संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2026
संदर्भ:
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) द्वारा हाल ही में सस्टेनेबल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 (Sustainable Development Report 2026) जारी की गई। इस वर्ष की रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में देशों की प्रगति का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDG) सूचकांक 2026 के मुख्य निष्कर्ष:
- शीर्ष देश: हमेशा की तरह इस वर्ष भी नॉर्डिक देशों का सूचकांक पर दबदबा रहा। फिनलैंड प्रथम स्थान (स्कोर: 87.40) पर रहा, जिसके बाद क्रमशः स्वीडन और डेनमार्क का स्थान है।
- निम्नतम देश: राजनीतिक अस्थिरता, गृहयुद्ध और वित्तीय संकट से जूझ रहे देश जैसे चाड, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और दक्षिण सूडान सूचकांक में सबसे निचले पायदान पर हैं।
- विरोध: वर्ष 2025-2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्तावों में अर्जेंटीना और अमेरिका दो ऐसे देश रहे जिन्होंने सतत विकास प्रतिमान का विरोध किया, और अमेरिका ने 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपनी भागीदारी कम की है।
- भारत का प्रदर्शन: SDG Index 2026 में भारत ने वैश्विक रैंकिंग (SDG Rankings) में अब तक का अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ 94वां स्थान हासिल किया है। भारत का यह प्रदर्शन पिछले वर्षों की तुलना में एक सुधार को दर्शाता है।
- वर्ष 2015 में UN SDG को अपनाए जाने के बाद से भारत ने अपनी रैंकिंग में 18 पायदानों का सुधार किया है।
| वर्ष | भारत की रैंक (India SDG Ranking) | कुल देश | समग्र स्कोर (Score out of 100) |
| 2026 | 94वीं | 167 | 68.3 |
| 2025 | 99वीं | 167 | 67.0 |
| 2015 | 112वीं | – | – |
- भारत के लिए सकारात्मक पक्ष: भारत ने नीतिगत सुधारों और लक्षित राष्ट्रीय मिशनों के माध्यम से दो विशेष लक्ष्यों में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है:
- किफायती और स्वच्छ ऊर्जा (SDG 7 – Affordable & Clean Energy): ग्रामीण विद्युतीकरण (100% इलेक्ट्रिफिकेशन) और प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 300% तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें सौभाग्य योजना और पीएम-कुसुम ने बड़ी भूमिका निभाई।
- उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा (SDG 9 – Industry, Innovation & Infrastructure): इंटरनेट और मोबाइल ब्रॉडबैंड के देशव्यापी विस्तार ने भारत के डिजिटल समावेशन को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है।
- भारत के समक्ष गंभीर चुनौतियां: रिपोर्ट के अनुसार, भारत अभी भी 17 में से 13 लक्ष्यों में प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रहा है और 2030 तक केवल 33.3% लक्ष्यों को ही पूरी तरह प्राप्त करने के मार्ग पर है:
- भुखमरी की समाप्ति (SDG 2 – Zero Hunger): यह भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। देश में चाइल्ड वेस्टिंग (Child Wasting) की दर लगभग 19% है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक में से एक है। इसके अलावा, बाल कुपोषण और गंभीर स्टंटिंग अभी भी बड़ी चुनौती हैं।
- जलवायु कार्रवाई (SDG 13 – Climate Action): आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ कुल कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।
- पड़ोसी देशों से तुलना: इस ऐतिहासिक सुधार के बावजूद, भारत दक्षिण एशिया में अपने पड़ोसी देशों जैसे भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका से रैंकिंग में पीछे है, हालांकि वह पाकिस्तान से आगे बना हुआ है।
सतत विकास लक्ष्य (SDG) सूचकांक क्या हैं?
