ट्रेड वॉच क्वार्टरली का आठवां संस्करण जारी
संदर्भ:
नीति आयोग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ (Trade Watch Quarterly ) का आठवां संस्करण जारी किया।
ट्रेड वॉच क्वार्टरली के आठवें संस्करण के मुख्य बिंदु:
- कुल व्यापार में मजबूत वृद्धि: वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत का कुल मर्चेंडाइज (वस्तु) और सेवा व्यापार सालाना आधार पर 5.4% बढ़कर 1.84 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
- निर्यात और आयात के आंकड़े: इस पूरी अवधि में भारत के कुल निर्यात में 4.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल आयात में 6.5% की बढ़ोतरी देखी गई, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार की स्थिरता को दर्शाता है।
- चौथी तिमाही (Q4) का प्रदर्शन: जनवरी-मार्च 2026 की चौथी तिमाही में वस्तु निर्यात में 2.8% की मामूली गिरावट आई और यह $112.03 बिलियन रहा, जबकि वस्तु आयात 11.9% बढ़कर $195.5 बिलियन तक पहुंच गया।
- सेवा क्षेत्र का बेहतरीन प्रदर्शन: Q4 में सेवा निर्यात 9.0% की मजबूत दर से बढ़ा, जिसने वस्तु व्यापार के घाटे को संतुलित करने और सेवा अधिशेष (Services Surplus) को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाई।
- दुनिया का 8वां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक: भारत ने साल 2025 में दुनिया के 8वें सबसे बड़े सेवा निर्यातक के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। 2015-2025 के दौरान भारत के सेवा निर्यात की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 10.3% रही, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है।
- थीमैटिक फोकस – फार्मास्युटिकल क्षेत्र: इस आठवें संस्करण का मुख्य फोकस भारत का फार्मास्युटिकल (दवा) क्षेत्र है, जिसे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और भारतीय अर्थव्यवस्था के रणनीतिक स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया है।
- वैश्विक मांग और भारत की हिस्सेदारी: साल 2025 में वैश्विक स्तर पर दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) की मांग लगभग $1.3 ट्रिलियन आंकी गई थी, जिसमें भारत ने $35.8 बिलियन मूल्य के फार्मा उत्पादों का निर्यात किया।
- उच्च-मूल्य वाले सेगमेंट में चुनौतियां: रिपोर्ट के अनुसार, भारत का निर्यात वर्तमान में मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं और फॉर्मूलेशन तक सीमित है। वैश्विक बाजार अब बायोलॉजिक्स, इम्यूनोलॉजिकल्स और उन्नत चिकित्सा (Advanced Therapeutics) जैसे उच्च-मूल्य वाले सेगमेंट की ओर बढ़ रहा है, जहां भारत की भागीदारी अभी कम है।
- चीन पर API निर्भरता: भारत ने कई विशिष्ट केमिकल इंटरमीडिएट्स और एंटीबायोटिक्स में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन कच्चे माल और APIs के लिए भारत अब भी चीन से होने वाले आयात पर अत्यधिक निर्भर है।
- फार्मा क्षेत्र के प्रमुख राज्य: भारत के फार्मा उत्पादन, निर्यात और वैश्विक मूल्य श्रृंखला (GVC) में एकीकरण को मुख्य रूप से तीन राज्यों— तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र के मजबूत क्लस्टर-आधारित इकोसिस्टम द्वारा संचालित किया जा रहा है।
- पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव: नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिरी के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पैदा हुआ है, लेकिन यह एक अस्थायी व्यवधान (Temporary Supply Shock) है। इससे निपटने के लिए भारत को अपने आयात स्रोतों और निर्यात बाजारों में विविधता (Trade Diversification) लाने की आवश्यकता है।
FAQs:
प्रश्न 1: Trade Watch Quarterly क्या है?
उत्तर: यह भारत के वैश्विक व्यापार प्रदर्शन, निर्यात-आयात प्रवृत्तियों और आर्थिक संकेतकों (Economic Indicators) का विश्लेषण करने वाली त्रैमासिक निगरानी रिपोर्ट है।
प्रश्न 2: आठवें संस्करण में क्या प्रमुख निष्कर्ष हैं?
उत्तर: वित्त वर्ष 2025-26 में कुल व्यापार बढ़कर $1.84 ट्रिलियन पहुंचा और सेवा निर्यात में 9% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
प्रश्न 3: यह रिपोर्ट कौन जारी करता है?
उत्तर: यह विदेशी व्यापार विश्लेषण (Foreign Trade Analysis) रिपोर्ट नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा तिमाही आधार पर आधिकारिक तौर पर जारी की जाती है।
प्रश्न 4: भारत के व्यापार क्षेत्र के लिए इसका क्या महत्व है?
उत्तर: यह व्यापार नीति विश्लेषण (Trade Policy Analysis) और नीति निर्माताओं को फार्मा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए दिशा देती है।
प्रश्न 5: रिपोर्ट में किन क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है?
उत्तर: इसमें मुख्य रूप से माल व्यापार, सेवा निर्यात, फार्मास्युटिकल क्षेत्र (API आयात) और वैश्विक व्यापारिक संबंधों का गहन विश्लेषण किया गया है।
