I-2SEA एक अत्याधुनिक पनडुब्बी केबल प्रणाली
संदर्भ:
हाल ही में भारत और आसियान (ASEAN) क्षेत्र के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर (Internet Infrastructure) को मजबूत करने के उद्देश्य से I-2SEA Submarine Cable (भारत-दक्षिण पूर्व एशिया पनडुब्बी केबल प्रणाली) बनाने की घोषणा की गई।
I-2SEA Submarine Cable (भारत-दक्षिण पूर्व एशिया पनडुब्बी केबल प्रणाली) क्या हैं?
- परिचय: I-2SEA (India-Southeast Asia) एक अत्याधुनिक, उच्च क्षमता वाली ऑप्टिकल फाइबर आधारित पनडुब्बी केबल प्रणाली (Submarine Cable System) है, जो गहरे समुद्र के तल (Ocean Floor) पर बिछाई जाएगी।
- इसका प्राथमिक कार्य महाद्वीपों और देशों के बीच प्रकाश की गति से विशाल डेटा पैकेट्स (Data Packets) का ट्रांसमिशन होगा।
- जुड़ाव: यह प्रणाली भारत के पूर्वी तट को सीधे सिंगापुर (सिंगापुर का प्रमुख क्लाउड इंटरकनेक्ट हब) और मलेशिया (कुआलालंपुर का डेटा सेंटर कॉरिडोर) से जोड़ेगी।
- उद्देश्य: AI और क्लाउड वर्कलोड का समर्थन: इसका मूल उद्देश्य GPU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं (GPU Infrastructure Providers) और बड़े हाइपरस्केलर उद्योगों को सुचारू डेटा प्रवाह प्रदान करना है जो AI ट्रेनिंग और इनफ्रेंस वर्कलोड (AI Training and Inference Workloads) को संभालते हैं।
- भारत (विशेष रूप से हैदराबाद और चेन्नई) तथा सिंगापुर-मलेशिया कॉरिडोर के बीच डेटा ट्रांसफर के समय (Latency) को 10-15% तक कम करना।
- वर्तमान में अधिकांश केबलें स्वेज नहर और रेड सी (Red Sea) जैसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। यह केबल बंगाल की खाड़ी के माध्यम से एक सुरक्षित और वैकल्पिक नेटवर्क लचीलापन (Network Resilience) प्रदान करेगी।
- सहयोग: यह परियोजना एक संयुक्त निर्माण समझौते (Joint Build Agreement) के तहत क्रियान्वित की जा रही है, जिसमें वैश्विक और भारतीय टेक दिग्गज शामिल हैं:
- मुख्य स्वामी (Majority Owner): Lightstorm, जो एशिया पैसिफिक का एक अग्रणी AI कनेक्टिविटी प्लेटफॉर्म है।
- कंसोर्टियम पार्टनर्स (Consortium Partners): इसमें Microsoft, Singtel और Tata Communications जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
- सिस्टम आपूर्तिकर्ता (System Supplier): जापान की प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनी NEC Corporation।
- समुद्री स्थापना भागीदार (Marine Installation Partner): सिंगापुर स्थित ASEAN Cableship (ACPL)।
- मलेशियाई लैंडिंग पार्टनर: Telecom Malaysia।
- समय सीमा (Timeline): I-2SEA परियोजना को आधिकारिक तौर पर 2029 की चौथी तिमाही (Q4 2029) तक पूरी तरह से चालू और सेवा के लिए तैयार (Ready-for-Service) करने का लक्ष्य रखा गया है।
तकनीकी और भौतिक विशेषताएं:
| कुल लंबाई (Total Length) | लगभग 3,600 किलोमीटर (सिंगापुर से भारत का पूर्वी तट) |
| लैंडिंग स्टेशन (Landing Stations) | कुल 4 स्टेशन; भारत में दो: मछलीपट्टनम (आंध्र प्रदेश) और दक्षिण चेन्नई (तमिलनाडु) |
| गहरे समुद्र में दफन (Deep Cable Burial) | सुरक्षा के लिए केबल को पूरे नेटवर्क में 3 मीटर की गहराई पर दफनाया जाएगा |
| नेटवर्क आर्किटेक्चर | इंटरऑपरेबल केबल आर्किटेक्चर और वाहक-तटस्थ (Carrier-Neutral) लैंडिंग अवसंरचना |
| स्थलीय नेटवर्क एकीकरण | भारत में Lightstorm के 30,000+ किलोमीटर लंबे स्थलीय फाइबर नेटवर्क से सीधे जुड़ेगी |
| सुरक्षा और अपटाइम | 3-मीटर गहरे तकनीक (Deep Burial Strategy) इसे जहाजों के लंगर (Anchors) और समुद्री गतिविधियों से होने वाले नुकसान से बचाएगी |
| स्मार्टनेट एआई फैब्रिक (SmartNet AI Fabric) | भारत में लैंडिंग स्टेशनों का प्रबंधन Lightstorm अपने AI-रेडी ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म और ‘Polarin’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकीकृत रूप से करेगा। |
महत्व:
- भारत-आसियान कनेक्टिविटी (India ASEAN Connectivity): यह परियोजना भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मजबूत डिजिटल आयाम देती है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध प्रगाढ़ होंगे।
- डेटा सेंटर हब के रूप में भारत का उदय: यह केबल सीधे भारत के भीतर 80 से अधिक प्रमुख डेटा सेंटरों को जोड़ेगी। इससे देश की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता, जो वर्तमान में 1.4 गीगावाट है, में भारी उछाल आएगा।
- डेटा संप्रभुता और रूट विविधीकरण: मलक्का जलडमरू मध्य और हिंद महासागर के सुरक्षित क्षेत्रों से गुजरने के कारण यह केबल भारत की संचार संप्रभुता को चीनी साइबर या भौतिक हस्तक्षेप से सुरक्षा प्रदान करेगी।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) को गति: गेमिंग, 5G/6G रोलआउट, क्लाउड कंप्यूटिंग और ई-गवर्नेंस सेवाओं को ग्रामीण भारत तक निर्बाध पहुंचाने में यह अंडरसी केबल (Undersea Cable) बैकबोन का काम करेगी।
FAQs:
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I-2SEA पनडुब्बी केबल प्रणाली क्या है?
I-2SEA एक उच्च क्षमता वाली ऑप्टिकल फाइबर आधारित पनडुब्बी केबल प्रणाली (Submarine Cable) है, जो भारत के पूर्वी तट को मलेशिया और सिंगापुर से जोड़ती है।
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I-2SEA परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ रहे जनरेटिव AI, हाइपरस्केलर डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए सबसे कम लेटेंसी वाला नेटवर्क रूट प्रदान करना है।
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भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह डिजिटल कनेक्टिविटी को लचीलापन देती है, पुराने केबलों पर निर्भरता कम करती है और सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन सुनिश्चित करती है।
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अंडरसी केबल कैसे काम करती है?
अंडरसी केबल मुख्य रूप से ऑप्टिकल फाइबर तकनीक (Fiber-optic Technology) का उपयोग करती हैं। समुद्र के तल पर बिछाई गई इन पतली कांच की नलिकाओं के भीतर लेजर किरणों (Laser Rays) के माध्यम से डेटा को प्रकाश की गति से दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक भेजा जाता है।
