Supreme Court Amendment Bill – न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने हेतु लोकसभा में पेश किया गया SC संशोधन विधेयक 2026
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 (Supreme Court Amendment Bill 2026) पेश किया। यह विधेयक मई 2026 में जारी राष्ट्रपति के अध्यादेश का स्थान लेगा।
Supreme Court Amendment Bill 2026 के मुख्य बिंदु:
- न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि (Increase in Sanctioned Strength of Judges): इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 (भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित) करना है.
- अधिनियम में संशोधन: इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 (The Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956) की धारा 2 में संशोधन किया जाएगा.
- मूल कानून में ‘तैंतीस’ (33) शब्द के स्थान पर अब ‘सैंतीस’ (37) प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल नहीं हैं.
- अध्यादेश का प्रतिस्थापन (Replacement of the Ordinance): यह प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 16 मई 2026 को प्रख्यापित ‘सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ (No. 1 of 2026) को स्थायी विधिक रूप देने के लिए लाया गया है.
- विधायी प्रक्रिया:
- साधारण बहुमत: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति प्राप्त है.
- संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं: चूंकि यह एक वैधानिक कानून (Statutory Law) में संशोधन है, इसलिए इसके लिए किसी औपचारिक संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) की आवश्यकता नहीं है.
- इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है.
विधेयक का महत्व:
- लंबित मामलों के भारी बोझ का समाधान (Addressing the Backlog of Cases): नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court India) में वर्तमान में 92,385 से अधिक मामले लंबित हैं. न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से इन मुकदमों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी.
- संविधान पीठों का सुचारू गठन (Efficient Constitution Benches): गंभीर संवैधानिक व्याख्या से जुड़े मामलों के लिए कम से कम 5 या अधिक जजों की पीठ (Constitution Benches) की आवश्यकता होती है. अतिरिक्त न्यायाधीशों की उपलब्धता से नियमित अपीलीय मामलों को प्रभावित किए बिना कई संविधान पीठें एक साथ काम कर सकेंगी.
- न्यायिक दक्षता में सुधार (Enhancing Court Administration): अधिक न्यायाधीश होने से प्रति न्यायाधीश मामलों का कार्यभार (Case Load) कम होगा, जिससे न्यायालय अधिक प्रभावी और सक्षम (Efficient and Effective) तरीके से कार्य कर सकेगा तथा निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार होगा.
- छह वर्षों के अंतराल की समाप्ति (Ending a Six-Year Hiatus): शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या में अंतिम बार वर्ष 2019 में संशोधन (31 से बढ़ाकर 34) किया गया था. यह छह वर्ष बाद समय की मांग के अनुरूप किया गया एक आवश्यक विस्तार है.
- न्याय वितरण में तेजी (Accelerating Delivery of Justice): जजों की कमी के कारण होने वाले विलंब में कमी आएगी, जिससे नागरिकों के ‘त्वरित न्याय के अधिकार’ (Right to Speedy Justice) को मजबूती मिलेगी, जो अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा है.
- विदेशी निवेश और व्यापार सुगमता (Boosting Ease of Doing Business): वाणिज्यिक विवादों (Commercial Disputes) के सर्वोच्च स्तर पर रुके रहने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा डगमगाता है. तीव्र न्यायिक प्रणाली से भारत में व्यापार सुगमता और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा.
- संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा (Safeguarding Institutional Autonomy): स्वीकृत पदों को बढ़ाकर और रिक्तियों को तुरंत भरकर न्यायपालिका कार्यपालिका के हस्तक्षेप के बिना अपने आंतरिक प्रशासनिक संतुलन और कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकती है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
उत्तर: यह संसद का एक विधेयक (Parliament Bill) है जो सुप्रीम कोर्ट (Number of Judges) Act, 1956 में संशोधन कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करता है.
प्रश्न 2: इस विधेयक को लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court India) में लंबित मामलों (Backlog) की संख्या बढ़कर 92,385 तक पहुँच गई है, जिसके त्वरित निपटारे के लिए यह विस्तार आवश्यक था.
प्रश्न 3: इस विधेयक में क्या प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं?
उत्तर: इसके तहत मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों (Puisne Judges) की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 हो जाएगी.
प्रश्न 4: क्या इस विधेयक से न्यायपालिका पर प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: हाँ, इससे अदालती प्रशासन (Court Administration) अधिक सुदृढ़ होगा, जजों पर काम का बोझ कम होगा और संवैधानिक पीठों का गठन आसान हो जाएगा.
प्रश्न 5: इस विधेयक को लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी?
उत्तर: यह साधारण विधिक सुधार (Legal Reforms) है, जिसे संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति से लागू किया जाएगा
