Assam Heritage Sites Land Protection Bill – संशोधन, पात्रता, संरक्षित क्षेत्र के बारे मे विस्तार
संदर्भ:
हाल ही में असम विधानसभा (Assam Assembly) ने 29 जुलाई 2026 को असम विरासत स्थलों हेतु भूमि संरक्षण विधेयक (Assam Heritage Sites Land Protection Bill) पारित किया। जिसका उद्देश्य राज्य के प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के आस-पास की भूमि को संरक्षित करना है.
असम विरासत स्थलों हेतु भूमि संरक्षण विधेयक (Assam Heritage Sites Land Protection Bill) के मुख्य बिंदु:
- आधिकारिक नाम: इसे असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 (Assam Land and Revenue Regulation Amendment Bill 2026) के नाम से विधानसभा में पेश किया गया।
- मूल अधिनियम का संशोधन: यह नया विधेयक असम भूमि और राजस्व विनियमन, 1886 (Assam Land and Revenue Regulation, 1886) का संशोधित रूप है.
- पात्र संस्थान: यह कानून राज्य के उन सभी “प्रतिष्ठित विरासत संस्थानों” (Iconic Heritage Institutions) और धार्मिक स्थलों पर लागू होता है जो कम से कम 250 वर्ष या उससे अधिक पुराने हैं. इसमें सभी समुदायों के ऐतिहासिक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं.
- 5 किलोमीटर का बफर जोन: इस कानून (Assam Heritage Bill) के तहत सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह चिन्हित विरासत संस्थानों के चारों ओर 5 किलोमीटर के दायरे तक की भौगोलिक भूमि को ‘संरक्षित विरासत क्षेत्र’ (Protected Area) घोषित कर सकती है.
- भूमि लेनदेन पर प्रतिबंध: इस अधिसूचित 5 किमी के क्षेत्र के भीतर भविष्य में होने वाली सभी प्रकार की भूमि की खरीद, बिक्री और हस्तांतरण को कड़ाई से विनियमित (Regulated) किया जाएगा.
- ‘मूल निवासी’ की नई परिभाषा: विधेयक में संरक्षित क्षेत्र के भीतर ‘मूल निवासी’ (Original Inhabitant) की विधिक परिभाषा को पुनर्परिभाषित किया है:
- तीन पीढ़ियों का नियम: मूल निवासी वह व्यक्ति माना जाएगा जिसका परिवार 1 जनवरी 2006 तक उस विशिष्ट क्षेत्र में कम से कम तीन पीढ़ियों (Three Generations) से निरंतर निवास कर रहा हो.
- पीढ़ी की गणना: कानून के स्पष्टीकरण के अनुसार, विधिक रूप से एक पीढ़ी को 25 वर्ष के बराबर माना गया है (अर्थात कुल 75 वर्षों का प्रामाणिक निवास आवश्यक है).
- पात्र श्रेणियां: अधिसूचित बफर जोन में केवल निम्नलिखित श्रेणियों के नागरिकों या समुदायों को ही नई भूमि खरीदने, बेचने या धारण करने की पात्रता होगी:
- पुनर्परिभाषित मूल निवासी (Original Inhabitant).
- अनुसूचित जाति (Scheduled Castes – SC) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes – ST) समुदाय.
- स्वदेशी जातीय समुदाय (Indigenous Ethnic Communities): इसमें अहोम, मोरन, मोटोक, चुटिया और कोच राजबंशी समुदायों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है.
- वंचित समूह (Disadvantaged Groups): चाय बागान श्रमिक और अन्य अधिसूचित आदिवासी समूह.
- गैर-प्रतिगामी प्रभाव (No Retrospective Effect): मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, यह कानून पहले से वैध पट्टा (Valid Patta) रखने वाले मौजूदा भू-स्वामियों को प्रभावित नहीं करेगा. चाहे वे किसी भी धर्म या सामाजिक वर्ग के हों, उनकी वर्तमान भूमि सुरक्षित रहेगी.
