मेकेदातु बांध परियोजना
संदर्भ:
हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कावेरी नदी पर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना (Mekedatu Dam Project) के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है।
- इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वह इस परियोजना को किसी भी प्रकार की तकनीकी या पर्यावरणीय मंजूरी न दे।
- कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक संतुलन जलाशय परियोजना (Balancing Reservoir Project) है, जिससे तमिलनाडु के हिस्से के पानी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मेकेदातु बांध परियोजना (Mekedatu Dam Project):
- भौगोलिक स्थिति: यह जल भंडारण परियोजना (Water Storage Project) कर्नाटक के रामनगर जिले में कनकपुरा के पास मेकेदातु (जिसका अर्थ ‘बकरी की छलांग’ है) नामक स्थान पर प्रस्तावित है।
- संगम स्थल: यह बांध कावेरी नदी और उसकी सहायक नदी अर्कवती (Arkavathi) के संगम पर बनाया जाना है।
- परियोजना की क्षमता: इस बहुउद्देशीय परियोजना की कुल भंडारण क्षमता 66 टीएमसीएफटी (TMCFT) आंकी गई है।
- मुख्य उद्देश्य:
- पेयजल आपूर्ति: जल संकट से जूझ रहे बेंगलुरु शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों को सालाना 4 TMC पीने का पानी उपलब्ध कराना।
- पनबिजली उत्पादन: इस जलविद्युत परियोजना (Hydropower Project) के माध्यम से 400 मेगावाट (MW) बिजली का उत्पादन करना।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद:
यह मुद्दा दशकों पुराने कावेरी नदी जल विवाद (Cauvery River Project) से सीधे जुड़ा हुआ है, जिसमें दोनों राज्यों के अपने-अपने तर्क हैं:
- कर्नाटक का पक्ष (Arguments of Karnataka): कर्नाटक का तर्क है कि वह केवल मानसून के दौरान समुद्र में बह जाने वाले अतिरिक्त या अधिशेष जल (Surplus Water) को संचित करना चाहता है।
- इस संतुलन जलाशय से संकट के वर्षों में भी तमिलनाडु को उसके निर्धारित हिस्से का पानी बिलीगुंडलू (Biligundlu) जलमापी केंद्र से अधिक सुचारू रूप से छोड़ा जा सकेगा।
- कर्नाटक का दावा है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तमिलनाडु की शुरुआती चुनौती खारिज किए जाने के बाद, उसे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को संशोधित करने का पूरा अधिकार है।
- तमिलनाडु का विरोध: तमिलनाडु कावेरी बेसिन (Cauvery Basin) का निचला राज्य है। उसे डर है कि ऊपरी राज्य द्वारा नया बांध बनाने से कावेरी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो जाएगा।
- तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्रों (तंजावुर, नागपट्टिनम) के लाखों किसान पूरी तरह कावेरी के पानी पर निर्भर हैं। नया बांध उनके सिंचाई बुनियादी ढांचे (Irrigation Infrastructure) को प्रभावित कर सकता है।
- तमिलनाडु का दावा है कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अनुसार, अन्य बेसिन राज्यों की सहमति के बिना बेसिन में किसी नए जलाशय का निर्माण नहीं किया जा सकता।
पर्यावरणीय और विधिक चुनौतियां:
- वन भूमि का जलमग्न होना: इस बांध के निर्माण से कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य (Cauvery Wildlife Sanctuary) की लगभग 5,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि जलमग्न हो जाएगी।
- पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान: यह क्षेत्र हाथियों के महत्वपूर्ण गलियारे (Elephant Corridor) के अंतर्गत आता है, जिससे मानव-पशु संघर्ष बढ़ने की आशंका है।
- सांविधिक मंजूरियां: परियोजना को शुरू करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम मंजूरी मिलना अभी शेष है।
भारत के प्रमुख अंतर-राज्यीय जल विवाद ( Inter-State Water Disputes):
भारत में नदियों के जल बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच तनाव एक बड़ी संघवाद चुनौती है। प्रमुख नदी जल विवाद (River Water Dispute) निम्नलिखित हैं:
- कावेरी जल विवाद: कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच (दक्षिण भारत का सबसे पुराना विवाद)।
- कृष्णा नदी विवाद: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल आबंटन को लेकर।
- गोदावरी नदी विवाद: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक के मध्य।
- नर्मदा जल विवाद: मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच सरदार सरोवर परियोजना को लेकर।
- महानदी जल विवाद: छत्तीसगढ़ (ऊपरी राज्य) और ओडिशा (निचला राज्य) के बीच बांधों के निर्माण पर विवाद।
- महादायी/मांडोवी विवाद: गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच (कलसा-बंडूरी परियोजना को लेकर विवाद)।
- रावी-ब्यास विवाद: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच (सतलुज-यमुना लिंक नहर या SYL विवाद)।
- पेरियार नदी विवाद: मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच।
FAQs:
प्रश्न 1: मेकेदातु बांध परियोजना क्या है?
उत्तर: यह कर्नाटक सरकार (Karnataka Dam Project) द्वारा प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय संतुलन जलाशय और जल प्रबंधन परियोजना (Water Management Project) है।
प्रश्न 2: यह परियोजना किस नदी पर प्रस्तावित है?
उत्तर: यह जल संसाधन विकास (Water Resources Development) परियोजना कावेरी और अर्कवती नदियों के संगम पर मेकेदातु में प्रस्तावित है।
प्रश्न 3: तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध क्यों करता है?
उत्तर: तमिलनाडु को आशंका है कि इससे उसके हिस्से का पानी रुकेगा और डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।
प्रश्न 4: मेकेदातु परियोजना से क्या लाभ होंगे?
उत्तर: इससे बेंगलुरु को पीने का पानी मिलेगा और 400 मेगावाट स्वच्छ पनबिजली का उत्पादन सुनिश्चित होगा।
प्रश्न 5: इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दे क्या हैं?
उत्तर: इसके निर्माण से कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य का एक बड़ा हिस्सा डूब जाएगा, जिससे वन्यजीव आवास नष्ट होंगे।
