MECON को मिला ‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ का दर्जा
संदर्भ:
हाल ही में इस्पात मंत्रालय (Steel Ministry) ने प्रमुख इंजीनियरिंग परामर्श फर्म मेकॉन लिमिटेड (MECON Limited) को प्रतिष्ठित ‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ (Miniratna Category I) का दर्जा प्रदान किया।
मेकॉन लिमिटेड (MECON Limited):
- स्थापना एवं मुख्यालय: मेकॉन की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी और इसका मुख्यालय रांची, झारखंड में स्थित है।
- प्रशासनिक नियंत्रण: यह इस्पात मंत्रालय के अधीन काम करने वाली अनुसूची ‘A’ की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम (CPSE) है।
- मुख्य कार्य (Core Operations): यह भारत की अग्रणी इंजीनियरिंग, परामर्श, परियोजना प्रबंधन और ठेका (Engineering Consultancy, Project Management and Contracting) संस्था है।
- यह मुख्य रूप से धातु विज्ञान (विशेषकर इस्पात), बुनियादी ढांचा, बिजली, खनन, और तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों में सेवाएं देती है।
- मिनीरत्न स्टेटस मानदंड: सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) के मानदंडों के अनुसार, किसी कंपनी को ‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ का दर्जा (Miniratna Status) तब मिलता है जब उसने पिछले लगातार तीन वर्षों में लाभ कमाया हो और उसकी निवल संपत्ति सकारात्मक हो।
- प्रदर्शन: 31 मार्च 2026 तक ₹535.42 करोड़ की सकारात्मक निवल संपत्ति (Positive Net Worth) और लगातार तीन वर्षों तक मुनाफा कमाने के कारण मेकॉन को यह उन्नत प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है।
- कर-पूर्व लाभ (Profit Before Tax – PBT) वित्त वर्ष 2023-24 में ₹77.62 करोड़, वित्त वर्ष 2024-25 में ₹32.08 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹104.53 करोड़ रहा।
- निवल संपत्ति (Net Worth) कंपनी की कुल निवल संपत्ति ₹535.42 करोड़ दर्ज की गई, जिसने इस दर्जे का मार्ग प्रशस्त किया।
‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ मिलने के मुख्य लाभ:
- वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy): कंपनी बिना सरकारी मंजूरी के ₹500 करोड़ या अपनी नेटवर्थ (जो भी कम हो) तक के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के निर्णय स्वयं ले सकती है।
- व्यावसायिक विस्तार (Business Expansion): कंपनी को नए संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) स्थापित करने, विदेशी सहायक कंपनियां खोलने और रणनीतिक साझेदारी करने की आंशिक स्वतंत्रता मिलेगी।
- त्वरित निर्णय प्रक्रिया (Fast Decision Making): सरकारी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होने से आधुनिकीकरण और नए उपकरणों की खरीद में तेजी आएगी।
भारत में ‘रत्न’ वर्गीकरण (Ratna Classification in India):
| श्रेणी (Category) | मुख्य वित्तीय मानदंड (Key Criteria) | वित्तीय स्वायत्तता की सीमा (Financial Power Limit) |
| महारत्न (Maharatna) | – नवरत्न का दर्जा प्राप्त हो।- पिछले 3 वर्षों में औसत टर्नओवर > ₹25,000 करोड़ हो।- औसत नेटवर्थ > ₹15,000 करोड़ हो। | बिना सरकारी अनुमति के ₹5,000 करोड़ तक या नेटवर्थ का 15% निवेश करने की स्वतंत्रता। |
| नवरत्न (Navratna) | – मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्राप्त हो।- नेटवर्थ, शुद्ध लाभ जैसे 6 मापदंडों में 100 में से 60 अंक प्राप्त किए हों। | सरकारी मंजूरी के बिना किसी एक परियोजना में ₹1,000 करोड़ तक निवेश की स्वायत्तता। |
| मिनीरत्न श्रेणी-I (Miniratna-I) | – पिछले 3 वर्षों से लगातार मुनाफा कमाया हो।- 3 वर्षों में से कम से कम एक वर्ष ₹30 करोड़ या अधिक का कर-पूर्व लाभ (PBT) कमाया हो। | बिना सरकारी मंजूरी के ₹500 करोड़ या नेटवर्थ के बराबर (जो भी कम हो) निवेश करने की शक्ति। |
| मिनीरत्न श्रेणी-II (Miniratna-II) | – पिछले 3 वर्षों से लगातार मुनाफा कमाया हो।- नेटवर्थ सकारात्मक होनी चाहिए। | बिना सरकारी मंजूरी के ₹300 करोड़ या नेटवर्थ का 50% तक निवेश करने की शक्ति। |
FAQs:
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MECON को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा क्यों मिला?
मेकॉन लिमिटेड ने सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा तय वित्तीय मानकों को पूरा किया है। कंपनी ने पिछले 3 वित्तीय वर्षों में लगातार कर-पूर्व लाभ (PBT) कमाया।
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मिनीरत्न का दर्जा मिलने से MECON को क्या लाभ होगा?
इसके निदेशक मंडल को ₹500 करोड़ तक के निवेश के लिए किसी सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। इससे कंपनी को तकनीकी उन्नयन और त्वरित व्यावसायिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी
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भारत में मिनीरत्न कंपनियां क्या होती हैं?
भारत सरकार द्वारा जिन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) को उनके निरंतर अच्छे वित्तीय प्रदर्शन और लाभ के आधार पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता दी जाती है।
