BHAVYA Rasayan Yojna – तीन केमिकल पार्क स्थापित करने हेतु भव्य रसायन योजना को मिली मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में 24 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Approval) ने देश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ अर्थात् भव्य रसायन योजना (Bhavya Rasayan Yojana) को आधिकारिक मंजूरी दी।
भव्य रसायन योजना (Bhavya Rasayan Yojana) क्या है?
- परिचय: भव्य (BHAVYA) रसायन का पूर्ण रूप ‘Bharat Audyogik Vikas Yojana Rasayan’ है। यह देश के रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अभिकल्पित की गई एक विशेष विनिर्माण अवसंरचना योजना है।
- इस योजना की प्रारंभिक घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी, जिसे अब मंत्रिमंडल द्वारा क्रियान्वित कर दिया गया है।
- उद्देश्य: साझा बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से प्रति-इकाई उत्पादन लागत को कम करना।
- भारतीय रसायन उद्योग (India Chemicals) को वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) का एक प्रमुख केंद्र बनाना।
- फार्मास्यूटिकल्स, कृषि रसायनों और इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग होने वाले मध्यवर्ती रसायनों के आयात पर निर्भरता को न्यूनतम करना।
- कुल वित्तीय परिव्यय: इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुल ₹3,030 करोड़ का बजटीय आवंटन किया गया है।
- कुल राशि में से ₹3,000 करोड़ रासायनिक पार्कों के भीतर साझा भौतिक बुनियादी ढांचे और मुख्य उपयोगिताओं की स्थापना के लिए आवंटित किए गए हैं।
- योजना के प्रबंधन, निगरानी और सुचारू कार्यान्वयन के लिए ₹30 करोड़ निर्धारित हैं।
- समय सीमा: यह योजना चालू वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक (पाँच वर्षों की अवधि) के लिए सक्रिय रहेगी।
- मंत्रालय: यह योजना भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित होगी।
- रासायनिक पार्क फ्रेमवर्क:
- चैलेंज रूट (Challenge Route): योजना के तहत देश में तीन केमिकल पार्क स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इन तीन समर्पित पार्कों की स्थापना के लिए राज्यों का चयन एक पारदर्शी ‘चैलेंज-आधारित चयन प्रक्रिया’ के माध्यम से किया जाएगा, जहाँ राज्य निर्दिष्ट आर्थिक मानदंडों पर आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे।
- भूमि की आवश्यकता: प्रत्येक केमिकल पार्क (Chemical Park) के पास कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (न्यूनतम 2,000 एकड़) का सन्निहित (एक दूसरे से जुड़ा हुआ) और भार-मुक्त भूमि खंड होना अनिवार्य है।
- सहकारी वित्तीय मॉडल: केंद्र सरकार प्रत्येक चयनित पार्क के लिए अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक का वित्तीय अनुदान देगी। इसके लिए शर्त यह है कि संबंधित राज्य सरकार को उस पार्क के विकास में न्यूनतम ₹500 करोड़ का वित्तीय योगदान करना होगा।
- निवेश गुणांक प्रभाव (Multiplier Effect): सरकार का अनुमान है कि इन पार्कों में प्रत्येक केंद्र पर लगभग ₹20,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक का निजी घरेलू और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित होगा।
- बुनियादी ढांचा: ये औद्योगिक पार्क विनिर्माताओं को निम्नलिखित प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं (Plug-and-Play Utilities) प्रदान करेंगे:
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP): औद्योगिक अपशिष्ट जल के सामूहिक और सुरक्षित उपचार के लिए अत्याधुनिक साझा संयंत्र।
- ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (TSDF): खतरनाक रासायनिक अपशिष्टों के वैज्ञानिक भंडारण और सुरक्षित निपटान के लिए केंद्रीकृत बुनियादी ढांचा।
- औद्योगिक उपयोगिता नेटवर्क: एकीकृत विलायक पुनर्प्राप्ति (Solvent Recovery), सामूहिक भाप उत्पादन (Steam Generation) प्रणाली और परस्पर जुड़े हुए पाइपलाइन नेटवर्क।
- लॉजिस्टिक्स हब: कच्चे माल और तैयार उत्पादों के तीव्र परिवहन के लिए एकीकृत वेयरहाउसिंग और माल ढुलाई गलियारे।
