भारत का पहला मेड-इन-इंडिया EXIM शिपिंग कंटेनर
संदर्भ:
हाल ही में उत्तर प्रदेश के दादरी में स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (Inland Container Depot) में भारत के पहले मेड-इन-इंडिया EXIM शिपिंग कंटेनर [Made in India EXIM Shipping Container] को लॉन्च किया गया।
मेड-इन-इंडिया EXIM शिपिंग कंटेनर के बारे में:
- परिचय: यह भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित पहला निर्यात-आयात शिपिंग कंटेनर [EXIM Shipping Container] है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कार्गो शिपिंग में चीन के एकाधिकार (जो वर्तमान में वैश्विक बाजार का लगभग 90% है) को कम करना है।
- निर्माणकर्ता: इसका विनिर्माण भारत के अग्रणी निजी औद्योगिक समूह DCM श्रीराम ग्रुप द्वारा किया गया है।
- सहयोग: इसमें ए.पी. मोलर-मर्स्क (A.P. Moller-Maersk) ने अपना अंतरराष्ट्रीय तकनीकी ज्ञान साझा किया है।
- वित्तीय सहयोग: केंद्रीय बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) इसके वित्तीय मॉडल का मुख्य आधार है।
- इसके तहत भारत की वार्षिक विनिर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs (Twenty-foot Equivalent Units) करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रमुख तकनीकी एवं अन्य विशेषताएं:
- अंतरराष्ट्रीय मानक: यह कंटेनर वैश्विक ISO विनिर्देशों और ‘इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर सेफ कंटेनर्स’ (CSC) के सभी सुरक्षा मानदंडों को शत-प्रतिशत पूरा करता है।
- यह सबसे लोकप्रिय मानक 20-फुट ड्राई कार्गो कंटेनर (20ft ISO Dry Cargo Container) के सटीक विनिर्देशों पर आधारित है, जिसे वैश्विक व्यापार की भाषा में 1 TEU (Twenty-foot Equivalent Unit) कहा जाता है।
- इसका कुल आंतरिक वॉल्यूम लगभग 33.2 घन मीटर (CBM / Cubic Meters) या 1,172 घन फीट होता है।
- खाली वजन (Tare Weight): जब कंटेनर पूरी तरह खाली होता है, तो इसका अपना वजन लगभग 2,280 किलोग्राम से 2,300 किलोग्राम (लगभग 2.3 टन) होता है।
- इस कंटेनर के अंदर अधिकतम 28,200 किलोग्राम (लगभग 28.2 टन) तक का व्यावसायिक माल सुरक्षित रूप से लोड (Stuffed) किया जा सकता है।
- प्रोटोटाइप परीक्षण: इस मेड इन इंडिया कंटेनर [Made in India Container] ने अंतरराष्ट्रीय परीक्षण प्रयोगशालाओं में स्टैकिंग (एक के ऊपर एक रखना), लिफ्टिंग (उठाना), रैकिंग, फर्श की मजबूती और वेदरप्रूफिंग (मौसम से सुरक्षा) जैसे कड़े टेस्ट सफलतापूर्वक पास किए हैं।
- उच्च-ग्रेड स्टील (Corten Steel): DCM श्रीराम ग्रुप द्वारा निर्मित इस कंटेनर में जंग-रोधी और अत्यधिक टिकाऊ ‘कॉर्टन स्टील’ (Weathering Steel) की शीट का उपयोग किया गया है। यह समुद्र के खारे पानी और खराब मौसम में भी माल को सुरक्षित रखता है।
महत्व:
- लॉजिस्टिक्स इंडिया [Logistics India] में सुधार: भारत में स्थानीय स्तर पर कंटेनर निर्माण [Container Manufacturing] होने से माल ढुलाई के समय और लागत में भारी कमी आएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलेगी।
- आयात पर निर्भरता कम होना: अब तक भारत को सालाना लगभग 20 लाख खाली कंटेनर आयात करने पड़ते थे। घरेलू विनिर्माण शुरू होने से निर्यात आयात [Export Import] के लिए विदेशी कंटेनरों की किल्लत पूरी तरह खत्म होगी।
- मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047: यह पहल भारत के बंदरगाह बुनियादी ढांचे [Port Infrastructure] को मजबूत करेगी और भारत को 2030 तक सालाना 7.5 लाख TEUs उत्पादन क्षमता हासिल करने में मदद करेगी।
- इसके लॉन्च होते ही मर्स्क ने 1,000 अतिरिक्त कंटेनरों का ऑर्डर देकर भारतीय विनिर्माण [India Manufacturing] पर वैश्विक भरोसा जताया है।
FAQs:
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मेड-इन-इंडिया EXIM शिपिंग कंटेनर क्या है?
यह भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित वैश्विक मानकों (ISO) वाला पहला कंटेनर है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए होगा।
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यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह शिपिंग कंटेनर भारत [Shipping Container India] की विदेशी निर्भरता घटाकर भारत विनिर्माण [India Manufacturing] और समुद्री आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
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EXIM शिपिंग कंटेनर का उपयोग कहां होता है?
इनका उपयोग वैश्विक समुद्री मार्गों पर जहाजों, बंदरगाहों और रेल-सड़क माध्यमों से माल की सुरक्षित आवाजाही के लिए होता है।
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इससे भारत के निर्यात-आयात क्षेत्र को क्या लाभ होगा?
इससे निर्यात आयात [Export Import] के लिए कंटेनरों की किल्लत दूर होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
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इस कंटेनर का निर्माण किसने किया है?
इस पहले ग्रेड वाले कंटेनर का निर्माण भारत के अग्रणी औद्योगिक समूह DCM श्रीराम ग्रुप द्वारा किया गया है।
