किरथई-II जलविद्युत परियोजना के लिए वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी मिली
संदर्भ:
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बनने वाली किरथई-II जलविद्युत परियोजना (Kirthai-II Hydroelectric Project) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) द्वारा 197 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की सैद्धांतिक मंजूरी (In-Principle Forest Clearance) मिली।
किरथई-II जलविद्युत परियोजना क्या हैं?
- परिचय: किरथई-II एक रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत परियोजना (Run-of-River Project) है, जिसका अर्थ है कि यह पारंपरिक बांधों की तरह विशाल जलाशय बनाकर पानी रोकने के बजाय नदी के प्राकृतिक प्रवाह और उपलब्ध ढलान का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करेगी।
- इस परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 820 मेगावाट (हाल ही में संशोधित) तय की गई है। इसके तहत चिनाब नदी के पानी को हेडरेस टनल के माध्यम से टर्बाइन तक ले जाया जाएगा।
- इतिहास: इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कल्पना सबसे पहले वर्ष 1984 में की गई थी। हालांकि, सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के नियमों और स्थायी सिंधु आयोग में पाकिस्तान द्वारा लगातार दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों के कारण यह परियोजना दशकों तक ठंडे बस्ते में रही।
- वर्ष 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने संधि के कड़े रुख पर रणनीतिक बदलाव किया, तब इस रुकी हुई परियोजना को पुनर्जीवित कर तेजी से आगे बढ़ाया गया।
- निर्माणकर्ता: इस परियोजना का विकास चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (CVPPPL) द्वारा किया जा रहा है।
- यह राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) और जम्मू-कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम लिमिटेड (JKSPDC) का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, जिसमें दोनों की हिस्सेदारी क्रमशः 51% और 49% है।
- लागत सहयोग: परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹6,000 से ₹8,000 करोड़ के बीच आंकी गई है, जिसे केंद्र सरकार के बजटीय आवंटन, एनएचपीसी के इक्विटी योगदान और संस्थागत ऋणों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।
- समय अवधि: वन सलाहकार समिति (FAC) से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं पर जमीनी काम शुरू कर दिया गया है।
- इस मेगा ऊर्जा बुनियादी ढांचा (Energy Infrastructure) परियोजना के नागरिक निर्माण कार्य को पूर्ण होने में लगभग 54 से 60 महीने (5 वर्ष) का समय लगने का अनुमान है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:
- बांध की संरचना (Dam Structure): चिनाब नदी पर 121 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध (Concrete Gravity Dam) बनाया जाएगा, जिसकी शीर्ष लंबाई 219.80 मीटर होगी।
- जलाशय क्षमता (Reservoir Capacity): रन-ऑफ-रिवर होने के बावजूद, दैनिक उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए इसमें 51.26 मिलियन क्यूबिक मीटर की सीमित भंडारण क्षमता होगी।
- सुरंग प्रणाली (Tunnel System): पानी के डाइवर्जन के लिए 4.29 किलोमीटर लंबी हेडरेस टनल (Headrace Tunnel) का निर्माण किया जाएगा।
- दोहरे बिजली घर (Power Houses): इस परियोजना में एक 840 मेगावाट का भूमिगत बिजली घर (Underground Powerhouse) और एक 90 मेगावाट का बांध-टो बिजली घर (Dam-Toe Powerhouse) शामिल करने का मूल डिजाइन तैयार किया गया था, जिसे अब कुल 820 मेगावाट के अनुकूल पुनर्गठित किया गया है।
- वार्षिक उत्पादन (Annual Generation): यह संयंत्र हर साल लगभग 3,300 मिलियन यूनिट (MU) से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करने में सक्षम होगा।
महत्व:
- स्वच्छ ऊर्जा भारत (Clean Energy Project): यह भारत के नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy India) लक्ष्यों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा।
- रणनीतिक जल उपयोग: पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर भारत अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग कर पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने में सक्षम होगा।
- जम्मू-कश्मीर का विकास (Jammu and Kashmir Hydropower): किश्तवाड़ जिला उत्तर भारत का प्रमुख ‘पावर हब’ बन रहा है। यह परियोजना केंद्र शासित प्रदेश को ऊर्जा-सरप्लस (Energy-Surplus) बनाएगी और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगी।
पर्यावरणीय चिंताएं:
- वनों की कटाई: इस परियोजना के कारण 197 हेक्टेयर सघन वन भूमि प्रभावित होगी और लगभग 8,723 पेड़ों को काटा जाएगा। इनमें देवदार, ओक और दुर्लभ चिलगोजा पाइन (Chilgoza Pine) की प्रजातियां शामिल हैं।
- वन्यजीवों पर प्रभाव: यह क्षेत्र हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), एशियाई काले भालू, हिमालयन भूरे भालू और मस्क डियर का प्राकृतिक आवास है।
- शमन उपाय: वन समिति ने इन चिंताओं को देखते हुए निर्माणकर्ताओं को एक सख्त वन्यजीव जैव विविधता प्रबंधन योजना (Wildlife Biodiversity Management Plan) और जानवरों के सुरक्षित आवागमन के लिए कॉरिडोर बनाने का निर्देश दिया है।
FAQs:
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Kirthai-II जलविद्युत परियोजना क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में स्थित 820 मेगावाट की एक रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत परियोजना (Hydroelectric Project India) है
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Kirthai-II परियोजना किस नदी पर बनाई जा रही है?
यह महत्वपूर्ण परियोजना केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की प्रमुख चिनाब नदी (Chenab River Project) पर निर्मित की जा रही है।
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इस परियोजना की क्षमता कितनी है?
पर्यावरण मंत्रालय की नवीनतम मंजूरी के अनुसार, इस पनबिजली संयंत्र की संशोधित स्थापित क्षमता 820 मेगावाट है।
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Kirthai-II परियोजना का महत्व क्या है?
यह भारत की हरित ऊर्जा (Green Energy India) क्षमता बढ़ाएगी और सिंधु बेसिन के पानी के रणनीतिक उपयोग को मजबूत करेगी।
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यह परियोजना किस संस्था द्वारा विकसित की जा रही है?
इसे चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (CVPPPL) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो NHPC और JKSPDC का संयुक्त उद्यम है।
