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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR): परिचय, संरचना, नियुक्ति एवं शक्तियां

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR): परिचय, संरचना, नियुक्ति एवं शक्तियां

NCPCR

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights – NCPCR) ने एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाकर 3,800 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR): 

  • परिचय: NCPCR भारत सरकार का एक शीर्ष वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जो देश में बाल अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और रक्षा के लिए समर्पित है।
  • गठन: इसका गठन 5 मार्च 2007 को किया गया था।
  • कानूनी आधार: यह आयोग बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (Commission for Protection of Child Rights Act 2005) के तहत स्थापित किया गया है।
  • नोडल मंत्रालय: यह प्रशासनिक रूप से भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) के अधीन कार्य करता है।
  • आवश्यकता: भारत में बड़ी बाल आबादी को देखते हुए बाल श्रम, मानव तस्करी, बाल विवाह और यौन शोषण जैसी कुरीतियों से निपटने के लिए एक समर्पित निकाय की आवश्यकता थी। यह आयोग संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (UNCRC) के सिद्धांतों के अनुरूप काम करता है।
  • संरचना: अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैं:
  • एक अध्यक्ष (NCPCR Chairman): बाल कल्याण को बढ़ावा देने के लिए असाधारण कार्य करने वाला एक प्रतिष्ठित व्यक्ति।
  • छह सदस्य (NCPCR Members): विभिन्न क्षेत्रों (जैसे बाल स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल श्रम उन्मूलन, बाल मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और बाल कानून) के विशेषज्ञ। इन छह सदस्यों में से कम से कम दो महिला सदस्य होना अनिवार्य है।
  • एक सदस्य सचिव: भारत सरकार के संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी।
  • नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
    • अध्यक्ष का चयन महिला एवं बाल विकास मंत्री की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर होता है।
  • कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्य 3 वर्ष की अवधि या क्रमशः 65 वर्ष (अध्यक्ष के लिए) और 60 वर्ष (सदस्यों के लिए) की आयु (जो भी पहले हो) तक पद पर बने रहते हैं। कोई भी सदस्य अधिकतम दो कार्यकालों के लिए ही नियुक्त हो सकता है।
  • कार्य:
    • कानूनी समीक्षा: बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए लागू कानूनों की समीक्षा करना और प्रभावी क्रियान्वयन की सिफारिश करना।
    • विशेष कानूनों की निगरानी: यह आयोग पोक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के कार्यान्वयन की निगरानी करने वाली नोडल एजेंसी है।
    • शिकायतों की जांच: बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की स्वतः संज्ञान (Suo Motu) या शिकायतों के आधार पर जांच करना।
    • जागरूकता प्रसार: समाज के विभिन्न वर्गों में बाल सुरक्षा (Child Protection India) और बाल कल्याण (Child Welfare India) के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
  • शक्तियां: जांच करते समय अधिनियम की धारा 14 के तहत आयोग को सिविल कोर्ट (Civil Court) की निम्नलिखित शक्तियां प्राप्त हैं:
  • किसी भी व्यक्ति को समन (Summon) जारी करना और उसे उपस्थित होने के लिए बाध्य करना।
  • किसी भी दस्तावेज की खोज और उसे प्रस्तुत करने का आदेश देना।
  • हलफनामे पर सबूत प्राप्त करना और किसी भी अदालत या कार्यालय से सार्वजनिक रिकॉर्ड की प्रति मांगना।
  • सीमा: आयोग स्वयं कोई सजा नहीं दे सकता, लेकिन यह जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सरकार या न्यायालय को कानूनी कार्रवाई या पीड़ित के लिए अंतरिम राहत (Interim Relief) की सिफारिश कर सकता है।
  • उपलब्धियां: 
    • आयोग ने बाल विवाह और शोषण की शिकायतों के लिए ‘घार’ (GHAR – Go Home and Re-Unite) पोर्टल और ‘मासी’ (MASI) एप्लीकेशन विकसित किया है ताकि बाल सुधार गृहों की रीयल-टाइम निगरानी की जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: National Commission for Protection of Child Rights क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: यह बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए स्थापित एक शीर्ष वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में बाल अनुकूल नीतियों को सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 2: NCPCR India का गठन किस कानून के तहत किया गया है?

उत्तर: इसका गठन संसद द्वारा पारित बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (CPCR Act 2005) के कानूनी प्रावधानों के तहत वर्ष 2007 में किया गया था।

प्रश्न 3: NCPCR composition में Chairman और members की संख्या कितनी होती है?

उत्तर: इस बाल अधिकार आयोग (Child Rights Commission) में एक अध्यक्ष और छह सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें से कम से कम दो महिला सदस्य होना अनिवार्य है।

प्रश्न 4: NCPCR appointment की प्रक्रिया क्या है और members को कौन नियुक्त करता है?

उत्तर: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च स्तरीय तीन-सदस्यीय चयन समिति (Selection Committee) की सिफारिशों के आधार पर की जाती है।

प्रश्न 5: NCPCR powers क्या हैं और Commission किन मामलों में कार्रवाई कर सकता है?

उत्तर: आयोग के पास जांच के लिए सिविल कोर्ट (Civil Court) की शक्तियां हैं। यह बाल श्रम, यौन शोषण और शिक्षा से वंचना जैसी शिकायतों पर स्वतः संज्ञान ले सकता है।

प्रश्न 6: NCPCR functions में child rights protection के कौन-कौन से कार्य शामिल हैं?

उत्तर: इसमें पोक्सो (POCSO) और आरटीई (RTE) कानूनों की निगरानी, उल्लंघन मामलों की जांच, नीतिगत सिफारिशें और जन-जागरूकता फैलाना जैसे बाल कल्याण (Child Welfare) कार्य शामिल हैं।

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