- अतिक्रमण विरोधी शक्तियां (Anti-Encroachment Powers): यह विधेयक जिला आयुक्त (District Commissioner – DC) को संरक्षित विरासत क्षेत्रों से अवैध कब्जाधारियों और अनधिकृत निवासियों को बेदखल (Evict) करने की पूर्ण प्रशासनिक शक्ति प्रदान करता है.
- धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत (Secular Principle): यह कानून किसी विशेष अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ लक्षित नहीं है, बल्कि 250 वर्ष से पुराने सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि) के ऐतिहासिक स्थलों पर समान रूप से लागू होता है.
- लाभान्वित होने वाले प्रमुख ऐतिहासिक स्थल: इस भूमि संरक्षण कानून (Land Protection Law) से असम की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े निम्नलिखित मुख्य स्थलों को सुरक्षा मिलेगी:
- माजुली (Majuli): दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप और नव-वैष्णव संस्कृति का केंद्र.
- बारपेटा सत्र और बताद्रवा (Barpeta Satra & Batadrava): श्रीमंत शंकरदेव की वैष्णव सत्र परंपरा से जुड़े पूजनीय स्थल.
- कामाख्या मंदिर (Kamakhya Temple): गुवाहाटी में स्थित देश का प्रसिद्ध शक्तिपीठ.
- पोआ मक्का (Poa Macca): हाजो में स्थित ऐतिहासिक तीर्थ स्थल, जो हिंदू और इस्लामी दोनों संस्कृतियों का अनूठा संगम है.
इस कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Changes): असम के कई ऐतिहासिक सत्रों और सांस्कृतिक धरोहरों के आस-पास तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव देखा गया है, जिससे स्वदेशी संस्कृतियों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था.
- अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment): ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व (Archaeological Conservation) वाले क्षेत्रों की जमीनों पर अनधिकृत कब्जों को रोकने के लिए एक मजबूत विधिक संरक्षण की सख्त आवश्यकता थी.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: असम विरासत स्थलों हेतु भूमि संरक्षण विधेयक क्या है?
उत्तर: यह असम विधानसभा द्वारा पारित एक विधिक संशोधन है, जो 250 वर्ष से पुराने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के चारों ओर भूमि लेनदेन को विनियमित करता है.
प्रश्न 2: इस विधेयक का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य असम की सदियों पुरानी स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों की भूमि को अवैध अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय बदलावों से सुरक्षित रखना है.
प्रश्न 3: किन विरासत स्थलों को इसका लाभ मिलेगा?
उत्तर: इसके तहत कामाख्या मंदिर, माजुली के वैष्णव सत्र, बारपेटा सत्र, बताद्रवा और हाजो के पोआ मक्का जैसे 250+ वर्ष पुराने सभी प्रतिष्ठित स्थलों को लाभ मिलेगा.
प्रश्न 4: भूमि संरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: असम सरकार (Assam Government) के अनुसार, सांस्कृतिक क्षेत्रों के आस-पास अनियंत्रित भूमि बिक्री और अवैध कब्जों के कारण स्वदेशी समुदायों की पहचान को खतरा था.
प्रश्न 5: क्या इससे अवैध अतिक्रमण पर रोक लगेगी?
उत्तर: हाँ, यह विधेयक जिला आयुक्तों (DC) को संरक्षित 5 किमी के दायरे के भीतर से सभी अनधिकृत कब्जाधारियों को बेदखल करने की विशेष प्रशासनिक शक्ति देता है.
प्रश्न 6: विधेयक में कौन-कौन से प्रमुख प्रावधान हैं?
उत्तर: प्रमुख प्रावधानों में 5 किमी का संरक्षित बफर जोन बनाना, 1 जनवरी 2006 तक की 3 पीढ़ियों के प्रामाणिक निवास को मूल निवासी मानना और बाहरी खरीद पर रोक शामिल है.।
