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नर्मदा परियोजना भुगतान संधि

नर्मदा परियोजना भुगतान संधि 

Narmada Project Payment Agreement

संदर्भ:

केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह की उपस्थिति में नई दिल्ली में चार राज्यों—मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र—के मुख्यमंत्रियों ने ऐतिहासिक नर्मदा परियोजना भुगतान संधि (Narmada Project Payment Agreement) पर हस्ताक्षर किए।

नर्मदा परियोजना भुगतान संधि क्या है?

  • परिचय: नर्मदा परियोजना भुगतान संधि (Narmada Project Payment Agreement) मूल रूप से नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (Narmada Water Disputes Tribunal – NWDT) के तहत विकसित बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के वित्तीय बकाए, निर्माण लागत की हिस्सेदारी, डूब क्षेत्र के भूमि मुआवजे और पुनर्वास खर्चों को पूरी तरह चुकता करने के लिए किया गया एक बहुपक्षीय एकमुश्त निपटान (One-time Settlement) समझौता है। 
  • समझौते की तिथि: यह समझौता 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में हुआ।
  • सम्मिलित राज्य: इस अंतर-राज्यीय समझौता (Inter State Agreement) में नर्मदा बेसिन और परियोजना से सीधे लाभ उठाने वाले निम्नलिखित चार राज्य पूरी तरह शामिल हैं:
  1. मध्य प्रदेश (मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव)
  2. गुजरात (मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल)
  3. महाराष्ट्र (मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस)
  4. राजस्थान (मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा)
  • पृष्ठभूमि: नर्मदा नदी (Narmada River) के जल और बिजली बंटवारे के लिए वर्ष 1969 में केंद्रीय न्यायाधिकरण का गठन हुआ था, जिसने 1979 में अपना अंतिम निर्णय (नर्मदा अवार्ड) दिया।
    • इसके तहत सरदार सरोवर परियोजना (Sardar Sarovar Project) और इंदिरा सागर परियोजना (Indira Sagar Project) जैसी विशाल बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना (River Project) की रूपरेखा तैयार हुई।
  • बांध निर्माण की कुल लागत को चारों लाभार्थी राज्यों के बीच साझा करने की व्यवस्था थी।
  • जब 2019 में बांध पहली बार पूरी क्षमता से भरा, तो मध्य प्रदेश का डूब क्षेत्र उम्मीद से 5,000 हेक्टेयर अधिक बढ़ गया।
  • इसके चलते मध्य प्रदेश ने नए बाजार भाव पर ₹7,669 करोड़ के मुआवजे का दावा किया, जबकि गुजरात ने पुराने मानदंडों के तहत केवल ₹281 करोड़ देने और एमपी पर रखरखाव के ₹5,516 करोड़ का काउंटर क्लेम कर रखा था। 
  • इसी गतिरोध और दावों-प्रतिदावों के चलते यह वित्तीय विवाद दशकों से उलझा हुआ था। 
  • उद्देश्य:
    1. वित्तीय गतिरोध समाप्त करना: राज्यों के आपसी दावों-प्रतिदावों को एकमुश्त भुगतान व्यवस्था (One-time financial arrangement) से सदा के लिए खत्म करना।
    2. पुनर्वास में तेजी लाना: डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए परिवारों को त्वरित और पारदर्शी भूमि मुआवजा प्रदान करना।
    3. परियोजनाओं का सुचारू संचालन: वित्तीय विवादों को हटाकर बुनियादी ढांचे के रख-रखाव में आने वाली बाधाओं को दूर करना। 
  • प्रावधान:
    1. एकमुश्त वित्तीय निपटान: सभी राज्यों ने आपस में चल रही अंतहीन गणनाओं को छोड़कर अंतिम वित्तीय समझौते को स्वीकार किया।
      • इसके तहत मध्य प्रदेश सरकार अब गुजरात सरकार को वित्तीय संतुलन के तौर पर ₹550 करोड़ का भुगतान करेगी, जिससे सभी पिछले दावे शून्य हो जाएंगे।
    2. वैकल्पिक परियोजनाओं को मंजूरी: महाराष्ट्र के लिए निर्धारित 10 टीएमसी पानी का उसकी भौगोलिक बनावट के कारण उपयोग नहीं हो पा रहा था। संधि के तहत केंद्र ने महाराष्ट्र की दो वैकल्पिक परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
    3. ब्याज और ऋण देनदारियों का अंत: निर्माण के लिए लिए गए ऋणों पर उपजे ब्याज के बोझ को साझा करने का तार्किक निपटारा किया गया है।

महत्व:

यह समझौता भारत के जल संसाधन भारत (Water Resources India) के कुशल दोहन और सहकारी संघवाद के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है:

  • कुशल जल प्रबंधन (Water Management): यह समझौता राज्यों के बीच आपसी अविश्वास को दूर कर नदी बेसिन (River Basin) के एकीकृत और वैज्ञानिक प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • सिंचाई परियोजना (Irrigation Project) का सुदृढ़ीकरण: नहरों के नेटवर्क का विस्तार निर्बाध होगा, जिससे गुजरात के सूखाग्रस्त इलाकों और राजस्थान के दूरदराज रेगिस्तानी क्षेत्रों की कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।
  • जलविद्युत (Hydropower) क्षमता का पूर्ण दोहन: वित्तीय विवाद सुलझने से नदी तल बिजली घरों (River Bed Power Houses) की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, जिससे ग्रिड को स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी।

FAQs:

  1. नर्मदा परियोजना भुगतान संधि क्या है?

    यह चार राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना की लागत और बकाए के निपटान हेतु हस्ताक्षरित एकमुश्त वित्तीय समझौता है।

  2. इस संधि का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    इसका उद्देश्य राज्यों के बीच लंबित भुगतान विवादों को सुलझाकर विस्थापितों का त्वरित पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित करना है।

  3. किन राज्यों को इसका लाभ मिलेगा?

    इस ऐतिहासिक समझौते का सीधा लाभ चार भागीदार राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र को प्राप्त होगा।

  4. भुगतान संधि क्यों आवश्यक थी?

    दशकों पुराने वित्तीय विवादों, मुआवजा दावों और निर्माण लागत के गतिरोध को समाप्त करने के लिए यह संधि आवश्यक थी।

  5. नर्मदा परियोजना का भारत के लिए क्या महत्व है?

    यह परियोजना देश के पश्चिमी और मध्य भागों में कृषि विकास, पेयजल आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा की मुख्य जीवनरेखा है।

  6. इससे सिंचाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

    नहरों में जल प्रवाह सुचारू होने से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को बारहमासी सिंचाई की विश्वसनीय सुविधा प्राप्त होगी।

  7. क्या इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा?

    हाँ, वित्तीय विवादों के समाधान से जलविद्युत परियोजनाओं का संचालन बेहतर होगा और ऊर्जा उत्पादन क्षमता का पूर्ण दोहन होगा।

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