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PARIVARTAN Scheme – दिल्ली में परिवर्तन योजना को मिली मंजूरी, राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद 

PARIVARTAN Scheme – दिल्ली में परिवर्तन योजना को मिली मंजूरी, राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद 

PARIVARTAN Scheme

संदर्भ:

हाल ही में दिल्ली कैबिनेट (Delhi Cabinet) ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण (Air Pollution) पर प्रभावी नियंत्रण हेतु केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘परिवर्तन’ योजना (PARIVARTAN Scheme) को मंजूरी दी। 

‘परिवर्तन’ योजना (PARIVARTAN Scheme Details) क्या हैं?

  • परिचय: यह दिल्ली-एनसीआर में पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनके स्थान पर स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की एक प्रोत्साहन-आधारित स्क्रैपेज नीति (Vehicle Scrappage Policy) है.
  • पूरा नाम: ‘परिवर्तन’ का पूर्ण रूप ‘प्रोग्राम फॉर एक्सेलरेटेड रिन्यूअल एंड इंसेंटिवाइजेशन ऑफ व्हीकल एसेट्स फॉर रिड्यूसिंग ट्रांसपोर्ट एयर पॉल्यूशन एंड नेटवर्क एमिशन’ (Programme for Accelerated Renewal and Incentivisation of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions) है. 
  • लागू: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को 3 जून 2026 को मंजूरी दी गई थी।
    • इसके विस्तृत परिचालन दिशानिर्देशों को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा 16 जुलाई 2026 को हरी झंडी दी गई. 
    • दिल्ली सरकार ने इसे 20 जुलाई 2026 को अपनी कैबिनेट में स्वीकृत किया. 
  • मंत्रालय: इस योजना का क्रियान्वयन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways – MoRTH) द्वारा किया जाएगा.
    • इसकी वित्तीय व्यवस्था और क्षेत्रीय समन्वय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (National Capital Region Planning Board – NCRPB) के माध्यम से संचालित होगा.
  • कुल बजट: इस पर्यावरण और सार्वजनिक सेवा सुधार (Public Service Reform) योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹9,585 करोड़ निर्धारित है.
    • कुल बजट में से केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष बजटीय सहायता ₹5,041 करोड़ है.
  • लक्षित वाहन: यह योजना मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत लगभग 2.07 लाख ट्रक और बस स्वामियों को सीधे लाभान्वित करेगी. इसके तहत निम्नलिखित श्रेणियों को शामिल किया गया है: 
  • भारत स्टेज-IV (BS-IV) या उससे पुराने हल्के मालवाहक वाहन (LGVs).
  • मध्यम मालवाहक वाहन (MGVs) और भारी मालवाहक वाहन (HGVs).
  • पुरानी प्रदूषण फैलाने वाली वाणिज्यिक बसें.
  • वित्तीय प्रोत्साहन: पुराने वाहनों के प्रतिस्थापन (Replacement) को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार आकर्षक राजकोषीय लाभ प्रदान कर रही है:
  • कर एवं शुल्क माफी: नए वाहन की खरीद पर 10 वर्ष के लिए 100% मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में छूट और पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) की पूर्ण माफी.
  • ब्याज सब्सिडी: नए वाहन के ऋण पर 5% की ब्याज सहायता (Interest Subvention) प्रदान की जाएगी.
  • निर्माता छूट (OEM Discount): प्रमुख मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) द्वारा नए वाहनों की एक्स-शोरूम कीमत पर न्यूनतम 8% की सीधी छूट दी जाएगी.
  • ईधन कूपन व नकद सहायता: डीजल/सीएनजी वाहनों के लिए मासिक फ्यूल वाउचर तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के प्रतिस्थापन पर एकमुश्त वित्तीय सहायता.
  • बकाया देनदारियों से मुक्ति: स्क्रैपिंग के लिए चुने गए पात्र पुराने वाहनों के पिछले बकाया रोड टैक्स और फिटनेस पेनाल्टी को पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा.
  • लचीली स्क्रैपेज नीति: यदि पुराने वाहन को एनसीआर से बाहर गैर-एनसीएपी (Non-NCAP) शहरों में बेचा जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से स्क्रैप करना आवश्यक नहीं होगा.
  • दिल्ली विशिष्ट नियम: इस योजना के तहत दिल्ली में खरीदे जाने वाले सभी हल्के मालवाहक वाहन अनिवार्य रूप से केवल इलेक्ट्रिक (EV) होंगे. 
  • एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म: लाभों के त्वरित वितरण के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है जो वाहन (VAHAN) पोर्टल, वी-स्क्रैप (V-Scrap) और डिजी-ईएलवी (DigiELV) प्रणालियों के साथ वास्तविक समय में जुड़ा हुआ है.
  • वित्तीय पारदर्शिता: सभी सब्सिडी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजे जाएंगे. 

