Tummidihatti Barrage- अवस्थिति, क्षमता, महत्व और विवाद
संदर्भ:
हाल ही में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से नई दिल्ली में मुलाकात कर महाराष्ट्र सरकार के साथ लंबे समय से लंबित तुम्मिदिहेट्टी बैराज (Tummidihatti Barrage) की ऊंचाई से जुड़े अंतर-राज्यीय जल विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की।
तुम्मिदिहेट्टी बैराज (Tummidihatti Barrage) परियोजना के बारे में:
- स्थान: यह परियोजना तेलंगाना (Telangana) राज्य के आदिलाबाद (अब कोमुराम भीम आसिफाबाद) जिले के कौटला मंडल के तुम्मिदिहेट्टी गाँव में प्रस्तावित प्रोजेक्ट है।
- यह बैराज गोदावरी नदी प्रणाली (Godavari River System) की एक प्रमुख उपनदी प्राणहिता नदी (Pranahita River) पर प्रस्तावित है। यह वर्धा और वैनगंगा नदियों के संगम के ठीक नीचे स्थित है।
- मूल योजना: यह परियोजना डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला लिफ्ट सिंचाई योजना (PCSS) का मुख्य हिस्सा है।
- क्षमता: इसके माध्यम से लगभग 20 टीएमसी (TMC) पानी को मोड़ने (Diversion) का लक्ष्य रखा गया है।
- यह गुरुत्वाकर्षण प्रवाह (Gravity Flow) के सिद्धांत पर आधारित है। यदि इसे पर्याप्त ऊंचाई मिलती है, तो बिना भारी बिजली खर्च और लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों (Lift Irrigation Systems) के पानी की आपूर्ति की जा सकती है।
- महत्व:
- सिंचाई क्षमता (Irrigation): यह परियोजना तेलंगाना के पिछड़े और सूखाग्रस्त आदिलाबाद जिले में 2,00,000 एकड़ कृषि भूमि (Ayacut) को सुनिश्चित सिंचाई सुविधाएं प्रदान करेगी।
- कृषि अवसंरचना (Agriculture Infrastructure): सुनिश्चित जल उपलब्धता से स्थानीय किसानों की आय बढ़ेगी, फसल की सघनता में सुधार होगा और उत्तर तेलंगाना में ग्रामीण विकास (Rural Development) को गति मिलेगी।
बैराज से संबंधित जल विवाद:
तुम्मिदिहेट्टी बैराज परियोजना का मुख्य विवाद पूर्ण जलाशय स्तर (Full Reservoir Level – FRL) यानी बैराज की ऊंचाई को लेकर है।
- पृष्ठभूमि: आंध्र प्रदेश (विभाजन से पहले) ने शुरू में इस बैराज की ऊंचाई 152 मीटर रखने का प्रस्ताव दिया था।
- महाराष्ट्र सरकार ने इस ऊंचाई पर कड़ी आपत्ति जताई क्योंकि इससे उसके राज्य के बड़े हिस्से में जलमग्नता (Submergence) का खतरा था।
- 2016 का समझौता: वर्ष 2016 में दोनों राज्यों के बीच एक अंतर-राज्यीय समझौता हुआ, जिसमें बैराज की ऊंचाई घटाकर 148 मीटर करने पर सहमति बनी।
- वर्तमान परिप्रेक्ष्य:
- तेलंगाना का पक्ष:मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अनुसार, बैराज की ऊंचाई को 148 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर या 152 मीटर किया जाना चाहिए।
- पुणे स्थित केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS) के अध्ययनों का हवाला देते हुए तेलंगाना का तर्क है कि ऊंचाई बढ़ाने से जलमग्नता क्षेत्र (Submergence Area) 1,000 हेक्टेयर से कम रहेगा और यह मुख्य रूप से नदी के तल (Riverbed) तक ही सीमित रहेगा।
- 148 मीटर की कम ऊंचाई से गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) द्वारा पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे भारी बिजली खर्च वाली खर्चीली लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों पर निर्भरता बढ़ती है।
- महाराष्ट्र का पक्ष: महाराष्ट्र का मानना है कि ऊंचाई बढ़ाने से सीमावर्ती जिलों के कृषि क्षेत्रों और बस्तियों में बाढ़ तथा जलभराव (Submergence) का जोखिम काफी बढ़ जाएगा। वे 2016 में तय 148 मीटर के तकनीकी ढांचे पर ही बने रहना चाहते हैं।
- तेलंगाना का पक्ष:मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अनुसार, बैराज की ऊंचाई को 148 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर या 152 मीटर किया जाना चाहिए।
- हस्तक्षेप:
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO): तेलंगाना सरकार द्वारा भेजे गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस विषय को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को अग्रसारित किया है।
- केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC): जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने आश्वासन दिया है कि इस विवाद (Water Dispute) को सुलझाने के लिए जल्द ही CWC की एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
- इसके बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों और सिंचाई मंत्रियों (Irrigation Ministers) के स्तर पर त्रिपक्षीय वार्ता का आयोजन किया जाएगा।
- न्यायिक परिप्रेक्ष्य: अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 और संविधान के अनुच्छेद 262 के तहत गठित न्यायाधिकरण (Tribunals) या सौहार्दपूर्ण आपसी समझौतों के जरिए ही इन मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जाए। वर्तमान में दोनों पक्ष न्यायिक मुकदमेबाजी के बजाय आपसी सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
पर्यावरणीय चुनौतियां:
परियोजना स्थल के पास महाराष्ट्र की चपराला वन्यजीव अभयारण्य (Chaprala Wildlife Sanctuary) स्थित है। इसके कारण इस परियोजना को अंतिम रूप देने और आवश्यक वन एवं पर्यावरण मंजूरियां (Environmental Clearances) प्राप्त करने में कुछ नियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: तुम्मिदिहेट्टी बैराज क्या है?
उत्तर: यह गोदावरी नदी तंत्र की एक नदी पर प्रस्तावित एक अंतर-राज्यीय बैराज और सिंचाई परियोजना (Irrigation Project) है।
प्रश्न 2: यह बैराज किस नदी पर प्रस्तावित है?
उत्तर: यह बैराज तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में गोदावरी की प्रमुख सहायक प्राणहिता नदी (Pranahita River) पर प्रस्तावित है।
प्रश्न 3: इस परियोजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य उत्तर तेलंगाना के पिछड़ा और सूखा प्रवण क्षेत्रों की 2 लाख एकड़ कृषि भूमि को गुरुत्वाकर्षण प्रवाह (Gravity Flow) से सिंचाई का पानी देना है।
प्रश्न 4: इससे किन राज्यों को लाभ मिलेगा?
उत्तर: इससे मुख्य रूप से तेलंगाना के कृषि और जल संसाधनों (Water Resources) को लाभ मिलेगा, जबकि इसके जलमग्नता क्षेत्र का प्रबंधन महाराष्ट्र के समन्वय से होना है।
प्रश्न 5: क्या यह परियोजना किसी विवाद से जुड़ी है?
उत्तर: हाँ, यह बैराज की ऊंचाई (FRL) को लेकर विवाद में है, जहाँ तेलंगाना इसे 150 मीटर करना चाहता है और महाराष्ट्र पूर्व में 148 मीटर पर सहमत था।हैं.
