 
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार: मीथेन कटौती से जमीनी स्तर के ओजोन प्रदूषण में कमी आएगी, जिससे अस्थमा जैसी सांस की बीमारियां और अकाल मृत्यु दर कम होगी। 
  • आर्थिक और कृषि लाभ: इसके सफल कार्यान्वयन से फसलों की पैदावार बढ़ेगी, वायु स्वच्छ होगी और हरित ऊर्जा क्षेत्र में नए रोजगार पैदा होंगे।
  • लागत-प्रभावी समाधान: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, तेल और गैस क्षेत्र के 70% मीथेन रिसाव को मौजूदा तकनीकों से बहुत कम या बिना किसी अतिरिक्त लागत के रोका जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. Global Methane Action Plan क्या है?

    यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा लॉन्च की गई एक वैश्विक रणनीति है, जो 2030 तक मीथेन उत्सर्जन घटाने का रोडमैप देती है।

  2. मीथेन गैस जलवायु परिवर्तन को कैसे प्रभावित करती है?

    मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो अल्पकाल में CO₂ से 80 गुना अधिक गर्मी सोखकर वैश्विक तापमान बढ़ाती है।

  3. Global Methane Pledge का उद्देश्य क्या है?

    इसका उद्देश्य वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change Action) को रोकने के लिए 2030 तक मीथेन उत्सर्जन में 30% कमी करना है।

  4. मीथेन उत्सर्जन कम करना क्यों जरूरी है?

     शुद्ध शून्य लक्ष्यों (Net Zero Goals) को प्राप्त करने और वैश्विक तापमान वृद्धि को तुरंत धीमा करने के लिए यह सबसे प्रभावी उपाय है। 

  5. भारत के लिए इसका क्या महत्व है?

    भारत कृषि प्रधान देश होने के कारण पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection), टिकाऊ खेती और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) के लिए इसके सिद्धांतों से लाभ उठा सकता है।

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