राष्ट्रीय एवं पर्यावरणीय महत्व:

  • वायु गुणवत्ता सूचकांक में गुणात्मक सुधार (Improvement in Air Quality Index): दिल्ली-एनसीआर में शीतकाल के दौरान पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर खतरनाक हो जाता है. व्यावसायिक बेड़े से पुराने भारी वाहनों को हटाने से जहरीले धुएं और नेटवर्क उत्सर्जन में भारी कमी आएगी.
  • हरित गतिशीलता को बढ़ावा (Driving Clean Mobility): यह योजना दिल्ली की ‘इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति 2026’ (Delhi EV Policy 2026) के लक्ष्यों को गति देगी. यह हल्के मालवाहकों के पूर्ण विद्युतीकरण को बढ़ावा देकर देश के नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्यों के अनुकूल है.
  • कमर्शियल फ्लीट का आधुनिकीकरण (Modernisation of Commercial Fleet): वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से छोटे ट्रांसपोर्टरों को अपनी पुरानी गाड़ियों को उन्नत भारत स्टेज-VI (BS-VI) मानकों में बदलने का अवसर मिलेगा, जिससे रसद क्षेत्र (Logistics Sector) की दक्षता बढ़ेगी.
  • सर्कुलर इकोनॉमी को सुदृढ़ता (Strengthening Circular Economy): वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से अधिकृत स्क्रैपेज केंद्रों पर नष्ट करने से ऑटोमोबाइल स्क्रैप मेटल का पुनर्चक्रण बढ़ेगा, जिससे कच्चे माल की लागत कम होगी और पर्यावरण अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित होगा.
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य लागत में कमी (Reduction in Public Health Cost): वायु प्रदूषण जनित तीव्र और क्रॉनिक श्वसन रोगों के मामलों में कमी आने से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा तथा स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: PARIVARTAN योजना क्या है?

उत्तर: यह दिल्ली-एनसीआर में परिवहन जनित वायु प्रदूषण (Air Pollution) को नियंत्रित करने के लिए पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों को बदलने की एक प्रोत्साहन-आधारित केंद्रीय योजना है. 

प्रश्न 2: दिल्ली सरकार ने PARIVARTAN योजना को क्यों मंजूरी दी?

उत्तर: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पुराने भारी वाहनों के उत्सर्जन को रोककर सर्दियों के प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इसे मंजूरी दी है. 

प्रश्न 3: इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा?

उत्तर: इसका सीधा लाभ दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 2.07 लाख वाणिज्यिक ट्रक और बस मालिकों को मिलेगा जो अपने पुराने वाहनों को प्रतिस्थापित करना चाहते हैं. 

प्रश्न 4: योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य BS-IV या उससे पुराने भारी व्यावसायिक वाहनों को सड़कों से हटाकर उनकी जगह स्वच्छ ईंधन (BS-VI सीएनजी या इलेक्ट्रिक) वाहनों के उपयोग को तेज करना है.

प्रश्न 5: PARIVARTAN योजना कब लागू होगी?

उत्तर: यह योजना केंद्र सरकार और दिल्ली कैबिनेट की मंजूरी तथा परिचालन दिशानिर्देश जारी होने के बाद जुलाई 2026 से जमीनी स्तर पर लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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