AI Powered Bird Sanctuary – मुंबई में बनेगा भारत का पहला AI संचालित पक्षी अभयारण्य
संदर्भ:
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) को बढ़ावा देने के लिए भारत के पहले AI संचालित पक्षी अभयारण्य (AI Powered Bird Sanctuary) के निर्माण की घोषणा की.
AI संचालित पक्षी अभयारण्य (AI Powered Bird Sanctuary) के बारे में:
- परिचय: AI संचालित पक्षी अभयारण्य एक ऐसा स्मार्ट अभयारण्य (Smart Sanctuary) है, जहाँ पारंपरिक मानव-जनित सर्वेक्षणों के स्थान पर उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम (Machine Learning Algorithms) का उपयोग पक्षियों की प्रजातियों की रीयल-टाइम पहचान, ट्रैकिंग और उनके स्वास्थ्य की निगरानी हेतु किया जाता है.
- आवश्यकता: पारंपरिक वन्यजीव निगरानी (Wildlife Monitoring) विधियाँ जैसे दूरबीन से देखना और शारीरिक गणना करना बेहद श्रमसाध्य हैं और इनमें मानवीय त्रुटि की संभावना अधिक होती है.
- मुंबई जैसे घने शहरी परिवेश के निकट मानव-पक्षी संघर्ष को कम करने, अवैध शिकार रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) के प्रवासी पक्षियों के बदलते प्रवासन पैटर्न को सूक्ष्मता से समझने के लिए डिजिटल तकनीक की अत्यधिक आवश्यकता थी.
- परियोजना का नाम: इस महत्वाकांक्षी पहल को भांडुप बर्ड पार्क परियोजना (Bhandup Bird Park Project) नाम दिया गया है
- स्थान: यह मुंबई उपनगर में अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल (Ramsar Site) ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य (Thane Creek Flamingo Sanctuary) के तट पर भांडुप पंपिंग स्टेशन के पास विकसित किया जा रहा है.
- कुल क्षेत्रफल: यह परियोजना लगभग 20.09 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत होगी.
- न्यूनतम हस्तक्षेप: पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कुल क्षेत्र में से केवल 0.35 हेक्टेयर भूमि का उपयोग ही पर्यटकों के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाएगा.
- कुल लागत: मुंबई जिला योजना समिति के विशेष कोष से इस परियोजना के लिए ₹45 करोड़ आवंटित किए गए हैं.
- निकाय: यह परियोजना महाराष्ट्र पर्यावरण और वन विभाग के अंतर्गत कार्यान्वित हो रही है.
- इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) की मंजूरी और महाराष्ट्र इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है.
- विशेषताएं:
- AI-आधारित ट्रैकिंग केंद्र: अभयारण्य के 1.5 किलोमीटर के दायरे में अत्याधुनिक इंटेलिजेंट कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे.
- स्वचालित प्रजाति पहचान: कैमरे पक्षियों के पंखों के पैटर्न, उड़ने की शैली और आकार का विश्लेषण करके बिना किसी मानवीय सहायता के उनकी सटीक प्रजाति की पहचान (Automated Identification) कर लेंगे.
- ध्वनिक सेंसर नेटवर्क (Acoustic Sensors): अभयारण्य में स्थापित विशेष माइक पक्षियों की आवाज़ (Vocal Calls) रिकॉर्ड करेंगे, जिससे घने मैंग्रोव में छिपे पक्षियों की पहचान भी उनके कलरव से संभव होगी.
- पर्यटक अवसंरचना: पर्यावरण-पर्यटन के लिए 2.16 किमी लंबा मैंग्रोव वॉकवे, बहु-स्तरीय वॉच टावर, बर्ड-वाचिंग डेक, तितली उद्यान और हाई-रिज़ॉल्यूशन वाली डिजिटल अवलोकन स्क्रीन शामिल होंगी.
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्यों में AI संचालित वर्तमान पहलें (Current AI Initiatives in Indian National Parks):
- प्रोजेक्ट टाइगर और ई-बर्ड (E-Eye System): कॉर्बेट नेशनल पार्क और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की अवैध निगरानी और शिकारियों को रोकने के लिए थर्मल कैमरों और AI-सक्षम ई-आई (E-Eye) सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है.
