27 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) दिवस मनाया गया
संदर्भ:
हर साल 27 जून को वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस (International MSME Day) के रूप में मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय MSME दिवस के बारे में:
- शुरुआत: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने अप्रैल 2017 में एक प्रस्ताव पारित कर प्रतिवर्ष 27 जून को इस दिवस के रूप में घोषित किया था।
- पहला आधिकारिक एमएसएमई दिवस (World MSME Day) 27 जून 2017 को मनाया गया था।
- क्यों मनाया जाता है? इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने, गरीबी उन्मूलन को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों में नवाचार को प्रोत्साहित करने में छोटे व्यवसायों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना है।
- महत्व: वैश्विक स्तर पर सभी व्यवसायों में एमएसएमई (Micro Small Medium Enterprises) की हिस्सेदारी लगभग 90% है, जो कुल रोजगार का 60% से 70% प्रदान करते हैं और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 50% का योगदान देते हैं।
- आयोजन: इस दिन संयुक्त राष्ट्र, व्यापार निकाय और विभिन्न देशों के एमएसएमई मंत्रालय (MSME Ministry) वैश्विक अर्थव्यवस्था में डिजिटल समावेशन बढ़ाने और महिलाओं व युवाओं के नेतृत्व वाले उद्यमशीलता (Entrepreneurship) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सेमिनार और पुरस्कार समारोह आयोजित करते हैं।
MSME क्या हैं?
- परिचय: एमएसएमई (MSME) का मतलब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro, Small, and Medium Enterprises) है। यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित निवेश और टर्नओवर की सीमाओं के अंतर्गत आने वाले विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Service) आधारित व्यवसायों को दिया गया सामूहिक नाम है।
- वर्गीकरण: भारत में यह निवेश (Investment) और वार्षिक टर्नओवर (Turnover) के दोहरे मानदंडों पर आधारित है।
- सूक्ष्म उद्यम (Micro): ₹1 करोड़ तक का निवेश और ₹5 करोड़ तक का टर्नओवर।
- लघु उद्यम (Small): ₹10 करोड़ तक का निवेश और ₹50 करोड़ तक का टर्नओवर।
- मध्यम उद्यम (Medium): ₹50 करोड़ तक का निवेश और ₹250 करोड़ तक का टर्नओवर।
- श्रेणियां: इसके अंतर्गत विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Service) दोनों क्षेत्रों को समान रूप से शामिल किया गया है।
- महत्व: यह क्षेत्र बड़े उद्योगों की तुलना में बहुत कम वित्तीय निवेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है।
- देश के कुल निर्यात में बड़ी हिस्सेदारी रखकर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाता है।
- ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय असमानता को दूर करता है।
- यह नए विचारों, स्टार्टअप और स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने का प्राथमिक मंच है।
- उद्यम पंजीकरण (Udyam): यह एमएसएमई के लिए सरकार का पूर्णतः डिजिटल, आधार-आधारित और निःशुल्क पंजीकरण पोर्टल है।
- ऋण सुलभता: सरकार द्वारा इस क्षेत्र को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के तहत आसान ऋण सुनिश्चित कराया जाता है।
भारत में एमएसएमई:
- इतिहास: स्वतंत्रता के बाद भारत में इसे ‘लघु उद्योग’ (SSI) के रूप में जाना जाता था। इस क्षेत्र को आधुनिक और औपचारिक कानूनी ढांचा देने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2006 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम पारित किया।
- इसके बाद 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इसकी परिभाषा को अपग्रेड किया गया, जिससे यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सका।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में भारत में 6.3 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जिनमें से 99% से अधिक सूक्ष्म (Micro) श्रेणी में आती हैं। इस विशाल नेटवर्क को मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
- विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector): कपड़ा, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो पुर्जे, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग सामान।
- सेवा क्षेत्र (Service Sector): आईटी परामर्श, रसद (Logistics), खुदरा व्यापार, होटल और आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवाएं और मरम्मत कार्य।
- योगदान: भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई (MSME India) को ‘आर्थिक विकास का इंजन’ माना जाता है:
- जीडीपी में हिस्सेदारी: यह क्षेत्र भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30% का योगदान देता है।
- विनिर्माण और निर्यात: भारत के कुल विनिर्माण उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 45% है और देश के कुल निर्यात (Exports) में यह लगभग 40% से 45% का योगदान देता है, जो मेक इन इंडिया (Make in India) को सफल बनाता है।
- रोजगार सृजन: कृषि क्षेत्र के बाद यह भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है, जिसने देश के 11 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका दी है।
- योजनाएं: औद्योगिक विकास (Industrial Development) की गति को तेज करने के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है:
- रैम्प योजना (RAMP Scheme): विश्व बैंक समर्थित यह योजना एमएसएमई के प्रदर्शन को सुधारने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए है।
- पीएम विश्वकर्मा योजना: पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल, डिजिटल लेनदेन और ₹3 लाख तक का कोलेटरल-फ्री ऋण सहायता देना।
- सीजीटीएमएसई (CGTMSE): छोटे व्यवसायों (Small Business India) को बिना किसी गारंटी के ₹5 करोड़ तक का क्रेडिट कवर प्रदान करना।
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए 35% तक की सरकारी सब्सिडी के साथ ऋण प्रदान करना।
- स्फूर्ति योजना (SFURTI): पारंपरिक उद्योगों और क्लस्टरों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वित्तीय सहायता देना।
FAQs:
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MSME दिवस कब मनाया जाता है?
यह दिवस प्रतिवर्ष 27 जून को वैश्विक स्तर पर छोटे और मध्यम व्यवसायों के सम्मान में मनाया जाता है।
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MSME का पूरा नाम क्या है?
इसका पूरा नाम Micro, Small and Medium Enterprises (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) है।
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MSME दिवस का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य वैश्विक सतत विकास, रोजगार और अर्थव्यवस्था में छोटे व्यवसायों (Small Enterprises) के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
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भारत की अर्थव्यवस्था में MSME का क्या योगदान है?
यह भारत की जीडीपी में लगभग 30% और कुल राष्ट्रीय निर्यात में 45% का महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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MSME क्षेत्र के लिए सरकार की प्रमुख योजनाएं कौन-सी हैं
प्रमुख योजनाओं में रैम्प (RAMP), पीएम विश्वकर्मा, सीजीटीएमएसई (CGTMSE), और पीएमईजीपी (PMEGP) शामिल हैं, जो वित्तीय सहायता देती हैं।