महत्व:
- मूल्य श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: यह रासायनिक मिशन (Chemical Mission) कच्चे माल की सोर्सिंग (Upstream) से लेकर अंतिम डाउनस्ट्रीम उद्योगों और सहायक इकाइयों तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को एक ही भौगोलिक स्थान पर समेकित करेगा। इससे रसायनों की आंतरिक माल ढुलाई लागत (Logistics Cost) में भारी कमी आएगी।
- डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा: केमिकल सेक्टर (Chemical Sector) अर्थव्यवस्था का एक बुनियादी स्तंभ (Foundational Industry) है। इन पार्कों में उत्पादित होने वाले विशिष्ट रसायनों (Specialty Chemicals) और पेट्रोकेमिकल्स से निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा:
- कृषि (Agriculture): उन्नत कीटनाशकों और उर्वरकों की सुलभ उपलब्धता।
- फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals): दवाओं के निर्माण के लिए आवश्यक एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) का घरेलू उत्पादन।
- ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: उच्च गुणवत्ता वाले पॉलिमर, कोटिंग्स और इलेक्ट्रॉनिक रसायनों की स्थानीय आपूर्ति।
- अन्य उद्योग: कपड़ा (Textiles), न्यूट्रास्यूटिकल्स और विनिर्माण अवसंरचना।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास: केंद्रीकृत हानिकारक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना की स्थापना करके यह योजना भारत के सतत विकास लक्ष्यों (विशेष रूप से SDG 9: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा तथा SDG 12: जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) को प्राप्त करने में मदद करती है।
- यह पर्यावरण नियमों (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986) का अनुपालन कॉर्पोरेट जगत के लिए बेहद आसान और लागत-प्रभावी बना देगी।
- ‘मेक इन इंडिया’ और रोजगार सृजन: रसायन विनिर्माण (Chemical Manufacturing) क्षमता के इस विस्तार से कुशल और अर्ध-कुशल कार्यबल के लिए लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- यह विनिर्माण नीति भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य की ओर ले जाने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक साबित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भव्य रसायन योजना क्या है?
उत्तर: यह देश में तीन समर्पित विश्वस्तरीय रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए स्वीकृत ₹3,030 करोड़ की एक नई केंद्रीय औद्योगिक संवर्धन योजना है।
प्रश्न 2: इस योजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य घरेलू रासायनिक विनिर्माण (Chemical Manufacturing) क्षमता को बढ़ाना, आयात निर्भरता कम करना और वैश्विक बाजार में भारत की निर्यात हिस्सेदारी मजबूत करना है।
प्रश्न 3: कैबिनेट ने इसे क्यों मंजूरी दी?
उत्तर: भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने, उद्योगों की रसद (लॉजिस्टिक्स) लागत घटाने और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी।
प्रश्न 4: इससे रसायन उद्योग को क्या लाभ होगा?
उत्तर: उद्योगों को प्लग-एंड-प्ले मॉडल के तहत तैयार भूमि, साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), पाइपलाइन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी।
प्रश्न 5: क्या इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे?
उत्तर: हाँ, पार्कों में होने वाले ₹20,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ के बड़े निजी निवेश से रसायन क्षेत्र और उससे जुड़े सहायक उद्योगों में व्यापक रोजगार सृजित होंगे। [3, 13]
प्रश्न 6: योजना के तहत किन क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा?
उत्तर: इसके तहत पेट्रोकेमिकल्स, विशेष रसायन (Specialty Chemicals), थोक रसायन, और फार्मा व कृषि उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले मध्यवर्ती रसायनों के उत्पादन को तीव्र प्रोत्साहन मिलेगा।नाएंगी.
