Cytopsis indica नामक समुद्र मछली नई प्रजाति
Image Credit: NewsBytes
संदर्भ:
हाल ही में कोच्चि स्थित केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के वैज्ञानिकों ने केरल के दक्षिणी तट के पास, पूर्वी लक्षद्वीप सागर के महाद्वीपीय ढलान पर ‘साइटोप्सिस इंडिका’ (Cytopsis indica) नामक गहरे समुद्र की मछली (New Fish Species) की एक नई प्रजाति की खोज की।
साइटोप्सिस इंडिका के बारे में:
- नाम: अरब सागर में मिली इस नई मछली प्रजाति (New Fish Species) का सामान्य नाम ‘इंडियन डोरी’ (Indian Dory) रखा गया है।
- वंश: यह ‘साइटोप्सिस’ (Cyttopsis) वंश से संबंधित है, जो प्राचीन समुद्री मछलियों का एक आदिम समूह है, जिन्हें सामान्यतः ‘डोरीज’ कहा जाता है।
- खोज: यह समुद्री अनुसंधान (Ocean Research) वैज्ञानिक डॉ. रतीश कुमार आर. के नेतृत्व में CMFRI की ‘समुद्री जैव विविधता और पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग’ द्वारा किया गया।
- शोधकर्ताओं ने पारंपरिक वर्गीकरण विश्लेषण और आधुनिक आणविक तकनीकों (डीएनए बारकोडिंग) का उपयोग करके इसकी पुष्टि की है।
- खोज क्षेत्र: यह मछली केरल के कोल्लम में स्थित शक्तिकुलंगारा मछली पकड़ने के बंदरगाह पर गहरे समुद्र के वाणिज्यिक ट्रॉलर लैंडिंग के दौरान प्राप्त छह नमूनों के आधार पर पहचानी गई।
- गहराई: यह मुख्य रूप से समुद्र तल से 350 मीटर से 500 मीटर की अत्यधिक गहराई पर पाई जाती है, जो कि पूर्वी लक्षद्वीप सागर का महाद्वीपीय ढलान क्षेत्र है।
- बनावट: इनका शरीर गहरा, पार्श्व रूप से संकुचित (चपटा) और डिस्क के आकार का होता है। इनका सिर बड़ा, आंखें बड़ी और रंगत चांदी जैसी गुलाबी (Silvery-Pink) होती है।
- अनुकूलन क्षमता: गहरे समुद्र के भारी दबाव को सहन करने के लिए ये मछलियां अपने शरीर में उच्च स्तर के मोमी यौगिकों (Waxy Compounds) को संचित करती हैं।
- इस वजह से यह मानव द्वारा सीधे उपभोग (Direct Consumption) के लिए अनुपयुक्त मानी जाती हैं।
- आहार: ये निचले स्तर के शिकारी जीव हैं जो मुख्य रूप से छोटी मछलियों और क्रस्टेशियंस (कवची जीवों) को अपना भोजन बनाते हैं।
- पूर्व वर्गीकरण: इससे पहले, हिंद महासागर (Indian Ocean) में पाई जाने वाली इस प्रकार की मछलियों को अटलांटिक महासागर की प्रजाति ‘साइटोप्सिस रोजिया’ (Cyttopsis rosea) माना जाता था।
- लेकिन इस नई वैज्ञानिक खोज (Scientific Discovery) ने साबित कर दिया कि यह केवल अटलांटिक तक ही सीमित है।
भारत में पाई जाने वाली अन्य वंशज मछलियाँ:
- जेनोप्सिस वंश (Zenopsis Genus): यह ‘साइटोप्सिस’ की तरह ही जीफॉर्म्स (Zeiformes) आर्डर और ‘डोरी’ परिवार से संबंधित गहरे समुद्र की मछली है।
- हिंद महासागर में इस वंश की ‘जेनोप्सिस कोंचिफर’ (Zenopsis conchifer) प्रजाति पाई जाती है, जिसे अक्सर ‘साइलो डोरी’ भी कहा जाता है।
- रास्ट्रेलीगर वंश (Rastrelliger Genus): भारतीय खारे पानी की सबसे व्यावसायिक और लोकप्रिय मछली ‘बांगड़ा’ (Indian Mackerel) इसी वंश से संबंधित है।
- इसका वैज्ञानिक नाम रास्ट्रेलीगर कानागुर्टा (Rastrelliger kanagurta) है, जो भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर प्रचुर मात्रा में मिलती है।
- सार्डिनेला वंश (Sardinella Genus): भारत के तटीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली ‘तारली’ (Indian Oil Sardine) इसी वंशज की प्रजाति है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर यह मछली भारत के समुद्री मत्स्य उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा बनाती है।
- लैबियो वंश (Labeo Genus): भारत के मीठे पानी (नदियों और तालाबों) में पाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध कार्प मछली ‘रोहू’ (लैबियो रोहिता) इसी प्रतिष्ठित वंश का हिस्सा है।
FAQs:
-
साइटोप्सिस इंडिका क्या है?
यह भारत के अरब सागर में खोजी गई गहरे समुद्र की आदिम मछली की एक बिल्कुल नई और दुर्लभ प्रजाति है।
-
यह नई मछली प्रजाति कहां खोजी गई?
इसे दक्षिणी केरल के तट के पास, पूर्वी लक्षद्वीप सागर के महाद्वीपीय ढलान पर 350-500 मीटर की गहराई में खोजा गया है।
-
इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
इसने हिंद महासागर की मछली के वर्गीकरण से जुड़ी पुरानी वैश्विक त्रुटि को सुधारा और आनुवंशिक रूप से नई विशिष्ट प्रजाति स्थापित की।
-
समुद्री जैव विविधता संरक्षण में इसका क्या योगदान है?
यह गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की खाद्य श्रृंखला को समझने और अज्ञात प्रजातियों के दीर्घकालिक डेटाबेस व संरक्षण नीतियां बनाने में मदद करती है।
-
इस नई प्रजाति की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
इसका शरीर चपटा, आंखें बड़ी, चांदी जैसी गुलाबी होती हैं, और मोमी यौगिकों के कारण यह इंसानी उपभोग के योग्य नहीं है।
