Immersive Language Museum – भारत का पहला इमर्सिव लैंग्वेज म्यूजियम बना ‘शब्दलोक’, जानिए म्यूजियम की प्रमुख विशेषताएं
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के ऐतिहासिक राष्ट्रीय पुस्तकालय (नेशनल लाइब्रेरी) परिसर में भारत के पहले अनूठे शब्द और भाषा संग्रहालय (Immersive Language Museum) ‘शब्दलोक’ का उद्घाटन किया।
भारत के पहले भाषा संग्रहालय (Immersive Language Museum) के बारे में:
- परिचय: ‘शब्दलोक’ (म्यूजियम ऑफ वर्ड) भारत का पहला ऐसा अत्याधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत संग्रहालय है, जो देश की अमूर्त भाषाई संपदा को डिजिटल रूप में जीवंत करता है.
- स्थान: यह ऐतिहासिक बेल्वेडियर एस्टेट (Belvedere Estate) के भीतर राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर (National Library Campus), कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है.
- लागत (Cost): इस परियोजना के प्रथम चरण के विकास पर कुल ₹41 करोड़ की वित्तीय राशि खर्च की गई है.
- गठन चरण: इसके पहले चरण में कुल 9 अत्याधुनिक गैलरी (Galleries) बनाई गई हैं, जो भारतीय भाषाओं के क्रमिक विकासक्रम को दर्शाती हैं.
- नोडल मंत्रालय: यह पूरी परियोजना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) के तत्वावधान और मार्गदर्शन में तैयार की गई है.
- निर्माणकर्ता: इसे राष्ट्रीय पुस्तकालय (National Library) प्रशासनिक निकाय द्वारा विकसित और डिजाइन किया गया है.
प्रमुख विशेषताएं जो इसे खास बनाती हैं:
- इंटरैक्टिव टाइमलाइन (Interactive Language Timeline): आगंतुक आधुनिक मोशन-सेंसिंग तकनीकों के माध्यम से भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं के मौखिक युग से लेकर डिजिटल युग तक के सफर को लाइव देख सकते हैं.
- होलोग्राफिक प्रदर्शन (Holographic Displays): प्राचीन लिपियों, जैसे पाणिनि के संस्कृत व्याकरण और ऋग्वैदिक काल के विकास को 3D होलोग्राम के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है.
- बहु-संवेदी अनुभव (Immersive Experience): दृश्य, श्रव्य और स्पर्शनीय (Audio-Visual-Tactile) माध्यमों का उपयोग कर अमूर्त भाषाई विरासत (Linguistic Heritage) को अनुभव-योग्य बनाया गया है.
- पांडुलिपि अभिलेख (Manuscript Collection): इसमें प्राचीन शिलालेख, ताम्रपत्र, भोजपत्र और दुर्लभ हस्तलिखित प्रतियों का एक समृद्ध डिजिटल एवं भौतिक संग्रह उपलब्ध कराया गया है.
- होलोग्राफिक विजुअलाइजेशन (Holographic Visualization): संग्रहालय के मुख्य कक्ष में भारत की सभी 6 शास्त्रीय भाषाओं (तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओडिया) के उद्गम और उनके महाकाव्यों को होलोग्राम के माध्यम से जीवंत किया गया है।
- ध्वनि और लोक परंपरा दीर्घा (Oral Traditions Gallery): देश के हर कोने की विभिन्न क्षेत्रीय बोलियों, लोक कथाओं और माताओं की पारंपरिक लोरियों को मूल ध्वनियों में संरक्षित किया गया है.
- डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation): इसमें 1 लाख से अधिक प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण पांडुलिपियों को पूरी तरह डिजिटल प्रारूप (Digitization) में बदलने की उन्नत व्यवस्था की गई है.
- सांस्कृतिक पुनरुत्थान केंद्र (Cultural Renaissance Hub): यह केंद्र नई पीढ़ी को भारत के भाषाई अंतर्संबंधों और सांस्कृतिक संप्रभुता से परिचित कराने के लिए एक मार्गदर्शक स्तंभ (Prakash Stambh) के रूप में कार्य करता है.
