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आपातकाल की 51वीं बरसी

आपातकाल की 51वीं बरसी

emergency 1975 anniversary

संदर्भ:

हाल ही में भारत में लगाए गए आपातकाल की 51वीं बरसी (Emergency 1975 Anniversary) पूरी हुई। 

आपातकाल (Emergency):

  • भारत में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आंतरिक अशांति के आधार पर अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। 
  • यह स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास का सबसे विवादास्पद काल माना जाता है, जिसने भारतीय लोकतंत्र (Democracy in India) के मूल ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया था। 
  • इस आपातकाल ने भारत के संवैधानिक इतिहास, नागरिक अधिकारों और राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।

आपातकाल के प्रमुख कारण (Key Causes of the 1975 Emergency):

भारत में आपातकाल (Emergency in India) अचानक नहीं लगा, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रहा राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध जिम्मेदार था:

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला (Allahabad High Court Verdict): 12 जून 1975 को न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी के 1971 के रायबरेली चुनाव को अवैध घोषित कर दिया, जिससे उनकी संसद सदस्यता खतरे में पड़ गई।
  • जेपी आंदोलन और संपूर्ण क्रांति (JP Movement and Total Revolution): जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने बिहार और गुजरात के छात्र आंदोलनों का नेतृत्व करते हुए ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दिया और इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग की।
  • आर्थिक संकट और रेलवे हड़ताल (Economic Crisis and Railway Strike): 1973 के वैश्विक तेल संकट, मुद्रास्फीति और 1974 की ऐतिहासिक देशव्यापी रेलवे हड़ताल ने सरकार विरोधी लहर को चरम पर पहुंचा दिया था।
  • सेना और पुलिस से बगावत का आह्वान (Appeal to Military and Police): 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली के दौरान जेपी ने सेना और पुलिस से सरकार के ‘असंवैधानिक’ आदेशों को न मानने की अपील की, जिसे सरकार ने तख्तापलट की कोशिश माना।

आपातकाल की मुख्य घटनाएं और दमन चक्र (Key Events of the Emergency Period):

25 जून की आधी रात से शुरू हुआ आपातकाल का यह दौर भारतीय राजनीति (Indian Politics) में नागरिक अधिकारों के दमन के लिए जाना जाता है:

  • विपक्षी नेताओं की सामूहिक गिरफ्तारी (Mass Arrests of Opposition Leaders): जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे हजारों विपक्षी नेताओं को ‘मीसा’ (MISA – Maintenance of Internal Security Act) के तहत जेल में डाल दिया गया।
  • प्रेस पर सेंसरशिप (Press Censorship): अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई और खबरों को छापने से पहले सरकारी सेंसर अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई। द इंडियन एक्सप्रेस और स्टेट्समैन जैसे अखबारों ने विरोध स्वरूप अपने संपादकीय पन्ने खाली छोड़े।
  • नागरिक अधिकारों का निलंबन (Suspension of Civil Rights): नागरिकों के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19, 20 और 21) निलंबित कर दिए गए और न्यायपालिका से अदालती समीक्षा के अधिकार छीन लिए गए।
  • विवादास्पद 42वां संविधान संशोधन (42nd Constitutional Amendment): इस संशोधन के जरिए संसद को असीमित शक्तियां दी गईं और न्यायपालिका के पर कतर दिए गए, जिसे ‘लघु संविधान’ (Mini-Constitution) भी कहा जाता है।
  • जबरन नसबंदी कार्यक्रम (Forced Sterilization Drive): संजय गांधी के नेतृत्व में जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर देश के कई हिस्सों में दमनकारी और जबरन नसबंदी अभियान चलाए गए, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश फैला।

आपातकाल का अंत और लोकतंत्र की बहाली (End of Emergency):

21 महीने के लंबे और दमनकारी दौर के बाद, जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने अप्रत्याशित रूप से चुनाव कराने की घोषणा की और मार्च 1977 में आपातकाल को पूरी तरह हटा लिया गया। 1977 के आम चुनावों में भारतीय जनता ने लोकतंत्र की ताकत दिखाते हुए कांग्रेस को बुरी तरह परास्त किया। इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों अपनी सीटें हार गए और देश में पहली बार मोरारजी देसाई के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी (जनता पार्टी) सरकार का गठन हुआ।

आपातकाल की 51वीं बरसी का महत्व (Significance of the 51st Anniversary:

भारतीय आपातकाल इतिहास (Indian Emergency History) की यह 51वीं बरसी केवल एक ऐतिहासिक तारीख नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है:

  • लोकतांत्रिक मूल्यों का पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation of Democratic Values): यह दिन याद दिलाता है कि लोकतंत्र कोई स्थायी उपहार नहीं है, बल्कि इसकी रक्षा के लिए निरंतर सजगता और नागरिक अधिकारों (Civil Rights India) के प्रति जागरूकता आवश्यक है।
  • संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of the Constitution): आपातकाल के बाद 44वें संविधान संशोधन के जरिए ‘आंतरिक अशांति’ शब्द को बदलकर ‘सशस्त्र विद्रोह’ किया गया, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार इसका दुरुपयोग न कर सके। यह बरसी भारतीय संविधान (Indian Constitution) की उसी मजबूती का उत्सव है।
  • संस्थागत स्वतंत्रता की सीख (Lesson on Institutional Independence): यह अवसर देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी संस्थाओं को अपनी स्वायत्तता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

FAQs:

  1. भारत में आपातकाल कब लगाया गया था?

    भारत में राष्ट्रीय आपातकाल 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर लगाया गया था।

  2. 1975 के आपातकाल के प्रमुख कारण क्या थे?

    इसके प्रमुख कारण इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द करना, जेपी आंदोलन और देशव्यापी आर्थिक असंतोष थे

  3. आपातकाल कितने समय तक चला?

    यह आपातकाल कुल 21 महीने (25 जून 1975 से 21 मार्च 1977) तक देश में लागू रहा था।

  4. आपातकाल का भारतीय लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा?

    नागरिकों के मौलिक अधिकार छिन गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगी, लेकिन अंततः इससे भारतीय लोकतंत्र और न्यायपालिका अधिक परिपक्व हुए।

  5. आपातकाल की 51वीं बरसी क्यों महत्वपूर्ण है?

    यह बरसी नागरिकों को लोकतंत्र की रक्षा करने, तानाशाही प्रवृत्तियों से बचने और नागरिक अधिकारों के प्रति सचेत रहने की याद दिलाती है।

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