- लगभग 70 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र को कवर करते हुए यह कैमरे रात के अंधेरे या घने कोहरे में भी शरीर की गर्मी (heat signatures) के आधार पर इंसानों और वन्यजीवों की पहचान करते हैं.
- हाथियों की सुरक्षा के लिए ‘गजराज प्रणाली’: भारतीय रेलवे ने असम और पश्चिम बंगाल के वन क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही का पता लगाने के लिए AI-संचालित ऑप्टिकल फाइबर सेंसर तकनीक शुरू की है, जिससे ट्रेन दुर्घटनाओं को रोका जा सके.
- जब कोई हाथी ट्रैक के 200 मीटर के दायरे में आता है, तो उसके चलने से होने वाले कंपन को केबल के जरिए डिटेक्ट किया जाता है.
- साउंडस्केप इकोलॉजी: पश्चिमी घाट के कुछ संरक्षित क्षेत्रों में वनों की कटाई और अवैध शिकार की आवाज़ों (जैसे आरी या बंदूक की आवाज़) को तुरंत पकड़ने के लिए एआई क्लाउड-आधारित ध्वनिक उपकरणों का परीक्षण किया जा रहा है.
महत्व:
- सटीक जैव विविधता दस्तावेजीकरण (Accurate Biodiversity Documentation): ठाणे क्रीक क्षेत्र लगभग 250 देशी और विदेशी प्रवासी पक्षियों (जैसे लेसर और ग्रेटर फ्लेमिंगो) का घर है. AI तकनीक चौबीसों घंटे बिना थके डेटा एकत्र करेगी, जिससे देश का सबसे सटीक ‘एवियन डेटाबेस’ तैयार होगा.
- प्रवासन पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण (Analysis of Migration Patterns): जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों के आगमन और प्रस्थान के समय में आ रहे बदलावों का मशीन लर्निंग टूल के जरिए सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा, जो वैश्विक जलवायु शोध में मददगार होगा.
- शहरी पर्यावरण-पर्यटन का सतत मॉडल (Sustainable Eco-Tourism): मुंबई जैसे कंक्रीट के जंगल के बीच यह पार्क स्थानीय नागरिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक उत्कृष्ट पर्यावरण शिक्षा केंद्र (Environmental Education Centre) बनेगा, जिससे समाज में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी.
- न्यूनतम पारिस्थितिक व्यवधान (Minimal Ecological Disturbance): कैमरों और दूरस्थ सेंसरों के उपयोग से वन अधिकारियों को बार-बार पक्षियों के प्राकृतिक आवास (Mudflats and Mangroves) में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे पक्षियों का तनाव कम होगा और उनका प्रजनन चक्र सुरक्षित रहेगा.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत का पहला AI संचालित पक्षी अभयारण्य कहाँ स्थापित किया गया है?
उत्तर: भारत का पहला एआई संचालित पक्षी पार्क (AI Powered Bird Sanctuary) महाराष्ट्र के मुंबई उपनगर में भांडुप (ठाणे क्रीक) के पास स्थापित किया जा रहा है.
प्रश्न 2: AI तकनीक का उपयोग पक्षी संरक्षण में कैसे किया जाएगा?
उत्तर: इसके तहत एआई कैमरे और ध्वनिक सेंसर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पक्षियों की प्रजातियों की स्वचालित पहचान, वास्तविक समय में ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण करेंगे.
प्रश्न 3: इस परियोजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य ठाणे क्रीक में जैव विविधता का संरक्षण (Wildlife Conservation) करना, पक्षियों के प्रवासन पैटर्न को समझना और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना है.
प्रश्न 4: अभयारण्य में किन पक्षियों की निगरानी की जाएगी?
उत्तर: इस स्मार्ट अभयारण्य (Smart Sanctuary) में मुख्य रूप से फ्लेमिंगो (राजहंस) सहित लगभग 250 से अधिक स्थानीय और विदेशी प्रवासी पक्षियों की निगरानी की जाएगी.
प्रश्न 5: वन्यजीव संरक्षण में AI की क्या भूमिका है?
उत्तर: एआई (Artificial Intelligence) चौबीसों घंटे रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करता है, अवैध शिकार रोकता है, सटीक गणना करता है और वन्यजीव डेटा प्रबंधन को पारदर्शी बनाता है.