- परिचय: यह वैश्विक स्तर पर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रगति को मापने का एक प्रामाणिक पैमाना है।
- नोडल संस्था: वैश्विक स्तर पर इसे यूएन सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) द्वारा तैयार और जारी किया जाता है।
- लक्ष्यों का दायरा: यह संयुक्त राष्ट्र के 17 मुख्य लक्ष्यों (SDGs) और 169 उप-लक्ष्यों (Targets) पर देशों की प्रगति का आकलन करता है।
- समय सीमा: यह वैश्विक एजेंडा (एजेंडा 2030) के तहत 2015 से 2030 के बीच निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की निगरानी करता है।
- स्कोरिंग पद्धति: सूचकांक में देशों को 0 से 100 के पैमाने पर स्कोर दिया जाता है, जहां 100 का अर्थ लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति है।
- डेटा के स्रोत: इसकी रैंकिंग विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस (SDG Indicators) पर आधारित होती है।
- यह पारंपरिक जीडीपी (GDP) आधारित विकास के बजाय मानव कल्याण और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
- तीन मुख्य स्तंभ: यह सूचकांक आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक समावेशन, और पर्यावरणीय संवहनीयता के बीच संतुलन का आकलन करता है।
- डैशबोर्ड प्रणाली (Traffic-Light System): इसमें लक्ष्यों को चार रंगों (हरा, पीला, नारंगी, लाल) के माध्यम से दर्शाया जाता है, जो चुनौतियों की गंभीरता को दिखाते हैं।
- महत्व: यह सरकारों को अपनी बजटीय प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय विकास नीतियों (Evidence-based policymaking) को संरेखित करने में मदद करता है।
- यह देशों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition) को बढ़ावा देता है, जिससे वैश्विक सहयोग मजबूत होता है।
- यह सूचकांक यह भी मापता है कि एक अमीर देश की नीतियां दूसरे विकासशील देशों के पर्यावरण या अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर रही हैं।
- वैश्विक निवेशक और बहुपक्षीय बैंक (जैसे आईएमएफ, विश्व बैंक) देशों को ऋण देने से पहले उनके एसडीजी स्कोर को ध्यान में रखते हैं।
- यह रिपोर्ट हर साल विकासशील देशों में सतत लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय कमी (Financing Gap) को उजागर करती है।
- स्थानीयकरण (Localisation): इसकी सफलता से प्रेरित होकर भारत में नीति आयोग द्वारा ‘SDG इंडिया इंडेक्स’ जारी किया जाता है, ताकि राज्यों के स्तर पर सुधार हो सके।
FAQs:
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SDG Index 2026 क्या है?
यह एक वार्षिक वैश्विक मूल्यांकन सूचकांक है जो संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों द्वारा वर्ष 2030 के एजेंडे के तहत सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में की गई प्रगति को मापता है। इसे UN सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क (SDSN) द्वारा तैयार किया जाता है।
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संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) क्या हैं?
वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए 17 वैश्विक लक्ष्य (Sustainable Development Goals) और 169 उप-लक्ष्य (Targets) हैं, जिनका उद्देश्य 2030 तक दुनिया से गरीबी और भुखमरी को मिटाना, लैंगिक समानता लाना, पर्यावरण की रक्षा करना और सभी के लिए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करना है।
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SDG Index कैसे तैयार किया जाता है?
यह सूचकांक विभिन्न वैश्विक और राष्ट्रीय आधिकारिक डेटा स्रोतों (SDG Indicators) के आधार पर 0 से 100 के पैमाने पर तैयार किया जाता है। 100 का स्कोर यह दर्शाता है कि किसी देश ने सभी 17 लक्ष्यों को पूरी तरह से प्राप्त कर लिया है।
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SDG Index 2026 में भारत की रैंक क्या है?
इस सूचकांक में भारत की रैंक 94वीं है (167 देशों में) और इसका कुल समग्र स्कोर 68.3 है, जो भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
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SDG Index देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सूचकांक वैश्विक स्तर पर देशों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं (Sustainable Growth) को की प्रगति को दर्शाता है। इसके जरिए सरकारें अपनी नीतियों में सुधार कर वित्तीय संसाधनों का सही आवंटन कर सकती हैं।
