Cauvery Water Dispute – जानिए क्या है यह विवाद जिसे सुलझाने हेतु CWMA की बैठक हुई आयोजित?
संदर्भ:
हाल ही में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की 53वीं महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी से उत्पन्न मौजूदा जल संकट (Water Crisis) कावेरी जल विवाद (Cauvery Water Dispute) को सुलझाना था।
कावेरी जल विवाद (Cauvery Water Dispute) क्या हैं?
- भौगोलिक पृष्ठभूमि: कावेरी जल विवाद (Cauvery Water Dispute) मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चलने वाला एक सदी पुराना अंतर राज्ययी जल विवाद (Interstate Water Dispute) है.
- कावेरी बेसिन (Cauvery Basin) में केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी भी अन्य दो छोटे हितधारक हैं.
- कावेरी नदी कर्नाटक के कोडागु जिले में तलकावेरी (Talakaveri) से निकलकर तमिलनाडु से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है.
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- औपनिवेशिक समझौते (1892 और 1924): इस विवाद की जड़ें तत्कालीन मैसूर रियासत (वर्तमान कर्नाटक) और मदरास प्रेसिडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के बीच ब्रिटिश काल में हुए समझौतों में हैं. वर्ष 1924 का समझौता 50 वर्षों के लिए वैध था, जो 1974 में समाप्त हो गया.
- स्वतंत्रता के बाद का संकट: वर्ष 1974 के बाद कर्नाटक ने निचली धारा वाले राज्य तमिलनाडु की सहमति के बिना नदी पर नए जलाशयों का निर्माण और पानी मोड़ना शुरू कर दिया.
- दोनों पक्षों के दावे:
- कर्नाटक का पक्ष: कर्नाटक का तर्क है कि कावेरी नदी (Cauvery River) का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) उसके राज्य में है. वह बढ़ते शहरीकरण, पेयजल आवश्यकताओं (विशेषकर बेंगलुरु शहर के लिए) और रबी फसलों की सिंचाई के आधार पर पानी के ‘समान बंटवारे’ की मांग करता है.
- कर्नाटक का तर्क है कि 1924 का ब्रिटिश-युग का समझौता उसके साथ अन्यायपूर्ण था और उसे अपनी बढ़ती आबादी और कृषि के लिए पानी का उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
- तमिलनाडु का पक्ष: तमिलनाडु ऐतिहासिक प्रेसिडेंट समझौतों और अपने उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र में लाखों किसानों की आजीविका का हवाला देता है. उसका दावा है कि उसकी कृषि व्यवस्था सदियों से इस पानी पर निर्भर है, इसलिए उसके हिस्से में कटौती नहीं की जानी चाहिए.
- कर्नाटक का पक्ष: कर्नाटक का तर्क है कि कावेरी नदी (Cauvery River) का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) उसके राज्य में है. वह बढ़ते शहरीकरण, पेयजल आवश्यकताओं (विशेषकर बेंगलुरु शहर के लिए) और रबी फसलों की सिंचाई के आधार पर पानी के ‘समान बंटवारे’ की मांग करता है.
- समितियां और कानूनी समाधान:
- कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT): बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2 जून 1990 को न्यायाधिकरण (Cauvery Tribunal) का गठन किया. CWDT ने वर्ष 2007 में अपना अंतिम निर्णय सुनाया.
- सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (2018): फरवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नदी को ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ घोषित किया. कोर्ट ने बेंगलुरु की वैश्विक पेयजल आवश्यकताओं को देखते हुए कर्नाटक का हिस्सा 14.75 TMC बढ़ा दिया और तमिलनाडु के हिस्से में उतनी ही कटौती कर दी.
- वर्तमान स्थिति: सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के अनुसार, एक सामान्य मानसून वर्ष (Normal Year) में कावेरी बेसिन की कुल 740 TMC उपलब्ध जलराशि का राज्यवार अंतिम आवंटन इस प्रकार तय किया गया है:
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (Riparian States) | जल आवंटन (TMC में) |
| तमिलनाडु (Tamil Nadu) | 404.25 |
| कर्नाटक (Karnataka) | 284.75 |
| केरल (Kerala) | 30.00 |
| पुडुचेरी (Puducherry) | 7.00 |
| पर्यावरणीय प्रवाह और समुद्र प्रवाह | 14.00 |
- मौजूदा विवाद:
- मानसून की कमी (Deficient Rainfall): वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी कमी के कारण कर्नाटक के जलग्रहण क्षेत्रों में 36% कम वर्षा दर्ज की गई है. इससे जलाशयों में इनफ्लो बहुत कम हो गया है.
- शॉर्टफॉल (Shortfall): निर्धारित मासिक कोटा के अनुसार कर्नाटक को जून से सितंबर के बीच तमिलनाडु को पानी छोड़ना होता है, लेकिन 22 जुलाई 2026 तक 24.9 TMC जल की कमी (Shortfall) देखी गई है.
- संकट साझाकरण फॉर्मूला (Distress Sharing Formula): वर्तमान में विवाद का सबसे बड़ा कारण यह है कि कम वर्षा या सूखे (Drought) के वर्षों में पानी की कमी को आपस में कैसे साझा किया जाए, इसके लिए कोई निश्चित और वैज्ञानिक ‘संकट साझाकरण फॉर्मूला’ मौजूद नहीं है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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कावेरी जल विवाद क्या है?
यह कावेरी नदी (Cauvery River) के पानी के सिंचाई और पेयजल उपयोग के लिए राज्यों के बीच चल रहा एक अंतर-राज्यीय जल संघर्ष (River Water Sharing) है.
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कावेरी जल विवाद किन राज्यों के बीच है?
यह विवाद मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच है, जिसमें केरल और पुडुचेरी भी अन्य छोटे भागीदार हैं.
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कावेरी नदी का जल बंटवारा कैसे होता है?
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेशानुसार सामान्य वर्ष में तमिलनाडु को 404.25 TMC और कर्नाटक को 284.75 TMC जल आवंटित किया जाता है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी विवाद पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कावेरी को राष्ट्रीय संपत्ति माना और पेयजल संकट के आधार पर कर्नाटक का हिस्सा 14.75 TMC बढ़ा दिया.
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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) क्या है?
यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक स्थायी निकाय (Permanent Mechanism) है, जो राज्यों के बीच पानी के वास्तविक क्रियान्वयन की निगरानी करता है.