भारत के 10 अन्य प्रमुख विशिष्ट संग्रहालय (Top 10 Unique Museums of India):
- भारतीय संग्रहालय (Indian Museum), कोलकाता: वर्ष 1814 में स्थापित यह एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे बड़ा बहु-विषयक संग्रहालय है, जो दुर्लभ पुरातात्विक जीवाश्मों और कलाकृतियों का संरक्षण करता है.
- राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (National Rail Museum), नई दिल्ली: यह देश के लौह-पथ परिवहन के 160 से अधिक वर्षों के ऐतिहासिक इंजनों और रेल विकास के सफर को प्रदर्शित करता है.
- सालार जंग संग्रहालय (Salar Jung Museum), हैदराबाद: यह एक ही व्यक्ति द्वारा एकत्रित की गई प्राचीन घड़ियों, कीमती कलाकृतियों और मूर्तियों का विश्व का सबसे बड़ा एकल संग्रह संस्थान है.
- विरासत-ए-खालसा (Virasat-e-Khalsa), आनंदपुर साहिब: अत्याधुनिक मीडिया तकनीकों के माध्यम से सिख धर्म के 500 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को दर्शाने वाला प्रमुख केंद्र है.
- राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya), भोपाल: यह पूरी तरह से मानव विज्ञान को समर्पित है, जो भारत के स्वदेशी जनजातीय समुदायों के क्रमिक विकास को प्रदर्शित करता है.
- कैलिको वस्त्र संग्रहालय (Calico Museum of Textiles), अहमदाबाद: यह भारत के पारंपरिक हस्तनिर्मित कपड़ों, शाही पोशाकों और बुनाई कला की ऐतिहासिक शैलियों का अनूठा वैश्विक केंद्र है.
- नेपियर संग्रहालय (Napier Museum), तिरुवनंतपुरम: अपनी विशिष्ट इंडो-सरैसेनिक वास्तुकला शैली के लिए प्रसिद्ध यह संग्रहालय प्राचीन कांस्य मूर्तियों और नक्काशीदार लकड़ी के कलात्मक रथों के लिए जाना जाता.
- सरकारी संग्रहालय और कला दीर्घा (Government Museum), चंडीगढ़: यह गांधार कला शैली की प्राचीन बौद्ध मूर्तियों और प्रागैतिहासिक काल के दुर्लभ जीवाश्मों के संरक्षण के लिए विख्यात है.
- छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (CSMVS), मुंबई: पूर्व में प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम के नाम से प्रसिद्ध यह संस्थान सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों और प्राचीन लघु चित्रों का मुख्य संरक्षक है.
- राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA), नई दिल्ली: यह संस्कृति मंत्रालय के तहत 1850 के बाद की आधुनिक और समकालीन भारतीय दृश्य कलाकृतियों को प्रदर्शित करने वाला भारत का शीर्ष संस्थान है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत का पहला इमर्सिव लैंग्वेज म्यूजियम कहाँ स्थापित किया गया है?
उत्तर: भारत का पहला इमर्सिव लैंग्वेज म्यूजियम (India Language Museum) ‘शब्दलोक’ कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय (नेशनल लाइब्रेरी) परिसर में स्थापित किया गया है.
प्रश्न 2: शब्दलोक का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से भारत की समृद्ध भाषाई विविधता, मौखिक लोक परंपराओं और लिखित ऐतिहासिक पांडुलिपियों का व्यापक भाषा संरक्षण करना है.
प्रश्न 3: इस संग्रहालय में कौन-कौन सी भाषाओं को प्रदर्शित किया जाएगा?
उत्तर: इस संग्रहालय में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की अनेक बोलियों, लोक परंपराओं और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 आधिकारिक भाषाओं को प्रदर्शित किया जाएगा.
प्रश्न 4: इमर्सिव तकनीक से आगंतुकों को क्या अनुभव मिलेगा?
उत्तर: आगंतुकों को डिजिटल डिस्प्ले, 3D होलोग्राम और मोशन-सेंसिंग तकनीकों के माध्यम से भाषाओं के उद्गम और विकास का एक सजीव और बहु-संवेदी गहन सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा.भावना कम है.
